{"_id":"59d4dd794f1c1bac538b5bf7","slug":"patients-kin-create-chaos-when-no-doctor-reaches","type":"story","status":"publish","title_hn":"डॉक्टर नहीं आने पर मरीजों, तीमारदारों ने किया हंगामा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
डॉक्टर नहीं आने पर मरीजों, तीमारदारों ने किया हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
Updated Wed, 04 Oct 2017 06:39 PM IST
विज्ञापन
hospital
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला महिला अस्पताल में दूसरे दिन भी डॉक्टर नदारद रहे। मरीजों, तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसको लेकर तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने जमकर नारेबाजी की। लोगों को हंगामा करते देख स्टाफ भी इधर- उधर हो गया। सरकारी चिकित्सकों की उदासीनता के चलते मजबूरन लोगों को प्राइवेट डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
बुधवार को भी ओपीडी में दवा लेने के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल में तैनात डॉक्टरों में से एक डॉक्टर आई मगर कुछ देर रुककर चली गई। उसके बाद में दोपहर तक कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा तो मरीजों और तीमारदारों का पारा चढ़ गया और उन्होंने हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ता देख, वहां पर तैनात स्टाफ मौके से निकल लिया। जब मामला कुछ शांत हुआ तो स्टाफ वापस आया। जब कोई अधिकारी नहीं पहुंचा, तो हंगामा कर रहे लोग भी बिना दवा लिए चले गए। लोगों का आरोप है कि जिला महिला अस्पताल में डॉक्टरों के नदारद रहने का सिलसिला अब तो रोजाना का हो गया है। डॉक्टर बस उपस्थिति लगाने के लिए जाते हैं। उपस्थिति दर्ज करने के साथ ही वहां से इधर-उधर निकल जाते हैं।
विज्ञापन
बुधवार को भी ओपीडी में दवा लेने के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल में तैनात डॉक्टरों में से एक डॉक्टर आई मगर कुछ देर रुककर चली गई। उसके बाद में दोपहर तक कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा तो मरीजों और तीमारदारों का पारा चढ़ गया और उन्होंने हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ता देख, वहां पर तैनात स्टाफ मौके से निकल लिया। जब मामला कुछ शांत हुआ तो स्टाफ वापस आया। जब कोई अधिकारी नहीं पहुंचा, तो हंगामा कर रहे लोग भी बिना दवा लिए चले गए। लोगों का आरोप है कि जिला महिला अस्पताल में डॉक्टरों के नदारद रहने का सिलसिला अब तो रोजाना का हो गया है। डॉक्टर बस उपस्थिति लगाने के लिए जाते हैं। उपस्थिति दर्ज करने के साथ ही वहां से इधर-उधर निकल जाते हैं।
विज्ञापन