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Budaun News: बीमार बुजुर्ग माता-पिता की सेवा में आगे आ रहीं बेटियां

Thu, 05 Feb 2026 01:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 05 Feb 2026 01:21 AM IST
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Daughters are stepping forward to care for their sick elderly parents.
बदायूं। समाज में बेटियों को लेकर चली आ रही ‘पराया धन’ की धारणा अब धीरे-धीरे बदल रही है। इसका जीवंत उदाहरण जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में देखने को मिल रहा है, जहां इलाज के लिए पहुंचने वाले बुजुर्ग मनोरोगियों के साथ ज्यादातर उनकी बेटियां ही तीमारदार बनकर आ रही हैं। मां-बाप के बुढ़ापे में सहारा बनकर खड़ी बेटियां न केवल इलाज करवा रही हैं, बल्कि उनकी हर जरूरत का ध्यान भी रख रहीं हैं।
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मानसिक रोग विभाग में रोजाना ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें बुजुर्ग माता-पिता मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं। उनके साथ अस्पताल आने वाली बेटियां दवाइयों से लेकर काउंसलिंग तक की पूरी जानकारी ले रहीं हैं। डॉक्टरों से इलाज की स्थिति समझ रही हैं। समय-समय पर फॉलोअप भी करवा रही हैं। कई मामलों में बेटियां अपने मायके आकर मां-बाप की जिम्मेदारी संभाल रहीं हैं, जबकि बेटे कामकाज या अन्य कारणों से दूर हैं।
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डॉक्टरों का कहना है कि पहले अधिकतर मामलों में बुजुर्ग मरीजों के साथ बेटे या बहू आते थे, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। बेटियां मानसिक रूप से बीमार माता-पिता के प्रति अधिक संवेदनशील नजर आ रहीं हैं। वे धैर्य के साथ उनकी बात सुनती हैं और इलाज में पूरा सहयोग करती हैं। मानसिक रोग जैसे मामलों में परिवार का सहयोग बेहद जरूरी होता है, जिसमें बेटियों की भूमिका काफी सकारात्मक साबित हो रही हैं। बेटियों का कहना है कि मां-बाप ने उन्हें पालने-पोसने में कोई कमी नहीं छोड़ी तो उनकी सेवा करना उनका फर्ज है।
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शादी के बाद भी वे अपने माता-पिता की जिम्मेदारी को नहीं भूलतीं। समाज में धीरे-धीरे यह सोच मजबूत हो रही है कि बेटियां भी बेटों की तरह ही मां-बाप का सहारा बन सकती हैं। सामाजिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है। बेटियों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता मिलने से वे अपने फैसले खुद ले पा रही हैं और जरूरत पड़ने पर माता-पिता के साथ खड़ी हो रहीं हैं।


बुजुर्गाें के साथ पहले बेटे आया करते थे। एकाध ही बेटी साथ में आया करती थी, लेकिन अब दौर बदल रहा है। अब अधिकांश केस में बेटियां या बहू साथ में आ रहीं हैं। -डॉ. सर्वेश कुमारी, क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट (मेंटल स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर)
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