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जो व्यक्ति जैसा कर्म करेगा उसे वैसा ही मिलेगा फल
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बादल गांव में श्रीमद्भागवत कथा सुनातीं कथा व्यास। संवाद
- फोटो : BADAUN
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कुंवरगाव। कथाव्यास साध्वी उपासना शास्त्री ने कहा कि जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है उसको उसे वैसा ही फल मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन सुन श्रद्धालु भक्ति भाव में खो गए। मुख्य यजमान नेत्रपाल सिंह यादव ने श्रीमद्भागवत पुराण का पूजन किया।
बादल गांव में कथा में छठे दिन पूरनपुर से पधारीं साध्वी उपासना शास्त्री व आचार्य सूरज शास्त्री ने कान्हा की बाल लीलाओं का भजनों के साथ सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कहा कि बाल्यकाल में ही कान्हा ने माटी खाकर माटी लीला की और अपना मुंह खोलकर माता यशोदा को पूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन कराए। भगवान श्रीकृष्ण ने मां को बताया कि मैं ही तेरा लाला सर्वशक्तिमान ब्रह्म हूं। कान्हा ने बाल्यकाल में ही पूतना वध, तरणासुर वध, बकासुर वध व कालिया नाग का वध कर उसका मानमर्दन किया।
गोवर्धन लीला कर इंद्र का भी मानमर्दन किया। कान्हा के बाल रूप का दर्शन करने भगवान शिव को साधु रूप में यशोदा के द्वार आना पढ़ा। अंत में गोवर्धन भगवान के समक्ष छप्पन भोग का प्रसाद लगाकर कढ़ी चावल का भोग भी प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। नेत्रपाल सिंह, प्रेम सिंह, अविलाख सिंह नबाब सिंह, श्याम सिंह, नीलम, सपना, किरन आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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बादल गांव में कथा में छठे दिन पूरनपुर से पधारीं साध्वी उपासना शास्त्री व आचार्य सूरज शास्त्री ने कान्हा की बाल लीलाओं का भजनों के साथ सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कहा कि बाल्यकाल में ही कान्हा ने माटी खाकर माटी लीला की और अपना मुंह खोलकर माता यशोदा को पूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन कराए। भगवान श्रीकृष्ण ने मां को बताया कि मैं ही तेरा लाला सर्वशक्तिमान ब्रह्म हूं। कान्हा ने बाल्यकाल में ही पूतना वध, तरणासुर वध, बकासुर वध व कालिया नाग का वध कर उसका मानमर्दन किया।
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गोवर्धन लीला कर इंद्र का भी मानमर्दन किया। कान्हा के बाल रूप का दर्शन करने भगवान शिव को साधु रूप में यशोदा के द्वार आना पढ़ा। अंत में गोवर्धन भगवान के समक्ष छप्पन भोग का प्रसाद लगाकर कढ़ी चावल का भोग भी प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। नेत्रपाल सिंह, प्रेम सिंह, अविलाख सिंह नबाब सिंह, श्याम सिंह, नीलम, सपना, किरन आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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