{"_id":"621e72ad2c00ba715d03ba8a","slug":"cultural-badaun-news-bly4770020199","type":"story","status":"publish","title_hn":"आर्य समाज परिसर में मनाया गया ऋषि बोध उत्सव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आर्य समाज परिसर में मनाया गया ऋषि बोध उत्सव
विज्ञापन
आर्य समाज बदायूं की ओर से देव यज्ञ का आयोजन किया गया। संवाद
- फोटो : BADAUN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। ऋषि कुटीर सागर ताल स्थित आर्य समाज बदायूं के परिसर में देव यज्ञ एवं सत्संग का आयोजन किया गया। महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बोध की घटना का वर्णन किया गया। साथ ही ऋषि बोध उत्सव मनाया गया।
बताया गया कि शिवरात्रि के दिन ही स्वामी दयानंद को वास्तविक शिव अर्थात ईश्वर प्राप्ति के मार्ग की ओर चलने की प्रेरणा मिली और गुरु विरजानंद की कृपा से उनको यह मंजिल हासिल हुई।
महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने उस समय उपलब्ध सभी धर्म, संप्रदायों की पवित्र पुस्तकों का अध्ययन किया और अंत में निष्कर्ष निकाला कि सृष्टि के प्रारंभ में परमपिता परमात्मा ने जो वेद ज्ञान दिया वह शाश्वत सत्य व सार्वभौमिक है। उसके आधार पर ही हमें जीवन जीना चाहिए। उसी मार्ग पर चलते हुए हम ईश्वर का साक्षात्कार कर सकते हैं। स्वामी जी ने सन 1875 में आर्य समाज की स्थापना की और नियम में लिखा कि संसार का उपकार करना समाज का मुख्य उद्देश्य है।
विज्ञापन
पूर्व प्रधान आर्य समाज धीरज सक्सेना के अलावा कार्यक्रम में देशराज सक्सेना, रामप्रकाश सक्सेना, रामप्रकाश सिंह, वीरेंद्र गुप्ता, अमरपाल सिंह, सुरेंद्र पाल सिंह शाक्य, सुरेंद्र कुमार मौर्य, अमन कुमार सक्सेना, अवधेश कुमार सक्सेना उपस्थित थे। अध्यक्षता प्रधान ओमकार सक्सेना ने और संचालन मंत्री राजकुमार सत्यार्थी ने किया।
इधर, जिला आर्य प्रतिनिधि सभा व आर्य समाज के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को आर्य समाज के कैंप कार्यालय शहबाजपुर में यज्ञ में आहुतियां डालकर विश्व कल्याण की कामना की गई।
जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री व आर्य समाज बदायूं के प्रधान नन्हेलाल कश्यप ने कहा कि वेदों की रक्षा करना सभी का नैतिक धर्म है। वेद पुस्तक नहीं ज्ञान है, वेद धर्म है इसलिए वेदों की रक्षा करना व आज की युवा पीढ़ी को वेदों का ज्ञान कराना आवश्यक है। मंत्री योगेंद्र सागर ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने जिन उद्देश्य की पूर्ति के लिए सन 1875 में धर्म सुधार के लिए आर्य समाज की जो स्थापना की थी, उनकी लगातार उपेक्षा हो रही है। इस मौके पर विकास सक्सेना, धर्मेंद्र आर्य, रतनलाल भारद्वाज, पूर्व अपर शासकीय अधिवक्ता प्रेमबाबू, अंकित सक्सेना, सुदेश चौहान मौजूद रहे।
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी के आर्य समाज मंदिर पर मंगलवार को ऋषि बोधोत्सव पर्व धूमधाम से मनाया गया। वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने विचार रखे। बरेली से पधारे पंडित मुकेश आर्य ने भजन प्रस्तुत किए। आर्य संस्कारशाला की शिक्षिका प्रज्ञा आर्य, आर्य समाज के मंत्री अगरपाल सिंह आर्य, राकेश आर्य, विचित्र पाल सिंह, सूरजवती देवी आदि मौजूद रहे। संवाद
विज्ञापन
बताया गया कि शिवरात्रि के दिन ही स्वामी दयानंद को वास्तविक शिव अर्थात ईश्वर प्राप्ति के मार्ग की ओर चलने की प्रेरणा मिली और गुरु विरजानंद की कृपा से उनको यह मंजिल हासिल हुई।
विज्ञापन
महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने उस समय उपलब्ध सभी धर्म, संप्रदायों की पवित्र पुस्तकों का अध्ययन किया और अंत में निष्कर्ष निकाला कि सृष्टि के प्रारंभ में परमपिता परमात्मा ने जो वेद ज्ञान दिया वह शाश्वत सत्य व सार्वभौमिक है। उसके आधार पर ही हमें जीवन जीना चाहिए। उसी मार्ग पर चलते हुए हम ईश्वर का साक्षात्कार कर सकते हैं। स्वामी जी ने सन 1875 में आर्य समाज की स्थापना की और नियम में लिखा कि संसार का उपकार करना समाज का मुख्य उद्देश्य है।
विज्ञापन
पूर्व प्रधान आर्य समाज धीरज सक्सेना के अलावा कार्यक्रम में देशराज सक्सेना, रामप्रकाश सक्सेना, रामप्रकाश सिंह, वीरेंद्र गुप्ता, अमरपाल सिंह, सुरेंद्र पाल सिंह शाक्य, सुरेंद्र कुमार मौर्य, अमन कुमार सक्सेना, अवधेश कुमार सक्सेना उपस्थित थे। अध्यक्षता प्रधान ओमकार सक्सेना ने और संचालन मंत्री राजकुमार सत्यार्थी ने किया।
इधर, जिला आर्य प्रतिनिधि सभा व आर्य समाज के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को आर्य समाज के कैंप कार्यालय शहबाजपुर में यज्ञ में आहुतियां डालकर विश्व कल्याण की कामना की गई।
जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री व आर्य समाज बदायूं के प्रधान नन्हेलाल कश्यप ने कहा कि वेदों की रक्षा करना सभी का नैतिक धर्म है। वेद पुस्तक नहीं ज्ञान है, वेद धर्म है इसलिए वेदों की रक्षा करना व आज की युवा पीढ़ी को वेदों का ज्ञान कराना आवश्यक है। मंत्री योगेंद्र सागर ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने जिन उद्देश्य की पूर्ति के लिए सन 1875 में धर्म सुधार के लिए आर्य समाज की जो स्थापना की थी, उनकी लगातार उपेक्षा हो रही है। इस मौके पर विकास सक्सेना, धर्मेंद्र आर्य, रतनलाल भारद्वाज, पूर्व अपर शासकीय अधिवक्ता प्रेमबाबू, अंकित सक्सेना, सुदेश चौहान मौजूद रहे।
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी के आर्य समाज मंदिर पर मंगलवार को ऋषि बोधोत्सव पर्व धूमधाम से मनाया गया। वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने विचार रखे। बरेली से पधारे पंडित मुकेश आर्य ने भजन प्रस्तुत किए। आर्य संस्कारशाला की शिक्षिका प्रज्ञा आर्य, आर्य समाज के मंत्री अगरपाल सिंह आर्य, राकेश आर्य, विचित्र पाल सिंह, सूरजवती देवी आदि मौजूद रहे। संवाद