{"_id":"5df0ed3e8ebc3e87f62f5a8b","slug":"dcb-badaun-news-bly387603595","type":"story","status":"publish","title_hn":"उझानी शाखा के मैनेजर का उसहैत ट्रांसफर, जीएम को सौंपी लाखों रुपये की लौटपौट की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उझानी शाखा के मैनेजर का उसहैत ट्रांसफर, जीएम को सौंपी लाखों रुपये की लौटपौट की जांच
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उझानी (बदायूं)। जिला सहकारी बैंक की स्थानीय शाखा में सहकारी क्रय-विक्रय समिति के बचत खाते से 14.73 लाख रुपये की लौटपौट के मामले में फंसे मैनेजर हजारी लाल को हटा दिया गया है। उनका उसहैत शाखा के लिए तबादला कर दिया गया है। उसहैत के शाखा प्रबंधक शिशुपाल सिंह उझानी का कार्यभार देखेंगे। बैंक के चेयरमैन उमेश राठौर ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच महाप्रबंधक सुमनवीर सिंह को सौंपी गई है।
नवंबर महीना में शाखा प्रबंधक हजारी लाल ने सहकारी क्रय-विक्रय समिति के बचत खाते से करीब 14.73 लाख रुपया सेवानिवृत्त सचिव श्याम सिंह के खाते में ट्रांसफर कर दिया था। समिति के सभापति किशनचंद्र शर्मा समेत संचालक मंडल की अनुमति के बिना मैनेजर ने जिस तरह से हेराफेरी की, वह उनके गले की फांस बन गया है। मैनेजर ने सेवानिवृत्त सचिव को दो लाख रुपये निकाल कर देते समय उससे चेक भी नहीं लिया था। इसके बाद कहा जाने लगा कि मैनेजर ने निजी फायदे के लिए ही गोलमाल किया है, लेकिन समिति के सभापति के कड़े रुख के चलते मैनेजर ने सेवानिवृत्त सचिव से पहले तो दो लाख रुपये उसी के खाते में जमा कराए फिर पूरी रकम समिति के बचत खाते में जमा कर दी। बैंक के चेयरमैन उमेश राठौर के समक्ष मामला पहुंचा तो उन्होंने मंगलवार को ही मैनेजर हजारी लाल का ट्रांसफर उसहैत शाखा के लिए कर दिया। उसहैत से शिशुपाल सिंह को उझानी भेजा गया है। चेयरमैन राठौर ने बैंक महाप्रबंधक सुमनवीर सिंह को उसहैत से उझानी भेजा है। इसे लेकर समिति के सभापति का कहना है कि पूरे मामले में मैनेजर की भूमिका संदिग्ध है। अगर उन्हें किसी तरह का आर्थिक फायदा नहीं होना था तो सेवानिवृत्त सचिव के खाते में रुपये ट्रांसफर करने के बाद दो लाख रुपये की निकासी के दौरान उनसे चेक क्यों नहीं लिया था। बिना चेक के किसी भी खाते से रुपये नहीं निकाले जा सकते।
कोल्ड स्टोर मामले में गिरफ्तार हो चुका है पूर्व राजस्व निरीक्षक
उझानी। सहकारी क्रय-विक्रय समिति का करीब दो दशक पहले तक कोल्ड स्टोर भी था। घाटे के चलते कोल्ड स्टोर बंद हुआ तो वर्ष-2003 में उसकी नीलामी कर दी गई थी। नीलामी से पहले राजस्व विभाग की टीम ने भूमि का रेट 1.10 करोड रुपया निर्धारित किया था जो वास्तविक मूल्य से काफी कम रहा। तत्कालीन सभापति मित्रपाल यादव ने इसकी शिकायत की तो ईओडब्ल्यू ने जांच की। जांच में सामने आया कि कोल्ड स्टोर की भूमि की कीमत 2.61 करोड़ रुपये थी। इस मामले में ईओडब्ल्यू के इंस्पेक्टर बीडी यादव ने वर्ष-2011 में उझानी कोतवाली मेें तत्कालीन एसडीएम समेत आठ लोगों को नामजद करा दिया। नामजदों में बोली लगाकर कोल्ड की भूमि खरीदने वाले पूर्वमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल, उर्मिला गुप्ता और तत्कालीन लेखपाल अहिवरन सिंह यादव भी शामिल हैं। बाद में राजस्व निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त अहिवरन सिंह यादव को दो दिन पहले ही ईओडब्ल्यू की टीम गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
विज्ञापन
जिला सहकारी बैंक की उझानी शाखा के मैनेजर हजारी लाल का तबादला उसहैत इसलिए किया गया है कि उनके रहते जांच प्रभावित नहीं हो पाए। शाखा प्रबंधक ने बैंक नियमों के विरुद्घ कार्य किया है। ऐसे किसी भी मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जा सकता।
- उमेश राठौर, चेयरमैन, जिला सहकारी बैंक।
विज्ञापन
नवंबर महीना में शाखा प्रबंधक हजारी लाल ने सहकारी क्रय-विक्रय समिति के बचत खाते से करीब 14.73 लाख रुपया सेवानिवृत्त सचिव श्याम सिंह के खाते में ट्रांसफर कर दिया था। समिति के सभापति किशनचंद्र शर्मा समेत संचालक मंडल की अनुमति के बिना मैनेजर ने जिस तरह से हेराफेरी की, वह उनके गले की फांस बन गया है। मैनेजर ने सेवानिवृत्त सचिव को दो लाख रुपये निकाल कर देते समय उससे चेक भी नहीं लिया था। इसके बाद कहा जाने लगा कि मैनेजर ने निजी फायदे के लिए ही गोलमाल किया है, लेकिन समिति के सभापति के कड़े रुख के चलते मैनेजर ने सेवानिवृत्त सचिव से पहले तो दो लाख रुपये उसी के खाते में जमा कराए फिर पूरी रकम समिति के बचत खाते में जमा कर दी। बैंक के चेयरमैन उमेश राठौर के समक्ष मामला पहुंचा तो उन्होंने मंगलवार को ही मैनेजर हजारी लाल का ट्रांसफर उसहैत शाखा के लिए कर दिया। उसहैत से शिशुपाल सिंह को उझानी भेजा गया है। चेयरमैन राठौर ने बैंक महाप्रबंधक सुमनवीर सिंह को उसहैत से उझानी भेजा है। इसे लेकर समिति के सभापति का कहना है कि पूरे मामले में मैनेजर की भूमिका संदिग्ध है। अगर उन्हें किसी तरह का आर्थिक फायदा नहीं होना था तो सेवानिवृत्त सचिव के खाते में रुपये ट्रांसफर करने के बाद दो लाख रुपये की निकासी के दौरान उनसे चेक क्यों नहीं लिया था। बिना चेक के किसी भी खाते से रुपये नहीं निकाले जा सकते।
विज्ञापन
कोल्ड स्टोर मामले में गिरफ्तार हो चुका है पूर्व राजस्व निरीक्षक
उझानी। सहकारी क्रय-विक्रय समिति का करीब दो दशक पहले तक कोल्ड स्टोर भी था। घाटे के चलते कोल्ड स्टोर बंद हुआ तो वर्ष-2003 में उसकी नीलामी कर दी गई थी। नीलामी से पहले राजस्व विभाग की टीम ने भूमि का रेट 1.10 करोड रुपया निर्धारित किया था जो वास्तविक मूल्य से काफी कम रहा। तत्कालीन सभापति मित्रपाल यादव ने इसकी शिकायत की तो ईओडब्ल्यू ने जांच की। जांच में सामने आया कि कोल्ड स्टोर की भूमि की कीमत 2.61 करोड़ रुपये थी। इस मामले में ईओडब्ल्यू के इंस्पेक्टर बीडी यादव ने वर्ष-2011 में उझानी कोतवाली मेें तत्कालीन एसडीएम समेत आठ लोगों को नामजद करा दिया। नामजदों में बोली लगाकर कोल्ड की भूमि खरीदने वाले पूर्वमंत्री विमलकृष्ण अग्रवाल, उर्मिला गुप्ता और तत्कालीन लेखपाल अहिवरन सिंह यादव भी शामिल हैं। बाद में राजस्व निरीक्षक पद से सेवानिवृत्त अहिवरन सिंह यादव को दो दिन पहले ही ईओडब्ल्यू की टीम गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
विज्ञापन
जिला सहकारी बैंक की उझानी शाखा के मैनेजर हजारी लाल का तबादला उसहैत इसलिए किया गया है कि उनके रहते जांच प्रभावित नहीं हो पाए। शाखा प्रबंधक ने बैंक नियमों के विरुद्घ कार्य किया है। ऐसे किसी भी मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जा सकता।
- उमेश राठौर, चेयरमैन, जिला सहकारी बैंक।