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रोडवेज बस की टक्कर से बाइक सवार दंपती की मौत
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उझानी (बदायूं)। कई दिन से सड़क पर रोजाना सुखाने के लिए फैलाई जा रही मक्का की वजह से मंगलवार को भीषण हादसा हो गया। सड़क के एक लेन पर फैली मक्का के बराबर से गुजर रहे बाइक सवार दंपती को तेज रफ्तार रोडवेज बस ने रौंद दिया। बाइक सवार दंपती की मौके पर ही मौत हो गई। दंपती दातागंज क्षेत्र का निवासी था। हादसे के बाद चालक और परिचालक बस छोड़कर जंगल की ओर भाग गए। पुलिस ने दोनों के शव कब्जे पोस्टमार्टम कराने को भेज दिए हैं। हादसा स्थल पर काफी देर तक वाहनों का आवागमन भी प्रभावित रहा।
हादसा बरेली-मथुरा हाईवे स्थित बाईपास पर मिहौना मोड़ के नजदीक दोपहर में करीब एक बजे हुआ। दातागंज तहसील क्षेत्र के गांव जैपालपुर-धनोररा निवासी अवधेश गुप्ता (24) की पत्नी अंजली (22) का बदायूं के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। अवधेश पत्नी को बाइक पर बैठाकर निजी अस्पताल पहुंचा तो दोपहर बाद दिखाने का नंबर मिला। इसके बाद वह पत्नी और सात महीने के मासूम बेटे के साथ यहां साहूकारा मोहल्ला निवासी बहनोई लव कुमार के घर चला आया। मासूम बेटे को बहन लता के पास छोड़कर वह बदायूं की ओर निकले, तभी बदायूं डिपो की तेज रफ्तार रोडवेज बस ने सामने से रौंद दिया। बाइक सवार दंपती की मौके पर ही मौत हो गई। अवधेश हेलमेट तो लगाए था, लेकिन वह चकनाचूर हो गया।
जिस स्थान पर हादसा हुआ। सड़क के दूसरे लेन पर मक्का सूख रही थी। चश्मदीदों की मानें तो मक्का की वजह से दोनों वाहन चालकों को एक-दूसरे से बचने का मौका भी नहीं मिल पाया। हादसे की सूचना के पुलिस मौके पर पहुंचे पुलिस फोर्स ने मृतक दंपती के शव कब्जे में लेकर एंबुलेंस के जरिये जिला अस्पताल भिजवा दिए। उस वक्त दोनों की शिनाख्त भी नहीं हो पाई। मृतक के जेब में मिले आधार कार्ड के जरिये पुलिस ने जानकारी कराई तो शिनाख्त हुई। बाद में मृतक के परिजन और रिश्तेदार भी जिला अस्पताल पहुंच गए।
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इधर, पुलिस ने रोडवेज बस को भी कब्जे में ले लिया है। चालक और परिचालक के नाम और पते की जानकारी करने को रोडवेज के एआरएम से संपर्क साधा गया है। इलाके के एसएसआई रामऔतार सिंह ने बताया कि मक्का मालिक के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
कुदरत ने ही बख्श दी दंपती के मासूम बेटे की जान
उझानी। दातागंज क्षेत्र के अवधेश गुप्ता की पत्नी का प्रसव पूर्व से ही बदायूं के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। वह पत्नी को दिखाने के लिए अस्पताल में नंबर लगवाने के बाद बहनोई लव कुमार के घर पहुंचा। बहन लता ने अवधेश से कहा कि आज रुक जाइए, अगले दिन डॉक्टर को दिखा लेना। इसके बाद अवधेश पत्नी के साथ बहनोई के घर से बदायूं को निकल पड़ा लेकिन मासूम बेटे को यह कहते हुए बहन के पास छोड़ दिया कि पत्नी को दवा दिलाकर शाम को फिर लौट आऊंगा। कुदरत को भी शायद यही मंजूर था। वरना तो मासूम बेटा भी दंपती के साथ बाइक पर होता। वह भी हादसे का शिकार हो जाता।
‘दरोगा जी, सड़क से मक्का हटवाइए.. कहकर निकल जाते थे अफसर’
उझानी। बरेली-मथुरा और दिल्ली हाईवे से जुड़े बाईपास समेत इलाके के प्रमुख संपर्क मार्गों पर मक्का सुखाने का सिलसिला कोई इसी महीना से नहीं चल रहा है बल्कि अगेती मक्का की फसल की गहाई शुरू हुई, उसी दिन से उसे सड़कों पर फैलाने का दौर शुरू हो गया था। वाहन चालकों की दिक्कत बयां करते हुए अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से छापा भी, लेकिन मक्का हटवाने के नाम पर औपचारिकता के सिवाय कुछ और नहीं किया गया। हाईवे से होकर जब भी अफसर निकले, लेकिन हर एक ने पुलिस से यह कहकर औपचारिकता पूरी कर ली कि सड़क से मक्का हटवाइये, लेकिन उसके बाद अफसरों ने यह देखना गवारा नहीं किया कि उनके आदेश पर अमल भी हुआ या नहीं।
इलाके में सड़क पर मक्का सुखाने की शुरूआत जून महीना में हो गई थी। बाइक सवार लोग फिसले तो मामूली रूप से घायल होने के बाद इलाज कराके घर चले गए। ऐसा भी नहीं कि वाहन चालकों ने दिक्कत बताते हुए मक्का सुखाने वाले लोगों से शिकायत नहीं की हो। शिकायत सुनने के बाद मक्का मालिक उल्टे बिफर पड़ते हैं। जून महीना में ही एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य और तत्कालीन सीओ सर्वेंद्र कुमार ने सरौरा इलाके में लोगों से सड़क पर से मक्का समेट लेने जाने की हिदायत भी दी थी। उन्होंने तत्कालीन कोतवाल विनोद कुमार चाहर को निर्देशित किया था कि अगर कोई भी किसान सड़क पर मक्का सुखाए तो मक्का जब्त कर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन पुलिस ने गौर नहीं किया। पुलिस अगर हकीकत पर गौर करती तो मंगलवार को दातागंज क्षेत्र के अवधेश और उसकी पत्नी अंजली को जान से हाथ नहीं धोना पड़ता। हादसे के बाद कुछ लोगों ने पुलिस कर्मियों से अनदेखी की शिकायत की तो वह कुछ जवाब देने की बजाय बगले झांकने लग गए।
अब कार्रवाई कराएंगे...लेकिन अब तक क्यों नहीं हुई इसका जवाब नहीं
- हादसे के बाद जब एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य से इस बाबत जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि पूर्व में भी पुलिस को इस बारे में निर्देश दिए गए थे। अब इस बारे में सख्त कार्रवाई कराएंगे। जिन लोगों ने मक्का सुखाने का प्रयास किया उन पर कार्रवाई होगी, लेकिन पिछली बार के आदेश के बाद उस पर गौर करने की जरूरत क्यों नहीं समझी। इस बात का उन्होंने घुमाकर जवाब दे दिया।
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हादसा बरेली-मथुरा हाईवे स्थित बाईपास पर मिहौना मोड़ के नजदीक दोपहर में करीब एक बजे हुआ। दातागंज तहसील क्षेत्र के गांव जैपालपुर-धनोररा निवासी अवधेश गुप्ता (24) की पत्नी अंजली (22) का बदायूं के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। अवधेश पत्नी को बाइक पर बैठाकर निजी अस्पताल पहुंचा तो दोपहर बाद दिखाने का नंबर मिला। इसके बाद वह पत्नी और सात महीने के मासूम बेटे के साथ यहां साहूकारा मोहल्ला निवासी बहनोई लव कुमार के घर चला आया। मासूम बेटे को बहन लता के पास छोड़कर वह बदायूं की ओर निकले, तभी बदायूं डिपो की तेज रफ्तार रोडवेज बस ने सामने से रौंद दिया। बाइक सवार दंपती की मौके पर ही मौत हो गई। अवधेश हेलमेट तो लगाए था, लेकिन वह चकनाचूर हो गया।
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जिस स्थान पर हादसा हुआ। सड़क के दूसरे लेन पर मक्का सूख रही थी। चश्मदीदों की मानें तो मक्का की वजह से दोनों वाहन चालकों को एक-दूसरे से बचने का मौका भी नहीं मिल पाया। हादसे की सूचना के पुलिस मौके पर पहुंचे पुलिस फोर्स ने मृतक दंपती के शव कब्जे में लेकर एंबुलेंस के जरिये जिला अस्पताल भिजवा दिए। उस वक्त दोनों की शिनाख्त भी नहीं हो पाई। मृतक के जेब में मिले आधार कार्ड के जरिये पुलिस ने जानकारी कराई तो शिनाख्त हुई। बाद में मृतक के परिजन और रिश्तेदार भी जिला अस्पताल पहुंच गए।
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इधर, पुलिस ने रोडवेज बस को भी कब्जे में ले लिया है। चालक और परिचालक के नाम और पते की जानकारी करने को रोडवेज के एआरएम से संपर्क साधा गया है। इलाके के एसएसआई रामऔतार सिंह ने बताया कि मक्का मालिक के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
कुदरत ने ही बख्श दी दंपती के मासूम बेटे की जान
उझानी। दातागंज क्षेत्र के अवधेश गुप्ता की पत्नी का प्रसव पूर्व से ही बदायूं के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। वह पत्नी को दिखाने के लिए अस्पताल में नंबर लगवाने के बाद बहनोई लव कुमार के घर पहुंचा। बहन लता ने अवधेश से कहा कि आज रुक जाइए, अगले दिन डॉक्टर को दिखा लेना। इसके बाद अवधेश पत्नी के साथ बहनोई के घर से बदायूं को निकल पड़ा लेकिन मासूम बेटे को यह कहते हुए बहन के पास छोड़ दिया कि पत्नी को दवा दिलाकर शाम को फिर लौट आऊंगा। कुदरत को भी शायद यही मंजूर था। वरना तो मासूम बेटा भी दंपती के साथ बाइक पर होता। वह भी हादसे का शिकार हो जाता।
‘दरोगा जी, सड़क से मक्का हटवाइए.. कहकर निकल जाते थे अफसर’
उझानी। बरेली-मथुरा और दिल्ली हाईवे से जुड़े बाईपास समेत इलाके के प्रमुख संपर्क मार्गों पर मक्का सुखाने का सिलसिला कोई इसी महीना से नहीं चल रहा है बल्कि अगेती मक्का की फसल की गहाई शुरू हुई, उसी दिन से उसे सड़कों पर फैलाने का दौर शुरू हो गया था। वाहन चालकों की दिक्कत बयां करते हुए अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से छापा भी, लेकिन मक्का हटवाने के नाम पर औपचारिकता के सिवाय कुछ और नहीं किया गया। हाईवे से होकर जब भी अफसर निकले, लेकिन हर एक ने पुलिस से यह कहकर औपचारिकता पूरी कर ली कि सड़क से मक्का हटवाइये, लेकिन उसके बाद अफसरों ने यह देखना गवारा नहीं किया कि उनके आदेश पर अमल भी हुआ या नहीं।
इलाके में सड़क पर मक्का सुखाने की शुरूआत जून महीना में हो गई थी। बाइक सवार लोग फिसले तो मामूली रूप से घायल होने के बाद इलाज कराके घर चले गए। ऐसा भी नहीं कि वाहन चालकों ने दिक्कत बताते हुए मक्का सुखाने वाले लोगों से शिकायत नहीं की हो। शिकायत सुनने के बाद मक्का मालिक उल्टे बिफर पड़ते हैं। जून महीना में ही एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य और तत्कालीन सीओ सर्वेंद्र कुमार ने सरौरा इलाके में लोगों से सड़क पर से मक्का समेट लेने जाने की हिदायत भी दी थी। उन्होंने तत्कालीन कोतवाल विनोद कुमार चाहर को निर्देशित किया था कि अगर कोई भी किसान सड़क पर मक्का सुखाए तो मक्का जब्त कर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन पुलिस ने गौर नहीं किया। पुलिस अगर हकीकत पर गौर करती तो मंगलवार को दातागंज क्षेत्र के अवधेश और उसकी पत्नी अंजली को जान से हाथ नहीं धोना पड़ता। हादसे के बाद कुछ लोगों ने पुलिस कर्मियों से अनदेखी की शिकायत की तो वह कुछ जवाब देने की बजाय बगले झांकने लग गए।
अब कार्रवाई कराएंगे...लेकिन अब तक क्यों नहीं हुई इसका जवाब नहीं
- हादसे के बाद जब एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य से इस बाबत जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि पूर्व में भी पुलिस को इस बारे में निर्देश दिए गए थे। अब इस बारे में सख्त कार्रवाई कराएंगे। जिन लोगों ने मक्का सुखाने का प्रयास किया उन पर कार्रवाई होगी, लेकिन पिछली बार के आदेश के बाद उस पर गौर करने की जरूरत क्यों नहीं समझी। इस बात का उन्होंने घुमाकर जवाब दे दिया।