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झुलसा रोग लगा तो जल्द कम नहीं होंगे आलू के भाव
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बदायूं। कई महीने से रसोई का बजट बिगाड़ रहे आलू की कीमतों में फिलहाल कमी आने की उम्मीद कम ही है। इस बीच मौसम में लगातार हो रहे बदलाव से आलू की फसल पर झुलसा रोग का खतरा मंडरा रहा है। बारिश की संभावना के चलते आलू उत्पादक किसान परेशान हैं। पिछले वर्ष भी आलू की फसल को झुलसा रोग और बारिश से काफी नुकसान हुआ था। इसी का खामियाजा है कि कई महीने से आलू का भाव 40 से 45 रुपये प्रति किलो बना हुआ है। अगर फिर से मौसम धोखा देता है तो आलू की कीमतों में कमी होने की उम्मीद कम ही है।
आगरा, मथुरा, फर्रुखाबाद, कन्नौज के साथ आलू उत्पादन में बदायूं का भी काफी नाम है। जिले में 72 कोल्ड स्टोर में 3.60 लाख एमटी आलू भंडारण की क्षमता है। इसके बावजूद आलू के दाम आसमान पर बने हुए हैं। इस साल जिले में आलू की बुवाई का काम पूरा हो चुका है। दिसंबर के अंत तक स्थानीय आलू बाजार में आने लगेगा, लेकिन इससे पहले मौसम के बदलते मिजाज से फसल को खतरा पैदा हो गया है। जिले के किसानों के लिए आलू एक प्रमुख फसल है। इस बार आलू की कीमत सही रहने के चलते किसानों को आलू की फसल से फायदे की उम्मीद है, लेकिन मौसम की मार से अब आलू की फसल में उन्हें नुकसान होने की आशंका सताने लगी है। तापमान ज्यादा गिरने और कोहरे से आलू में झुलसा रोग हो जाता है। इससे पौध सूखने से बढ़वार रुक जाती है। इसके साथ ही बारिश का पानी खेत में भरने से आलू जमीन के अंदर ही सड़ जाता है।
जानकारों के अनुसार मौसम में लगातार परिवर्तन, आसमान में धुंध, बादल और कोहरा आलू के लिए नुकसानदायक है। अगर आलू में झुलसा रोग फैल जाता है तो किसानों के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। किसानों के लिए आलू की लागत भी निकालना मुश्किल होगा। आलू में अब तक सात से नौ हजार रुपये प्रति बीघा का खर्च आ चुका है। ऐसे में जहां किसानों को नुकसान होगा वहीं आलू की कीमतें भी आसमान पर रहने की उम्मीद है।
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दिसंबर के अंत तक बाजार में आएगा स्थानीय आलू
- आलू की काश्तकारी से जुड़े किसानों की मानें तो अगर मौसम ने साथ दिया तो दिसंबर के अंत तक जिले का स्थानीय आलू बाजार में आ जाएगा। इसके बाद आलू की कीमतों में काफी कमी आएगी। हालांकि, अब भी नया आलू बाजार में आ रहा है लेकिन यह दूसरे जिलों और राज्यों का है। ट्रांसपोर्ट आदि में खर्च होने के कारण दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले आलू का भाव ज्यादा है। इसी कारण पुराने आलू की कीमतों में भी कमी नहीं आई है। स्थानीय फसल बाजार में आने के बाद ही कीमतें कम होंगी। फसल तैयार होने में अभी कम से कम एक महीने का वक्त लगेगा।
वैसे तो जिले में आलू का अच्छा उत्पादन होता है, लेकिन मौसम और बीमारियों के कारण अगर फसल को नुकसान होता है तो कीमतें बढ़ जाती हैं। पिछले वर्ष फसल को नुकसान के कारण कोल्ड स्टोर पूरी तरह से नहीं भरे जा सके थे। नया आलू बाजार में आने में अभी कम से कम एक महीना लगेगा।
- हितेश शंखधार, कोल्ड स्टोर स्वामी
---------
पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष जिले में आलू का रकबा बढ़ा है। फिलहाल मौसम को लेकर चिंताएं हैं। हालांकि, अब तक फसल काफी अच्छी है। एक महीने में फसल तैयार होकर बाजार में आ जाएगी। अगर तापमान ज्यादा कम होने के साथ कोहरा या बारिश होती है तो फसल को नुकसान होगा।
- मनोज गुप्ता, आलू काश्तकार
अभी दूसरे जिलों और राज्यों का आलू बाजार में आ रहा है। स्थानीय फसल तैयार होने में करीब एक महीने का वक्त लगेगा। आलू की फसल को झुलसा रोग की संभावना है। झुलसा से बचाव के लिए हल्की सिंचाई काफी बेहतर है। जब तक खेत में नमी बनी रहती है तब तक पाले का प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके साथ ही किसान आलू की फसल में 2.5 किलोग्राम मैगनीज कार्बामेट को एक हजार लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से स्प्रे करें। इसके अलावा मैंकोजेब 2.5 किलोग्राम का भी प्रति हजार लीटर घोल बनाकर छिड़काव कर आलू को झुलसा से बचाया जा सकता है।
- सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
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आगरा, मथुरा, फर्रुखाबाद, कन्नौज के साथ आलू उत्पादन में बदायूं का भी काफी नाम है। जिले में 72 कोल्ड स्टोर में 3.60 लाख एमटी आलू भंडारण की क्षमता है। इसके बावजूद आलू के दाम आसमान पर बने हुए हैं। इस साल जिले में आलू की बुवाई का काम पूरा हो चुका है। दिसंबर के अंत तक स्थानीय आलू बाजार में आने लगेगा, लेकिन इससे पहले मौसम के बदलते मिजाज से फसल को खतरा पैदा हो गया है। जिले के किसानों के लिए आलू एक प्रमुख फसल है। इस बार आलू की कीमत सही रहने के चलते किसानों को आलू की फसल से फायदे की उम्मीद है, लेकिन मौसम की मार से अब आलू की फसल में उन्हें नुकसान होने की आशंका सताने लगी है। तापमान ज्यादा गिरने और कोहरे से आलू में झुलसा रोग हो जाता है। इससे पौध सूखने से बढ़वार रुक जाती है। इसके साथ ही बारिश का पानी खेत में भरने से आलू जमीन के अंदर ही सड़ जाता है।
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जानकारों के अनुसार मौसम में लगातार परिवर्तन, आसमान में धुंध, बादल और कोहरा आलू के लिए नुकसानदायक है। अगर आलू में झुलसा रोग फैल जाता है तो किसानों के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। किसानों के लिए आलू की लागत भी निकालना मुश्किल होगा। आलू में अब तक सात से नौ हजार रुपये प्रति बीघा का खर्च आ चुका है। ऐसे में जहां किसानों को नुकसान होगा वहीं आलू की कीमतें भी आसमान पर रहने की उम्मीद है।
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दिसंबर के अंत तक बाजार में आएगा स्थानीय आलू
- आलू की काश्तकारी से जुड़े किसानों की मानें तो अगर मौसम ने साथ दिया तो दिसंबर के अंत तक जिले का स्थानीय आलू बाजार में आ जाएगा। इसके बाद आलू की कीमतों में काफी कमी आएगी। हालांकि, अब भी नया आलू बाजार में आ रहा है लेकिन यह दूसरे जिलों और राज्यों का है। ट्रांसपोर्ट आदि में खर्च होने के कारण दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले आलू का भाव ज्यादा है। इसी कारण पुराने आलू की कीमतों में भी कमी नहीं आई है। स्थानीय फसल बाजार में आने के बाद ही कीमतें कम होंगी। फसल तैयार होने में अभी कम से कम एक महीने का वक्त लगेगा।
वैसे तो जिले में आलू का अच्छा उत्पादन होता है, लेकिन मौसम और बीमारियों के कारण अगर फसल को नुकसान होता है तो कीमतें बढ़ जाती हैं। पिछले वर्ष फसल को नुकसान के कारण कोल्ड स्टोर पूरी तरह से नहीं भरे जा सके थे। नया आलू बाजार में आने में अभी कम से कम एक महीना लगेगा।
- हितेश शंखधार, कोल्ड स्टोर स्वामी
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पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष जिले में आलू का रकबा बढ़ा है। फिलहाल मौसम को लेकर चिंताएं हैं। हालांकि, अब तक फसल काफी अच्छी है। एक महीने में फसल तैयार होकर बाजार में आ जाएगी। अगर तापमान ज्यादा कम होने के साथ कोहरा या बारिश होती है तो फसल को नुकसान होगा।
- मनोज गुप्ता, आलू काश्तकार
अभी दूसरे जिलों और राज्यों का आलू बाजार में आ रहा है। स्थानीय फसल तैयार होने में करीब एक महीने का वक्त लगेगा। आलू की फसल को झुलसा रोग की संभावना है। झुलसा से बचाव के लिए हल्की सिंचाई काफी बेहतर है। जब तक खेत में नमी बनी रहती है तब तक पाले का प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके साथ ही किसान आलू की फसल में 2.5 किलोग्राम मैगनीज कार्बामेट को एक हजार लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से स्प्रे करें। इसके अलावा मैंकोजेब 2.5 किलोग्राम का भी प्रति हजार लीटर घोल बनाकर छिड़काव कर आलू को झुलसा से बचाया जा सकता है।
- सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी