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दस साल में करोड़पति बन गया राकेश
बदायूं, ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jun 2016 11:41 PM IST
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लिविंग स्टाइल बदला और तौर तरीके भी
जिले में कई जगह खरीदी प्रॉपर्टी और गाड़ियां
जवाहर बाग कांड के बाद सुर्खियों में आया राकेश गुप्ता एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखता है। जबसे वह बाबा जयगुरुदेव के चेले रामवृक्ष यादव की संगत में आया तो उसका रहन-सहन और तौर-तरीका ही बदल गया। उसके नाते रिश्तेदार और जानने वाले लोग भी उसकी बढ़ती हैसियत को देखकर हैरान थे। किसी से ज्यादा बातचीत न करने वाला राकेश सहकारी समिति का सचिव भी था। उसने समिति के माध्यम से भी खूब वारे-न्यारे किए।
लोग बताते हैं कि मथुरा कांड के मुख्य खलनायक रामवृक्ष यादव की दातागंज क्षेत्र में गहरी पकड़ थी। वह कई बार यहां आ चुका था, उसने कई धार्मिक कार्यक्रम भी किए थे। इस दौरान उसने कई लोगों से बातचीत करके अपने साथ जोड़ा था। इस वजह से उसका बड़ा नेटवर्क दातागंज क्षेत्र में फैला हुआ था। अंतिम बार रामवृक्ष यादव राकेश की बेटी की शादी में आया था।
राकेश गुप्ता के पास टाटा सफारी के अलावा एक और कार थी। वह करीब 15 वर्षों से दातागंज और बदायूं में रह रहा था। उसका पैतृक गांव हजरतपुर थाना क्षेत्र में है। ज्यों-ज्यों पैसा बढ़ा, उसने शहर और गांव में मकान और खेत खरीदे। इंदिरा चौक के पास उसकी कोठी भी है। पैतृक गांव गढ़िया शाहपुर में पिता हरीराम गुप्ता और मां रहती हैं। गांव वालों की मानें तो राकेश के संबंध पिता और मां से अच्छे नहीं है। इस वजह से वह गांव में नहीं आता था। राकेश का भाई सर्वेश दातागंज के एक मोहल्ले में रहता है। उसकी केमिस्ट की दुकान है, जबकि सर्वेश की पत्नी उसके पैतृक गांव में ही शिक्षक पद पर कार्यरत है। इन लोगों से भी उसका ज्यादा मेलजोल नहीं है। करीब दस साल पहले तक सामान्य सा दिखने वाला राकेश अब करोड़पति था। उसका रसूख बढ़ने के बाद से उसके रिश्तेदार भी उससे दूर से हो गए थे।
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जवाहर बाग कांड के बाद सुर्खियों में आया राकेश गुप्ता एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखता है। जबसे वह बाबा जयगुरुदेव के चेले रामवृक्ष यादव की संगत में आया तो उसका रहन-सहन और तौर-तरीका ही बदल गया। उसके नाते रिश्तेदार और जानने वाले लोग भी उसकी बढ़ती हैसियत को देखकर हैरान थे। किसी से ज्यादा बातचीत न करने वाला राकेश सहकारी समिति का सचिव भी था। उसने समिति के माध्यम से भी खूब वारे-न्यारे किए।
लोग बताते हैं कि मथुरा कांड के मुख्य खलनायक रामवृक्ष यादव की दातागंज क्षेत्र में गहरी पकड़ थी। वह कई बार यहां आ चुका था, उसने कई धार्मिक कार्यक्रम भी किए थे। इस दौरान उसने कई लोगों से बातचीत करके अपने साथ जोड़ा था। इस वजह से उसका बड़ा नेटवर्क दातागंज क्षेत्र में फैला हुआ था। अंतिम बार रामवृक्ष यादव राकेश की बेटी की शादी में आया था।
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राकेश गुप्ता के पास टाटा सफारी के अलावा एक और कार थी। वह करीब 15 वर्षों से दातागंज और बदायूं में रह रहा था। उसका पैतृक गांव हजरतपुर थाना क्षेत्र में है। ज्यों-ज्यों पैसा बढ़ा, उसने शहर और गांव में मकान और खेत खरीदे। इंदिरा चौक के पास उसकी कोठी भी है। पैतृक गांव गढ़िया शाहपुर में पिता हरीराम गुप्ता और मां रहती हैं। गांव वालों की मानें तो राकेश के संबंध पिता और मां से अच्छे नहीं है। इस वजह से वह गांव में नहीं आता था। राकेश का भाई सर्वेश दातागंज के एक मोहल्ले में रहता है। उसकी केमिस्ट की दुकान है, जबकि सर्वेश की पत्नी उसके पैतृक गांव में ही शिक्षक पद पर कार्यरत है। इन लोगों से भी उसका ज्यादा मेलजोल नहीं है। करीब दस साल पहले तक सामान्य सा दिखने वाला राकेश अब करोड़पति था। उसका रसूख बढ़ने के बाद से उसके रिश्तेदार भी उससे दूर से हो गए थे।
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