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Budaun News: एक्सप्रेस-वे किनारे के नहीं पाटे जा रहे मौत के गड्ढे, फिर बनेंगे काल
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बिनावर क्षेत्र में एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे। संवाद
बदायूं। निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण में इस्तेमाल हो रही मिट्टी के लिए खोदे गए गड्ढे बच्चों के लिए काल साबित हो रहे है। मिट्टी उठान से गड्ढे 15 से 20 फीट तक गहरे हो गए है। बारिश के मौसम में पानी भरने से तालाब में तब्दील हो जाएंगे। गत वर्ष दातागंज, मूसाझाग, बिनावर थानाक्षेत्र मेंं कई बच्चों के डूबने की कई घटनाएं हुई थी। पिछले दिनों भी गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई।
मेरठ से प्रयागराज तक बन रहा गंगा एक्सप्रेस-वे का सबसे बड़ा हिस्सा बदायूं से गुजर रहा है। इसके निर्माण से जहां लोगों को सहूलियत मिलेगी। वहीं कई परिवारों को ताउम्र दर्द दे गया है। ठेकेदारों ने निर्माण कार्य के लिए बिसौली, वजीरगंज, बिनावर, मूसाझाग, रेहड़िया और दातागंज क्षेत्र के इलाकों में मिट्टी निकाली। उससे जगह- जगह गहरे-गहरे गड्ढे हो गए। वह गड्ढे अब आफत बनगए हैं।
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15 से 20 फुट तक खोद दिए गए गड्ढे
मिट्टी उठान के लिए जेसीबी से तीन से चार फीट पर खोदाई की सीमा होनी चाहिए थी, लेकिन इन क्षेत्रों में 15 से 20 फुट तक गहरे गड्ढे खोद दिए गए। गंगा एक्सप्रेस-वे की सीमा में आने वाले दातागंज से लेकर बिसौली क्षेत्र तक सैकड़ों की संख्या में गड्ढे खोद दिए गए है, लेकिन जिम्मेदार अब तक चुप्पी साध हुए है।
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दो छात्रों की मौत से सिस्टम पर सवाल
बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गांव सिद्धपुर कैथोली निवासी बॉबी (14) पुत्र भूरे कश्यप और सलमान (16) पुत्र झबूरी की 19 अप्रैल को गड्ढे में डूबकर मौत हो गई थी। दोनों ही छात्र परिवार के लाडले थे। घटना के बाद भी पीड़ित परिवार को किसी तरह के मुआवजा का ऐलान नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गड्ढे खोदकर छोड़ने के पीछे किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। जिला प्रशासन की ओर से भी पीड़ित परिवार को किसी तरह की मदद नहीं दी गई है।
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- रोटा गांव किनारे कई गड्ढे खोदे गए है। आठ से 10 फुट तक गड्ढे खोदे गए है। बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाता है। बच्चों की जान का खतरा बना रहता है। प्रशासन से मांग है कि बारिश होने से पहले इन गड्ढों को बंद करा दिया जाए। - शिवनंदन, ग्रामीण
गंंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण को खोदे गए गड्ढे से कई बार घटनाएं हो चुकी है। गड्ढे पाटने के लिए कई बार प्रदर्शन हुए है, लेकिन जिम्मेदारों ने अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया है।
रामसेवक, ग्रामीण
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- कंपनी जितना भी काम करती है। उसके लिए अनुमति लेती है। इसके बिना हमारे बिल पास नहीं होते, गंगा एक्सप्रेस-वे का काम दो साल से चल रहा है। उससे पहले से गांवों में खनन हुआ है।
- दीपक सिंह, रौठार, प्रोजेक्ट मैनेजर, कार्यदायी संस्था
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मेरठ से प्रयागराज तक बन रहा गंगा एक्सप्रेस-वे का सबसे बड़ा हिस्सा बदायूं से गुजर रहा है। इसके निर्माण से जहां लोगों को सहूलियत मिलेगी। वहीं कई परिवारों को ताउम्र दर्द दे गया है। ठेकेदारों ने निर्माण कार्य के लिए बिसौली, वजीरगंज, बिनावर, मूसाझाग, रेहड़िया और दातागंज क्षेत्र के इलाकों में मिट्टी निकाली। उससे जगह- जगह गहरे-गहरे गड्ढे हो गए। वह गड्ढे अब आफत बनगए हैं।
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15 से 20 फुट तक खोद दिए गए गड्ढे
मिट्टी उठान के लिए जेसीबी से तीन से चार फीट पर खोदाई की सीमा होनी चाहिए थी, लेकिन इन क्षेत्रों में 15 से 20 फुट तक गहरे गड्ढे खोद दिए गए। गंगा एक्सप्रेस-वे की सीमा में आने वाले दातागंज से लेकर बिसौली क्षेत्र तक सैकड़ों की संख्या में गड्ढे खोद दिए गए है, लेकिन जिम्मेदार अब तक चुप्पी साध हुए है।
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दो छात्रों की मौत से सिस्टम पर सवाल
बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गांव सिद्धपुर कैथोली निवासी बॉबी (14) पुत्र भूरे कश्यप और सलमान (16) पुत्र झबूरी की 19 अप्रैल को गड्ढे में डूबकर मौत हो गई थी। दोनों ही छात्र परिवार के लाडले थे। घटना के बाद भी पीड़ित परिवार को किसी तरह के मुआवजा का ऐलान नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गड्ढे खोदकर छोड़ने के पीछे किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। जिला प्रशासन की ओर से भी पीड़ित परिवार को किसी तरह की मदद नहीं दी गई है।
- रोटा गांव किनारे कई गड्ढे खोदे गए है। आठ से 10 फुट तक गड्ढे खोदे गए है। बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाता है। बच्चों की जान का खतरा बना रहता है। प्रशासन से मांग है कि बारिश होने से पहले इन गड्ढों को बंद करा दिया जाए। - शिवनंदन, ग्रामीण
गंंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण को खोदे गए गड्ढे से कई बार घटनाएं हो चुकी है। गड्ढे पाटने के लिए कई बार प्रदर्शन हुए है, लेकिन जिम्मेदारों ने अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया है।
रामसेवक, ग्रामीण
- कंपनी जितना भी काम करती है। उसके लिए अनुमति लेती है। इसके बिना हमारे बिल पास नहीं होते, गंगा एक्सप्रेस-वे का काम दो साल से चल रहा है। उससे पहले से गांवों में खनन हुआ है।
- दीपक सिंह, रौठार, प्रोजेक्ट मैनेजर, कार्यदायी संस्था

बिनावर क्षेत्र में एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे। संवाद

बिनावर क्षेत्र में एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे। संवाद

बिनावर क्षेत्र में एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे। संवाद

बिनावर क्षेत्र में एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे। संवाद