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नहीं हो पाया सूर्यकुंड का सुंदरीकरण
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
Updated Sat, 02 Sep 2017 07:27 PM IST
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बदायूं के प्राचीन नाम बदौंगढ़ में राजा महीपाल सिंह ने अपनी राजधानी में शहर से करीब डेढ़ किलो मीटर दूरी पर 11वीं शताब्दी में सूर्यकुंड का निर्माण कराया था। पुराने दौर के कुछ अवशेष समेटे सूर्यकुंड कभी किसी सियासी दल के चुनाव एजेंडे में शामिल नहीं हुआ। पिछली सपा सरकार के सांसद ने इसके सुंदरीकरण का एजेंडा जरूर तैयार किया था, लेकिन छोटे शहर में एक पर्यटन स्थल का विजन नहीं बना।
करीब एक करोड़ रुपये सूर्यकुंड की बाउंड्री के नाम पर खर्च तो किए गए, बाउंड्री भी बन गई, लेकिन सूर्यकुंड आज भी स्वच्छता और सुंदरीकरण के लिए तरस रहा है। पड़ोसी गांव के लोग अपनी भैंसों को सूर्यकुंड परिसर में चराते हैं, मछली मारते हैं। यह जुआरियों का अड्डा भी बन गया है। रही बची कसर लोग यहां शौच करके पूरी कर देते हैं। यह दुर्भाग्य की बात है कि किसी राजा ने नहाने के लिए पवित्र सूर्यकुंड का निर्माण कराया था, लेकिन आज लोग उसमें शौच कर रहे हैं। शनिवार को लोग वहां मछली मारते हुए, जुआरी जुआ खेलते और इसी परिसर में महिलाएं शौच को जातीं मिली। परिसर में भैंस चराते लोगों ने कहा कि सूर्यकुंड परिसर में जूनियर विद्यालय है। इसलिए यह गेट हमेशा खुला रहता है। इससे गांव के लोग भैंस चराने और शौच को आ जाते हैं। ऐसे में करोड़ों की लागत से बनी बाउंड्री का कोई महत्व नहीं है।
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करीब एक करोड़ रुपये सूर्यकुंड की बाउंड्री के नाम पर खर्च तो किए गए, बाउंड्री भी बन गई, लेकिन सूर्यकुंड आज भी स्वच्छता और सुंदरीकरण के लिए तरस रहा है। पड़ोसी गांव के लोग अपनी भैंसों को सूर्यकुंड परिसर में चराते हैं, मछली मारते हैं। यह जुआरियों का अड्डा भी बन गया है। रही बची कसर लोग यहां शौच करके पूरी कर देते हैं। यह दुर्भाग्य की बात है कि किसी राजा ने नहाने के लिए पवित्र सूर्यकुंड का निर्माण कराया था, लेकिन आज लोग उसमें शौच कर रहे हैं। शनिवार को लोग वहां मछली मारते हुए, जुआरी जुआ खेलते और इसी परिसर में महिलाएं शौच को जातीं मिली। परिसर में भैंस चराते लोगों ने कहा कि सूर्यकुंड परिसर में जूनियर विद्यालय है। इसलिए यह गेट हमेशा खुला रहता है। इससे गांव के लोग भैंस चराने और शौच को आ जाते हैं। ऐसे में करोड़ों की लागत से बनी बाउंड्री का कोई महत्व नहीं है।
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