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पूर्व विधायक आबिद रजा के मैरिज हॉल पर आज हो सकता है फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बदायूं
Updated Wed, 03 Jan 2018 12:48 AM IST
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सोत नदी किनारे निर्माणाधीन पूर्व शहर विधायक आबिद रजा का मैरिज हॉल विवादों में घिरा है। नवंबर में सिटी मजिस्ट्रेट ने इसे तोड़ने के आदेश दिए थे तो उसके विरोध में आबिद रजा ने डीएम के यहां अपील दायर की थी। डीएम ने प्रकरण की सुनवाई को तीन जनवरी 2018 तय की है। यहां दोनों पक्ष अपनी दलील रखेंगे। मैरिज हॉल टूटेगा या नहीं इसका फैसला बुधवार को हो सकता है।
24 नवंबर को सिटी मजिस्ट्रेट राजकुमार द्विवेदी ने विनियमित क्षेत्र के प्राधिकारी के तौर पर सोत नदी पुल के पास बनाए जा रहे पूर्व विधायक आबिद रजा और फात्मा रजा के स्वामित्व वाले मैरिज हॉल को गिराने के आदेश जारी कर दिए थे। करीब सप्ताह भर बाद शहर विधायक महेश गुप्ता ने प्रेसवार्ता में इस आदेश को सार्वजनिक किया था। उन्होंने बताया था कि शासन की प्राथमिकता है कि नदी किनारे से कब्जे हटाए जाएं। उसी के अनुपालन में यह कार्रवाई की गई है। आदेश में निहित था कि यह मैरिज हॉल अनाधिकृत रूप से सोत नदी के बाढ़ क्षेत्र में बना है। इसका नक्शा भी इसी आधार पर पास नहीं किया गया है। इससे नदी की धारा अविरल नहीं बह पा रही। भवन स्वामी को चेतावनी दी गई थी कि इस निर्माण को अधिकतम एक माह में गिरा लें, वर्ना प्रशासन ढहा देगा। हालांकि विधिक प्रक्रिया के तहत अपील करने के लिए भी एक महीने का समय दिया गया था।
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बीस दिसंबर को पूर्व विधायक आबिद रजा की ओर से इस आदेश के विरुद्ध अपील दायर की गई। इसमें उन्होंने तर्क दिया है कि छह जून 2015 को तत्कालीन एसडीएम सदर ने जांच के बाद इसे आबादी की भूमि घोषित किया है तो फिर किस आधार पर इसे अवैध ठहराया जा रहा है। उनके बैनामे के आधार पर भी यह अविवादित संपत्ति है। भूखंड स्वामित्व के संबंध में किसी न्यायालय में कोई विवाद नहीं है। अपने दावे के समर्थन में पैरवी की गई है कि इसे बाढ़ क्षेत्र में बताया जा रहा है। बदायूं शहर में करीब तीस साल से बाढ़ नहीं आई है। इसलिए यह भूमि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में नहीं है। अगर यह इस क्षेत्र में होती तो राजस्व विभाग इसे कृषि भूमि से आबादी की भूमि में कभी नहीं बदलता। इसी तरह के कई और तर्कों से सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को खारिज करने की मांग की गई है।
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विधायक विदेश में, सिटी मजिस्ट्रेट बीमार
सपा के दिग्गज नेता आजम खां के खास रहे पूर्व विधायक आबिद रजा के निर्माण को तोड़ने का आदेश सिटी मजिस्ट्रेट ने किया था तो शहर विधायक महेश गुप्ता ने जोरशोर से इसे प्रचारित करके अपनी उपलब्धि बताया था। अब जब इस आदेश की प्रासंगिकता पर खतरा मंडरा रहा है तो दोनों ही यहां नहीं हैं। शहर विधायक अमेरिका की यात्रा पर गए हैं तो सिटी मजिस्ट्रेट बीमार हैं और कार्यालय में कम ही आ रहे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय से इतना पता लगा कि आदेश पर डीएम के यहां सुनवाई बुधवार को है, पर इसमें सिटी मजिस्ट्रेट मौजूद रहेंगे इसकी गारंटी नहीं है। सिटी मजिस्ट्रेट की गैरहाजिरी में उनके आदेश के पक्ष में पैरवी कौन करेगा ? यह भी तय नहीं हो सका है। सिटी मजिस्ट्रेट ने मोबाइल पर हुई बातचीत में बस इतना कहा कि उनकी तबीयत कई दिन से खराब चल रही है।