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बदायूं कांड ः वादी पक्ष पर 182 की कार्रवाई संभव

Wed, 17 Dec 2014 11:25 PM IST
बदायूं।
बदायूं। Updated Wed, 17 Dec 2014 11:25 PM IST
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katra rape case follow
कटरा सआदतगंज कांड में सीबीआई ने कोर्ट में दाखिल क्लोजर रिपोर्ट में वादी पक्ष पर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट कहा कि जिस तहरीर पर मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई थी, उससे पहले कई तहरीरें लिखी गई थीं। सीबीआई ने इनमें से कुछ तहरीरों को क्लोजर रिपोर्ट के साथ सबूत के तौर पर पेश किया है। सीबीआई की मानें तो वादी पक्ष और गवाहों ने साजिश रचते हुए फर्जी रिपोर्ट दर्ज कराई है। ऐसे में वादी और गवाहों के खिलाफ गलत रिपोर्ट दर्ज कराने में धारा 182 और साजिश रचने 120 बी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
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कटरा सआदतगंज में 27/28 मई की रात चचेरी बहनों के शव पेड़ पर लटके मिले थे। परिवार वालों ने पप्पू यादव, अवधेश यादव, उरवेश यादव (सगे भाई) समेत सिपाही सर्वेश यादव और छत्रपाल गंगवार के खिलाफ रेप और हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले में जांच कर रही सीबीआई ने 11 दिसंबर को क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करते हुए दावा किया था कि दोनों बहनों ने खुदकुशी की थी। क्लोजर रिपोर्ट में सीबीआई ने पांचों आरोपियों को क्लीन चिट दे दी है।
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लड़की के मोबाइल से कुछ नहीं मिला
क्लोजर रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने घटना वाले दिन पप्पू और बड़ी लड़की के बीच बातचीत होने की बात मानी है। हालांकि जांच एजेंसी का कहना है कि लड़की का मोबाइल पूरी तरह से नष्ट हो चुका था और फॉरेंसिक जांच में कुछ नहीं मिला। पप्पू के मोबाइल की जांच में पता चला कि दोनों के बीच मेला देखने को लेकर बात हुई थी।
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लेडी डॉक्टर को बताया अनुभवहीन
सीबीआई ने लड़कियों का पोस्टमार्टम करने वाले पैनल की लेडी डॉक्टर पुष्पापंत त्रिपाठी को अनुभवहीन बताया है। जांच एजेंसी का कहना है कि डॉ. त्रिपाठी का यह पहला पोस्टमार्टम था। ऐसे में उन्होंने कई चूक कर दी हैं। लड़कियों के शव करीब 12 घंटे तक पेड़ पर लटके रहे थे लेकिन पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया कि इतने समय तक शव लटके रहने से उनमें क्या तब्दीली आ सकती है।
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