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हत्यारे चाचा को उम्रकैद, जुर्माना
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 31 Aug 2016 12:02 AM IST
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पांच साल पहले उझानी इलाके में हुई थी घटना
पुलिस ने मृतक की बहन और मां को भी बना दिया था आरोपी
मुकदमे के दौरान आई पूरी सच्चाई, तब पुलिस की हुई थी किरकिरी
संपत्ति के विवाद में भतीजे की हत्या करने वाले चाचा को कोर्ट ने उम्रकैद के साथ ही दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की धनराशि में से 50 फीसदी बतौर मुआवजा मृतक की मां को देने का भी आदेश दिया है। बता दें कि इस मामले में उझानी पुलिस ने मृतक की मां और बहन को भी आरोपी बना दिया था। जिन्हें बाद में सच्चाई सामने आने के बाद मुकदमे से निकाला गया।
यह चर्चित घटना कोतवाली उझानी क्षेत्र के गांव भवानीपुर में 28 अप्रैल 2011 को हुई थी। संपत्ति विवाद के चलते गांव निवासी ब्रजमोहन पुत्र पन्ना लाल की उसी के सगे चाचा नेमसिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उस समय पुलिस ने आर्थिक समझौते के आधार पर आरोपी चाचा को बचाते हुए इस मामले में मृतक की बहन गीता और मां जयदेवी को ही आरोपी बना दिया था। तब इस मामले में दूसरी बहन शिक्षामित्र सुनीता ने चाचा के खिलाफ कोर्ट में 156-3 के तहत परिवाद दायर किया था। इसमें कोर्ट ने गंभीर रूख अपनाते हुए पुलिस को पूरे मामले की जांचोंपरांत आरोपी चाचा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था।
वादिनी के अनुसार उसके चाचा और ताऊ अक्सर उसकी मां को मकान बेचने का दबाव डालते थे। इस संबंध में उन्होंने वादिनी की मां जयदेवी के साथ कई दफा मारपीट भी की थी। 28 अप्रैल 2011 को वादिनी गांव अथइया स्थित प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने गई थी। तभी उसे सूचना मिली थी कि उसके भाई ब्रजमोहन की चाचा नेमसिंह ने गोलीमारकर हत्या कर दी है।
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कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुए मुकदमे के बाद पुलिस ने पुन:जांच की तो सच्चाई सामने आ गई और पुलिस को अपनी किरकिरी भी झेलनी पड़ी थी। अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी मुकेश यादव और बचाव पक्ष के वकील की दलीलों को सुनने के बाद स्पेशल जज ईसी एक्ट भूदेव गौतम ने आरोपी चाचा नेम सिंह को उम्रकैद के साथ ही दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
पुलिस ने मृतक की बहन और मां को भी बना दिया था आरोपी
मुकदमे के दौरान आई पूरी सच्चाई, तब पुलिस की हुई थी किरकिरी
संपत्ति के विवाद में भतीजे की हत्या करने वाले चाचा को कोर्ट ने उम्रकैद के साथ ही दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की धनराशि में से 50 फीसदी बतौर मुआवजा मृतक की मां को देने का भी आदेश दिया है। बता दें कि इस मामले में उझानी पुलिस ने मृतक की मां और बहन को भी आरोपी बना दिया था। जिन्हें बाद में सच्चाई सामने आने के बाद मुकदमे से निकाला गया।
यह चर्चित घटना कोतवाली उझानी क्षेत्र के गांव भवानीपुर में 28 अप्रैल 2011 को हुई थी। संपत्ति विवाद के चलते गांव निवासी ब्रजमोहन पुत्र पन्ना लाल की उसी के सगे चाचा नेमसिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उस समय पुलिस ने आर्थिक समझौते के आधार पर आरोपी चाचा को बचाते हुए इस मामले में मृतक की बहन गीता और मां जयदेवी को ही आरोपी बना दिया था। तब इस मामले में दूसरी बहन शिक्षामित्र सुनीता ने चाचा के खिलाफ कोर्ट में 156-3 के तहत परिवाद दायर किया था। इसमें कोर्ट ने गंभीर रूख अपनाते हुए पुलिस को पूरे मामले की जांचोंपरांत आरोपी चाचा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था।
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वादिनी के अनुसार उसके चाचा और ताऊ अक्सर उसकी मां को मकान बेचने का दबाव डालते थे। इस संबंध में उन्होंने वादिनी की मां जयदेवी के साथ कई दफा मारपीट भी की थी। 28 अप्रैल 2011 को वादिनी गांव अथइया स्थित प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने गई थी। तभी उसे सूचना मिली थी कि उसके भाई ब्रजमोहन की चाचा नेमसिंह ने गोलीमारकर हत्या कर दी है।
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कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुए मुकदमे के बाद पुलिस ने पुन:जांच की तो सच्चाई सामने आ गई और पुलिस को अपनी किरकिरी भी झेलनी पड़ी थी। अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी मुकेश यादव और बचाव पक्ष के वकील की दलीलों को सुनने के बाद स्पेशल जज ईसी एक्ट भूदेव गौतम ने आरोपी चाचा नेम सिंह को उम्रकैद के साथ ही दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।