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पुलिस ने किया छात्रा की जिंदगी से खिलवाड़
badaun
Updated Sun, 01 Feb 2015 08:17 PM IST
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उझानी कोतवाली पुलिस अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही। छात्रा को कोतवाली के क्वाटर्स की छत से फेंकने वाले सिपाही गौरव टाइटलर को पहले बचाने की कोशिश की गई। अब पुलिस ने सभी हदों को पार करते हुए छात्रा के जीवन से ही खिलवाड़ कर दिया। डॉक्टर्स की बिना रजामंदी के पुलिस छात्रा को एंबुलेंस से 164 के बयान दर्ज कराने के लिए कोर्ट ले गई। हालांकि डॉक्टर्स ने कहा था कि छात्रा को अभी कम से कम तीन सप्ताह का समय लगेगा। उसकी रीढ़ की हड्डी, कूल्हा और सर की हड्डी में फैक्चर है।
उझानी कोतवाली के सिपाही गौरव टाइटलर ने पंद्रह जनवरी को छात्रा को अपने क्वाटर्स की छत से फेंक दिया था। छात्रा की मां ने अपने दो देवरों के खिलाफ हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में छात्रा ने होश में आने पर सच्चाई बताई तो सिपाही गौरव टाइटलर के खिलाफ हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज कर बर्खास्त कर दिया गया। कुछ दिन बाद विवेचक ने छात्रा के 161 के बयान दर्ज किए तो सच सामने आया। सिपाही पर रेप की धारा के साथ पाक्सो एक्ट पर तरमीम कर दिया गया। छात्रा बरेली के एक अस्पताल में इलाज करा रही थी। उसको मंगलवार को जिला अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था। छात्रा के मजिस्ट्रेट के सामने 164 के बयान दर्ज होने बाकी थी। यहां छात्रा का इलाज कर रहे सर्जन डॉ. आरएस यादव और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रियाज की बिना रजामंदी के पुलिस शनिवार को छात्रा को कोर्ट ले गई। वहां उसका एंबुलेंस में ही मजिस्ट्रेट संगीता कुमारी ने 164 का बयान दर्ज किया। हालांकि छात्रा की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी है। उसके कूल्हे और सिर की हड्डी में भी फैक्चर है। डॉक्टर्स ने सलाह दी थी कि उसको हिलने-डुलने भी न दिया जाए। बावजूद इसके पुलिस डॉक्टर्स की सलाह को नजर अंदाज कर छात्रा को अस्पताल से कोर्ट तक ले गई। बाद में उसे अस्पताज में भर्ती करा दिया गया।
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ये बोले डॉक्टर्स
- छात्रा का इलाज कर रहे सर्जन डॉ. आरएस यादव का कहना है कि उसकी हालत अभी भी गंभीर है। पुलिस को ऐसा नहीं करना चाहिए था। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रियाज का कहना है कि छात्रा की रीढ़, सिर और कूल्हे की हड्डी में फैक्चर है उसे इस तरह से ले जाना घातक था। सीएमएस डॉ. एके वर्मा ने बताया कि उनसे पुलिस ने कोई बात नहीं की और छात्रा को बयान दर्ज कराने के लिए ले गई।
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छात्रा की मां से रजामंदी ले ली गई थी। उसके बाद ही 164 के बयान दर्ज कराने को उसे कोर्ट ले जाया गया था। डॉक्टर्स से राय नहीं ली गई थी। छात्रा की हालत सामान्य है। बयान समय से दर्ज होने जरूरी थे।
-देवराज राठी, उझानी कोतवाल/विवेचक
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उझानी कोतवाली के सिपाही गौरव टाइटलर ने पंद्रह जनवरी को छात्रा को अपने क्वाटर्स की छत से फेंक दिया था। छात्रा की मां ने अपने दो देवरों के खिलाफ हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में छात्रा ने होश में आने पर सच्चाई बताई तो सिपाही गौरव टाइटलर के खिलाफ हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज कर बर्खास्त कर दिया गया। कुछ दिन बाद विवेचक ने छात्रा के 161 के बयान दर्ज किए तो सच सामने आया। सिपाही पर रेप की धारा के साथ पाक्सो एक्ट पर तरमीम कर दिया गया। छात्रा बरेली के एक अस्पताल में इलाज करा रही थी। उसको मंगलवार को जिला अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था। छात्रा के मजिस्ट्रेट के सामने 164 के बयान दर्ज होने बाकी थी। यहां छात्रा का इलाज कर रहे सर्जन डॉ. आरएस यादव और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रियाज की बिना रजामंदी के पुलिस शनिवार को छात्रा को कोर्ट ले गई। वहां उसका एंबुलेंस में ही मजिस्ट्रेट संगीता कुमारी ने 164 का बयान दर्ज किया। हालांकि छात्रा की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी है। उसके कूल्हे और सिर की हड्डी में भी फैक्चर है। डॉक्टर्स ने सलाह दी थी कि उसको हिलने-डुलने भी न दिया जाए। बावजूद इसके पुलिस डॉक्टर्स की सलाह को नजर अंदाज कर छात्रा को अस्पताल से कोर्ट तक ले गई। बाद में उसे अस्पताज में भर्ती करा दिया गया।
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ये बोले डॉक्टर्स
- छात्रा का इलाज कर रहे सर्जन डॉ. आरएस यादव का कहना है कि उसकी हालत अभी भी गंभीर है। पुलिस को ऐसा नहीं करना चाहिए था। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रियाज का कहना है कि छात्रा की रीढ़, सिर और कूल्हे की हड्डी में फैक्चर है उसे इस तरह से ले जाना घातक था। सीएमएस डॉ. एके वर्मा ने बताया कि उनसे पुलिस ने कोई बात नहीं की और छात्रा को बयान दर्ज कराने के लिए ले गई।
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छात्रा की मां से रजामंदी ले ली गई थी। उसके बाद ही 164 के बयान दर्ज कराने को उसे कोर्ट ले जाया गया था। डॉक्टर्स से राय नहीं ली गई थी। छात्रा की हालत सामान्य है। बयान समय से दर्ज होने जरूरी थे।
-देवराज राठी, उझानी कोतवाल/विवेचक