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बदायूं जेल में जहर से दो कैदियों की मौत
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
Updated Thu, 31 May 2018 01:46 AM IST
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जेल
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जिला जेल से फायरिंग करते हुए कैदी सुमित के फरार होने का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि 18 दिन बाद ही बुधवार को एक और बड़ी घटना हो गई। नमाज पढ़ने के लिए बैरक से बाहर निकाले गए दो कैदी कुछ देर बाद जेल परिसर में ही बरामदे में बेसुध पड़े मिले। जिला अस्पताल पहुंचते-पहुंचते दोनों ने दम तोड़ दिया।
प्रारंभिक छानबीन में सामने आया कि जहर से उनकी मौत हुई। जहर खुद खाया या उन्हें खिलाया गया, यह सवाल बना हुआ है। इनमें से एक का मामला कोर्ट मेें विचाराधीन है, जबकि दूसरा उम्रकैद की सजा काट रहा था। जेल प्रशासन का कहना है कि दोनों ने मानसिक तनाव की वजह से जहर खाकर खुदकुशी की है। वहीं परिवार वालों ने जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाते हुए बरेली-मथुरा हाईवे पर लालपुल चौकी के पास आधा घंटा जाम लगाया।
एक कैदी असलम (48) बदायूं शहर के मोहल्ला हकीमगंज का रहने वाला था। वह अपनी पत्नी फरहा बी की दहेज के कारण हत्या करने के आरोप में पिछले साल 15 दिसंबर से जेल में बंद था। दूसरा कैदी शाहरुख (25) फैजगंज बेहटा (बदायूं) थाना क्षेत्र के गांव नूरनगर कौड़िया के रहने वाले मोहम्मद उमर का बेटा था। उसे नूरपुर कौड़िया के लाले सिंह यादव की वर्ष 2010 में गोली मारकर हत्या करने के मामले में बीती 15 सितंबर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। तभी से शाहरुख जेल में बंद था। असलम और शाहरुख दोनों को जिला कारागार की बैरक नंबर 12 में रखा गया था।
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बुधवार दोपहर करीब 12 बजे बंदियों को नमाज पढ़ने के लिए बैरक से निकाला गया। बैरक से सबसे पहले बाहर निकले असलम व शाहरुख हाथ-मुंह धोने के बाद पीछे बरामदे में पहुंच गए। थोड़ी देर बाद ही दूसरे कैदी पहुंचे तो उन्होंने उन दोनों को बेसुध पड़ा देखा। उनके मुंह से झाग निकल रहा था। फौरन जेल अस्पताल के डॉक्टरों को बुलाया गया। उन्होंने दोनों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां ले जाने पर दोनों को मृत घोषित कर दिया गया।
इस बीच पता लगने पर बंदी असलम के परिवार वाले जिला अस्पताल पहुंचे। उनका आरोप था कि असलम को जहर देकर मारा गया है। शाम करीब चार बजे परिवार वालों ने लालपुल चौकी के पास बरेली-मथुरा हाईवे पर जाम लगा दिया। पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन देकर बमुश्किल जाम खुलवाया।
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प्रारंभिक छानबीन में सामने आया कि जहर से उनकी मौत हुई। जहर खुद खाया या उन्हें खिलाया गया, यह सवाल बना हुआ है। इनमें से एक का मामला कोर्ट मेें विचाराधीन है, जबकि दूसरा उम्रकैद की सजा काट रहा था। जेल प्रशासन का कहना है कि दोनों ने मानसिक तनाव की वजह से जहर खाकर खुदकुशी की है। वहीं परिवार वालों ने जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाते हुए बरेली-मथुरा हाईवे पर लालपुल चौकी के पास आधा घंटा जाम लगाया।
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एक कैदी असलम (48) बदायूं शहर के मोहल्ला हकीमगंज का रहने वाला था। वह अपनी पत्नी फरहा बी की दहेज के कारण हत्या करने के आरोप में पिछले साल 15 दिसंबर से जेल में बंद था। दूसरा कैदी शाहरुख (25) फैजगंज बेहटा (बदायूं) थाना क्षेत्र के गांव नूरनगर कौड़िया के रहने वाले मोहम्मद उमर का बेटा था। उसे नूरपुर कौड़िया के लाले सिंह यादव की वर्ष 2010 में गोली मारकर हत्या करने के मामले में बीती 15 सितंबर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। तभी से शाहरुख जेल में बंद था। असलम और शाहरुख दोनों को जिला कारागार की बैरक नंबर 12 में रखा गया था।
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बुधवार दोपहर करीब 12 बजे बंदियों को नमाज पढ़ने के लिए बैरक से निकाला गया। बैरक से सबसे पहले बाहर निकले असलम व शाहरुख हाथ-मुंह धोने के बाद पीछे बरामदे में पहुंच गए। थोड़ी देर बाद ही दूसरे कैदी पहुंचे तो उन्होंने उन दोनों को बेसुध पड़ा देखा। उनके मुंह से झाग निकल रहा था। फौरन जेल अस्पताल के डॉक्टरों को बुलाया गया। उन्होंने दोनों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां ले जाने पर दोनों को मृत घोषित कर दिया गया।
इस बीच पता लगने पर बंदी असलम के परिवार वाले जिला अस्पताल पहुंचे। उनका आरोप था कि असलम को जहर देकर मारा गया है। शाम करीब चार बजे परिवार वालों ने लालपुल चौकी के पास बरेली-मथुरा हाईवे पर जाम लगा दिया। पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन देकर बमुश्किल जाम खुलवाया।