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Budaun News: अनुमन्य धन से ज्यादा खर्च करने में डीसी मनरेगा दोषी
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बदायूं। मनरेगा योजना के तहत होने वाले कामों में जिले में लगातार अनियमितताएं बरती जा रही हैं। इसकी शिकायत शासन स्तर तक पहुंच रही थीं। शासन के निर्देश पर विभागीय जांच हुई तो डीसी मनरेगा अनुमन्य धान से ज्यादा खर्च करने के दोषी पाए गए। अब उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश देते हुए शासन ने संयुक्त विकास आयुक्त लखनऊ को जांच सौंपी है।
मनरेगा की योजनाओं में घपले की शिकायतें जिलास्तरीय अधिकारियों से भी की जाती रहीं, लेकिन विभागीय अधिकारी इन्हें दबाते रहे। डीसी मनरेगा रामसागर यादव पर इस पद के अलावा डीडीओ, डीसी स्वत: रोजगार के साथ-साथ बीडीओ का भी चार्ज है, ऐसे में कोई भी शिकायत आगे नहीं बढ़ पाती थी। इसके बाद शिकायतें शासन स्तर तक पहुंची तो शासन के निर्देश पर विभागीय जांच की गई।
इसमें पाया गया कि मनरेगा योजना के तहत प्रशासनिक मद से अनुमन्य धन से अधिक व्यय किया गया है। कई काम ऐसे भी रहे जिनमें अनुमन्य धन से कई गुना राशि खर्च किया जाना दिखाया गया। इसके बाद संयुक्त सचिव प्रहलाद बरनवाल ने उनको प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की। संयुक्त विकास आयुक्त लखनऊ को जांच अधिकारी नामित किया गया है। डीडीओ श्वेतांक पांडेय ने डीसी मनरेगा के खिलाफ इस कार्रवाई की पुष्टि की है।
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वर्ष 2018 से जिले में तैनात हैं डीसी मनरेगा
डीसी मनरेगा रामसागर यादव जिले में वर्ष 2018 से तैनात हैं। उनके द्वारा डीसी मनरेगा के अलावा अन्य पदों का दायित्व भी निभाया गया है। बीच-बीच में कई बार उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। उन पर कार्रवाई संस्थित होने के बाद उन कर्मचारियों में भी खलबली है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन कामों में भागीदार रहे हैं। बताया जाता है कि डीसी मनरेगा अगले साल जनवरी में ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। एक महीने पहले ही उन पर इस प्रकार की कार्रवाई उनकी मुसीबत भी बढ़ा सकती है।
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मनरेगा की योजनाओं में घपले की शिकायतें जिलास्तरीय अधिकारियों से भी की जाती रहीं, लेकिन विभागीय अधिकारी इन्हें दबाते रहे। डीसी मनरेगा रामसागर यादव पर इस पद के अलावा डीडीओ, डीसी स्वत: रोजगार के साथ-साथ बीडीओ का भी चार्ज है, ऐसे में कोई भी शिकायत आगे नहीं बढ़ पाती थी। इसके बाद शिकायतें शासन स्तर तक पहुंची तो शासन के निर्देश पर विभागीय जांच की गई।
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इसमें पाया गया कि मनरेगा योजना के तहत प्रशासनिक मद से अनुमन्य धन से अधिक व्यय किया गया है। कई काम ऐसे भी रहे जिनमें अनुमन्य धन से कई गुना राशि खर्च किया जाना दिखाया गया। इसके बाद संयुक्त सचिव प्रहलाद बरनवाल ने उनको प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की। संयुक्त विकास आयुक्त लखनऊ को जांच अधिकारी नामित किया गया है। डीडीओ श्वेतांक पांडेय ने डीसी मनरेगा के खिलाफ इस कार्रवाई की पुष्टि की है।
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वर्ष 2018 से जिले में तैनात हैं डीसी मनरेगा
डीसी मनरेगा रामसागर यादव जिले में वर्ष 2018 से तैनात हैं। उनके द्वारा डीसी मनरेगा के अलावा अन्य पदों का दायित्व भी निभाया गया है। बीच-बीच में कई बार उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। उन पर कार्रवाई संस्थित होने के बाद उन कर्मचारियों में भी खलबली है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन कामों में भागीदार रहे हैं। बताया जाता है कि डीसी मनरेगा अगले साल जनवरी में ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। एक महीने पहले ही उन पर इस प्रकार की कार्रवाई उनकी मुसीबत भी बढ़ा सकती है।