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एकादशी की छटा ऐसी कि कृष्णमय हो गया शहर
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बदायूं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के तीन दिन बाद सूतक समाप्ति पर एकादशी को यहां धार्मिक उत्साह के मनाए जाने की परंपरा है। यह परंपरा कब और कैसे पड़ी? यह तो बुजुर्ग भी नहीं बता पाते, लेकिन एकादशी को यहां की छटा ही निराली होती है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में छठी का पर्व मानकर एकादशी को ही बड़े स्तर पर मनाया जाता है। इसी के चलते बृहस्पतिवार को सुसज्जित मंदिरों की शोभा देखते ही बनी। बिजली के नए-नए प्रकार के आइटमों से मंदिर आकर्षक छवि बिखरते नजर आए।
भले ही पूरे जिले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर सजते हों, लेकिन शहर में एकादशी पर मंदिरों को सजाकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया जाता है। बृहस्पतिवार को सूरज ढलते ही बिजली की रोशनी से जगमगाती सड़कों पर रौनक लौट आई। बाकी दिनों से आज का दिन विशेष था। गली-गली मंदिरों में जहां देवी देवताओं को नवीन वस्त्रों और आभूषणों से अलंकृत किया गया था, वहीं मंदिर बिजली की झालरों से जगमगाते नजर आ रहे थे। हालांकि इस बार कोविड-19 का असर भी मंदिर पर दिखाई दिया। पहले जहां एकादशी पर सड़कों पर भीड़ रहती थी। वहां आज कम संख्या में लोग नजर आए। शहर के मंदिर में बच्चों के आकर्षण के लिए झांकियां बनाई गईं थीं। यह अपने आप में सजीवता प्रस्तुत कर रही थी।
विश्व हरी मंदिर, मोहल्ला शहवाजपुर
मोहल्ला शहवाजपुर स्थित विश्व हरी मंदिर पर बच्चों द्वारा झाकियां सजाई गई। इस मौके पर छोटे बच्चों ने राधा, कृष्ण, शंकर पार्वती आदि देवी देवताओं का रूप धारण कर नृत्य किया। उसके बाद में आरती, बाद मटकी फोड़ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर रूपांक अग्रवाल, इशांक अरोरा, प्रगेश सक्सेना, गौरांग अग्रवाल, देवांश अरोरा मौजूद रहे।
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मंदिरों पर तैनात रही पुलिस
एकादशी पर भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले ही रणनीति बना ली थी। ऐसे में बिरुआबाड़ी मंदिर, गौरीशंकर धाम पर समेत अन्य सभी मंदिरों के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस तैनात रही। ताकि कहीं पर कोई असामाजिक तत्व व्यवधान पैदा न करें।
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भले ही पूरे जिले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर सजते हों, लेकिन शहर में एकादशी पर मंदिरों को सजाकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया जाता है। बृहस्पतिवार को सूरज ढलते ही बिजली की रोशनी से जगमगाती सड़कों पर रौनक लौट आई। बाकी दिनों से आज का दिन विशेष था। गली-गली मंदिरों में जहां देवी देवताओं को नवीन वस्त्रों और आभूषणों से अलंकृत किया गया था, वहीं मंदिर बिजली की झालरों से जगमगाते नजर आ रहे थे। हालांकि इस बार कोविड-19 का असर भी मंदिर पर दिखाई दिया। पहले जहां एकादशी पर सड़कों पर भीड़ रहती थी। वहां आज कम संख्या में लोग नजर आए। शहर के मंदिर में बच्चों के आकर्षण के लिए झांकियां बनाई गईं थीं। यह अपने आप में सजीवता प्रस्तुत कर रही थी।
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विश्व हरी मंदिर, मोहल्ला शहवाजपुर
मोहल्ला शहवाजपुर स्थित विश्व हरी मंदिर पर बच्चों द्वारा झाकियां सजाई गई। इस मौके पर छोटे बच्चों ने राधा, कृष्ण, शंकर पार्वती आदि देवी देवताओं का रूप धारण कर नृत्य किया। उसके बाद में आरती, बाद मटकी फोड़ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर रूपांक अग्रवाल, इशांक अरोरा, प्रगेश सक्सेना, गौरांग अग्रवाल, देवांश अरोरा मौजूद रहे।
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मंदिरों पर तैनात रही पुलिस
एकादशी पर भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले ही रणनीति बना ली थी। ऐसे में बिरुआबाड़ी मंदिर, गौरीशंकर धाम पर समेत अन्य सभी मंदिरों के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस तैनात रही। ताकि कहीं पर कोई असामाजिक तत्व व्यवधान पैदा न करें।