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Budaun News: रकबा में वृद्धि व गुणवत्ता में सुधार के बाद भी आलू पर मद्दे की मार

Thu, 08 Jan 2026 11:56 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jan 2026 11:56 PM IST
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Despite an increase in area under cultivation and improved quality, potatoes are still facing the brunt of the crisis.
उझानी क्षेत्र में आलू की फसल। संवाद
उझानी। रकबा में वृद्धि और गुणवत्ता में सुधार के बाद भी सब्जियों के राजा आलू के इस बार अच्छे दिन नहीं आए। कच्चे आलू की खोदाई कराके किसान फंस गए। शुरूआती दिनों में ही मद्दा की मार की वजह से उनके सामने लागत निकल आने के लाले पड़ गए हैं। आने वाले दिनों में भाव में उछाल आने की उम्मीद भी कम ही है, फिर भी किसानों समेत कारोबारी हालत पर नजर रखे हुए हैं। वहीं लाल आलू का रेट सफेद के मुकाबले प्रति क्विंटल 250 रुपये ज्यादा है।
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जिले में हाइब्रिड आलू के प्रति किसानों का रुझान पिछले कुछेक सालों में महज इसलिए बढ़ा है कि देशी प्रजाति के मुकाबले हाइब्रिड प्रजातियों की पैदावार अच्छी होती है। पके आलू की खोदाई हालांकि अगले महीना के पहले सप्ताह में शुरू होगी, लेकिन कच्चा बाजार में पिछले महीना ही आ गया। आलू उत्पादकों में किसान रामपाल ने बताया कि इस बार कच्चा आलू प्रति बीघा में 20 क्विंटल से अधिक नहीं निकल रहा है। पहले 25 क्विंटल प्रति बीघा तक आलू निकल आता था। इसकी असल वजह शुरूआती दिनों में झुलसा रोग का लगना रहा है।
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पक्के आलू की पैदावार में कोई खास इजाफा होने की उम्मीद नहीं है। पकने की स्थिति में पैदावार 25 क्विंटल प्रति बीघा निकल सकती है। आलू के थोक बाजार की मौजूदा स्थिति भी अच्छी नहीं है। कच्चा आलू प्रति क्विंटल 450 रुपये तो पकने की स्थिति में दो-ढाई सौ रुपये की वृद्धि का अनुमान है।
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हालांकि सफेद के मुकाबले लाल आलू का रकबा कोई खास नहीं बढ़ा। इन दिनों मांग अधिक होने से कच्चे लाल आलू का थोक भाव इन दिनों सात सौ रुपये प्रति क्विंटल पार कर गया है। बता दें कि जिले में इस बार आलू का रकबा करीब दो हजार हेक्टेअर बढ़ा है। भंडारण के लिए शीतगृहों की संख्या 131 हो गई है।

मेहनताना निकलना तो दूर, घट गए 30 हजार रुपये
अहीरवारा निवासी चंद्रपाल ने इस बार 10 बीघा खेत में आलू किया। पिछले सप्ताह खोदाई कराके आलू बेचा दिया। रुपये लेकर घर लौटे तो परिजनों के साथ गुणा-भाग करने बैठ गए। बोले- मंडी में 90 हजार रुपये का आलू बिका, जबकि लागत 1.20 लाख रुपये आई है। बोआई से लेकर खोदाई तक उन्होंने जो मेहनत की, उसका धेला भी नहीं मिला। कच्चे आलू की खेती करके चंद्रपाल की तरह ही अनगिनत किसान घाटे में रहे हैं।


ज्यादा अच्छा नहीं रहेगा आलू का कारोबार
कच्चे आलू की खरीद में थोक व्यापारी दिलचस्पी नहीं दिखाते। भंडारण और अन्य राज्योें में भेजने के लिए पक्के आलू की खरीद की जाती है। चूंकि, कच्चे आलू का भाव ही इन दिनों काफी कम है, ऐसे में कारोबार भी इस बार ज्यादा अच्छा रहने की उम्मीद नहीं कर सकते। - अमित अग्रवाल, थोक व्यापारी


खोदाई कराके पहली बार में ही नुकसान उठा बैठे
आलू की बोआई समय रहते की गई थी। सिंचाई से लेकर खाद और कीटनाशक का इस्तेमाल भी समय रहते किया गया। पांच दिन पहले खोदाई कराके तो पैदावार देख होश फाख्ता हो गए। काफी घाटा हो चुका है। अगले साल माहौल ठीक लगा तो फिर कोशिश करेंगे।- गोविंद, आलू उत्पादक


आलू की फसल में इस बार झुलसा रोग लगने से कच्चे आलू की पैदावार कम हुई है। अगेती झुलसा से फसल प्रभावित हुई। पक्के आलू की खेती में नुकसान होने की आशंका कम है। कच्चे के मुकाबले पके आलू की पैदावार अधिक होती है।- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक

उझानी क्षेत्र में आलू की फसल। संवाद

उझानी क्षेत्र में आलू की फसल। संवाद

उझानी क्षेत्र में आलू की फसल। संवाद

उझानी क्षेत्र में आलू की फसल। संवाद

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