{"_id":"631f86cf0a7b282661151b61","slug":"cultural-badaun-news-bly4973969197","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीकृष्ण और कंस वध की लीलाओं का किया वर्णन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीकृष्ण और कंस वध की लीलाओं का किया वर्णन
विज्ञापन
बिल्सी में भागवत कथा सुनाती सीमा शास्त्री। संवाद
- फोटो : BADAUN
बिल्सी। रविदास मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन मैनपुरी से पधारीं कथावाचक सीमा शास्त्री ने कंस वध व रुक्मणि विवाह के प्रसंगों का वर्णन किया।
कथावाचक ने कहा कि कंस के अत्याचार से जब पृथ्वी त्राहि-त्राहि करने लगी तब लोग भगवान से गुहार लगाने लगे। तब कृष्ण अवतरित हुए। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया, लेकिन हर प्रयास भगवान के सामने असफल साबित होता रहा। बाद में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिला दी। इस मौके पर संत चंद्रदास, दीपक गुप्ता, सूरज सागर, बंटी, राम अवतार, प्रदीप गुप्ता आदि मौजूद रहे। संवाद
श्री राम-सीता विवाह का प्रसंग सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु
बिल्सी। श्री रामकृष्ण समिति के तत्वावधान में माहेश्वरी भवन में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन कथावाचक अयोध्यादास रामायणी ने श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग सुनाया। इसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
विज्ञापन
इस मौके पर नरेंद्र गरल, चंद्रपाल तोष्नीवाल, सत्यपाल वार्ष्णेय, लोकेश बाबू, मनोज वार्ष्णेय, संजीव वार्ष्णेय, आदि मौजूद रहे। संवाद
विज्ञापन
कथावाचक ने कहा कि कंस के अत्याचार से जब पृथ्वी त्राहि-त्राहि करने लगी तब लोग भगवान से गुहार लगाने लगे। तब कृष्ण अवतरित हुए। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया, लेकिन हर प्रयास भगवान के सामने असफल साबित होता रहा। बाद में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिला दी। इस मौके पर संत चंद्रदास, दीपक गुप्ता, सूरज सागर, बंटी, राम अवतार, प्रदीप गुप्ता आदि मौजूद रहे। संवाद
विज्ञापन
श्री राम-सीता विवाह का प्रसंग सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु
बिल्सी। श्री रामकृष्ण समिति के तत्वावधान में माहेश्वरी भवन में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन कथावाचक अयोध्यादास रामायणी ने श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग सुनाया। इसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
विज्ञापन
इस मौके पर नरेंद्र गरल, चंद्रपाल तोष्नीवाल, सत्यपाल वार्ष्णेय, लोकेश बाबू, मनोज वार्ष्णेय, संजीव वार्ष्णेय, आदि मौजूद रहे। संवाद