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उपद्रवियों के आगे असहाय बनी रही पुलिस
बदायूं
Updated Wed, 20 Jan 2016 12:06 AM IST
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चौधरी सराय मोहल्ले में तीन घंटे तक उपद्रव होता रहा। उपद्रवियों की भीड़ मनमानी करती रही और अफसर असहाय से खड़े रहे। भीड़ ने पहले तो फरहान और लब्बू के घरों में पुलिस-पीएसी की मौजूदगी में तोड़फोड़ की। बाद में जोएब के घर में आग लगा दी। गनीमत रही कि इससे पहले पुलिस आरोपियों के परिवार वालों को सुरक्षित निकाल चुकी थी।
सर्विलांस के जरिए पुलिस को फरहान, लब्बू और जोएब के घटना में शामिल होने के ठोस क्लू मिल चुके थे। इसके बाद तीनों को मंगलवार सुबह पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। सख्ती करने पर दोपहर करीब दो बजे आरोपियों ने जुर्म कबूल भी कर लिया। इसके साथ ही कोतवाली पुलिस टेंशन में आ गई। पुलिस को पहले से बवाल होने की आशंका थी। इसको देखते हुए चौधरी सराय को छावनी बना दिया गया। आसपास के नौ थानों की पुलिस के साथ पीएसी और तीन सीओ भी यहां लगा दिए गए।
शाम चार बजे उसैदुल की अपहरण के बाद हत्या की बात जब परिवार वालों को पता लगी तो मोहल्ले में दंगे जैसे हालात पैदा हो गए। गनीमत रही कि दोनों एक ही पक्ष के लोग थे। ये इलाका मिश्रित आबादी का भी नहीं है। अगर ऐसा होता तो पुलिस के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती थी।
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परिवार के साथ उसैदुल को तलाश कराते रहे आरोपी
16 को हत्या की और 17 जनवरी को जलाया शव
एक ही मोबाइल में दो सिम डालने से पकड़े गए
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। पुलिस की मानें तो आरोपी उसैदुल को अगवा करने के बाद सीधे छोटी ज्यारत के पीछे वाले रास्ते से कुरऊ के जंगल में ले गए। 16 जनवरी को ही शाम तीनों ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी, शव वहीं फेंक दिया। इसके बाद तीनों खालिद के हमदर्द बन कर उसके साथ उसैदुल की तलाश कराते रहे। ऐसे में परिवार और पुलिस को इन पर शक नहीं हुआ। एक ही मोबाइल में दो सिम डालने पर तीनों फंस गए।
अगले दिन सफेद अपाचे बाइक का नाम सामने आने पर पुलिस ने फरहान को पूछताछ के लिए कोतवाली बुला लिया। उसैदुल के पिता को इस बारे में पता लगा, तो उसने फरहान को छुड़वा लिया। 17 जनवरी की शाम को तीनों फिर से कुरऊ के जंगल में पहुंचे। बाइक से पट्रोल निकाल कर उसैदुल के शव पर डाल कर उसे जला दिया। इनका मकसद पहचान मिटाना था। इस दौरान तीनों उसैदुल की तलाश का नाटक और फिरौती के चक्कर में भी लगे रहे। एक ही मोबाइल में दो सिम डालने पर तीनों पुलिस के रडार पर आ गए। आखिर तीसरे दिन पुलिस ने घटना का वर्कआउट कर दिया।
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20 मिनट में नौ थानों की पुलिस का मूवमेंट
बदायूं। सर्दी में शहर का माहौल जब गरम हुआ, तो पुलिस के लिए टेंशन शुरू हो गई। कंट्रोल रूम से मैसेज फ्लैस होने के बाद 20 मिनट में मिले के नौ थानों की पुलिस का मूवमेंट हुआ। कोतवाली पुलिस के साथ बिनावर, कुंवरगांव, सिविल लाइंस, मूसाझाग, उझानी, कादरचौक, वजीरगंज समेत नौ थानों के एसओ फोर्स के साथ चौधरी सराय पहुंच गए। मौके पर भारी तादाद में फोर्स होने के बावजूद पुलिस को उपद्रव पर काबू करने में पसीने छूट गए।
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आगजनी करने वालों पर भी होगी कार्रवाई
बदायूं। आरोपियों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इंस्पेक्टर कोतवाली मनोज कुमार सिंह ने बताया कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। फिलहाल उपद्रव करने वालों के खिलाफ तहरीर नहीं आई है। तहरीर आने पर इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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महंगे शौकों ने अपराध की ओर मोड़े कदम
तीनों आरोपियों का कोई अपराधिक इतिहास नहीं
बदायूं। तीनों आरोपी सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि इनका कोई अपराधिक इतिहास नहीं है, लेकिन तीनों की सामाजिक छवि भी बेहतर नहीं है। मोहल्ले के लोगों की मानें तो तीनों महंगे शौक किया करते थे। जाहिर है कि महंगे शौकों ने तीनों युवाओं को अपराध की ओर मोड़ दिया।
आरोपियों में जोएब का पिता नईम कारचोबी का काम करता है। फरहान बदायूं का रहने वाला नहीं है। कई साल से वह चौधरी सराय में अपनी रिश्तेदारी में रह रहा है। लब्बू का पिता भी मेहनत मजदूरी करके गुजारा करता है। घटना में इस्तेमाल हुई अपाचे बाइक फरहान की है। अक्सर तीनों इसी बाइक से साथ घूमते थे। दिन भर घूमना, महंगे शौक करना और शाम को अन्य खर्च तीनों के शगल बने हुए थे। यही वजह रही कि तीनों ने अपने शौक पूरे करने के लिए उसैदुल का अपहरण किया। बाद में पकड़े जाने के डर से उसे ठिकाने लगा दिया।
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सर्विलांस के जरिए पुलिस को फरहान, लब्बू और जोएब के घटना में शामिल होने के ठोस क्लू मिल चुके थे। इसके बाद तीनों को मंगलवार सुबह पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। सख्ती करने पर दोपहर करीब दो बजे आरोपियों ने जुर्म कबूल भी कर लिया। इसके साथ ही कोतवाली पुलिस टेंशन में आ गई। पुलिस को पहले से बवाल होने की आशंका थी। इसको देखते हुए चौधरी सराय को छावनी बना दिया गया। आसपास के नौ थानों की पुलिस के साथ पीएसी और तीन सीओ भी यहां लगा दिए गए।
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शाम चार बजे उसैदुल की अपहरण के बाद हत्या की बात जब परिवार वालों को पता लगी तो मोहल्ले में दंगे जैसे हालात पैदा हो गए। गनीमत रही कि दोनों एक ही पक्ष के लोग थे। ये इलाका मिश्रित आबादी का भी नहीं है। अगर ऐसा होता तो पुलिस के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती थी।
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परिवार के साथ उसैदुल को तलाश कराते रहे आरोपी
16 को हत्या की और 17 जनवरी को जलाया शव
एक ही मोबाइल में दो सिम डालने से पकड़े गए
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। पुलिस की मानें तो आरोपी उसैदुल को अगवा करने के बाद सीधे छोटी ज्यारत के पीछे वाले रास्ते से कुरऊ के जंगल में ले गए। 16 जनवरी को ही शाम तीनों ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी, शव वहीं फेंक दिया। इसके बाद तीनों खालिद के हमदर्द बन कर उसके साथ उसैदुल की तलाश कराते रहे। ऐसे में परिवार और पुलिस को इन पर शक नहीं हुआ। एक ही मोबाइल में दो सिम डालने पर तीनों फंस गए।
अगले दिन सफेद अपाचे बाइक का नाम सामने आने पर पुलिस ने फरहान को पूछताछ के लिए कोतवाली बुला लिया। उसैदुल के पिता को इस बारे में पता लगा, तो उसने फरहान को छुड़वा लिया। 17 जनवरी की शाम को तीनों फिर से कुरऊ के जंगल में पहुंचे। बाइक से पट्रोल निकाल कर उसैदुल के शव पर डाल कर उसे जला दिया। इनका मकसद पहचान मिटाना था। इस दौरान तीनों उसैदुल की तलाश का नाटक और फिरौती के चक्कर में भी लगे रहे। एक ही मोबाइल में दो सिम डालने पर तीनों पुलिस के रडार पर आ गए। आखिर तीसरे दिन पुलिस ने घटना का वर्कआउट कर दिया।
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20 मिनट में नौ थानों की पुलिस का मूवमेंट
बदायूं। सर्दी में शहर का माहौल जब गरम हुआ, तो पुलिस के लिए टेंशन शुरू हो गई। कंट्रोल रूम से मैसेज फ्लैस होने के बाद 20 मिनट में मिले के नौ थानों की पुलिस का मूवमेंट हुआ। कोतवाली पुलिस के साथ बिनावर, कुंवरगांव, सिविल लाइंस, मूसाझाग, उझानी, कादरचौक, वजीरगंज समेत नौ थानों के एसओ फोर्स के साथ चौधरी सराय पहुंच गए। मौके पर भारी तादाद में फोर्स होने के बावजूद पुलिस को उपद्रव पर काबू करने में पसीने छूट गए।
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आगजनी करने वालों पर भी होगी कार्रवाई
बदायूं। आरोपियों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इंस्पेक्टर कोतवाली मनोज कुमार सिंह ने बताया कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। फिलहाल उपद्रव करने वालों के खिलाफ तहरीर नहीं आई है। तहरीर आने पर इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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महंगे शौकों ने अपराध की ओर मोड़े कदम
तीनों आरोपियों का कोई अपराधिक इतिहास नहीं
बदायूं। तीनों आरोपी सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि इनका कोई अपराधिक इतिहास नहीं है, लेकिन तीनों की सामाजिक छवि भी बेहतर नहीं है। मोहल्ले के लोगों की मानें तो तीनों महंगे शौक किया करते थे। जाहिर है कि महंगे शौकों ने तीनों युवाओं को अपराध की ओर मोड़ दिया।
आरोपियों में जोएब का पिता नईम कारचोबी का काम करता है। फरहान बदायूं का रहने वाला नहीं है। कई साल से वह चौधरी सराय में अपनी रिश्तेदारी में रह रहा है। लब्बू का पिता भी मेहनत मजदूरी करके गुजारा करता है। घटना में इस्तेमाल हुई अपाचे बाइक फरहान की है। अक्सर तीनों इसी बाइक से साथ घूमते थे। दिन भर घूमना, महंगे शौक करना और शाम को अन्य खर्च तीनों के शगल बने हुए थे। यही वजह रही कि तीनों ने अपने शौक पूरे करने के लिए उसैदुल का अपहरण किया। बाद में पकड़े जाने के डर से उसे ठिकाने लगा दिया।