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मैं नहीं पकड़ पाऊंगा घोटालेबाज, अपराध शाखा को सौंप दो जांच
ब्यूरो /बदायूं
Updated Sun, 07 Aug 2016 12:37 AM IST
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बिल्सी के तहसील प्रशासन को लांछित कर देने वाला करोड़ों का सूखा राहत चेक घोटाला उलझता नजर आ रहा है। केस की विवेचना कर रहे बिल्सी थाने के दरोगा स्वर्ण सिंह ने आरोपियों पर कार्रवाई करने की बजाए तफ्तीश करने से ही हाथ खड़े कर दिए हैं। विवेचक ने एसएसपी को पत्र लिखकर केस की विवेचना आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से कराने का अनुरोध किया है।
बिल्सी तहसील में पिछले दिनों हुआ करोड़ों का सूखा राहत चेक घोटाला अभी भी तमाम सवाल समेटे है। इस घोटाले में जिम्मेदार राजस्व अधिकारियों को बचाने के प्रयास जांच के दौरान भी जारी रहे हैं। हालांकि जो राजस्व अधिकारी बिल्सी तहसील से स्थानांतरित हुए हैं, उन्हें भी रिलीव नहीं किया जा रहा है। एक महीना पहले इस प्रकरण का खुलासा हुआ तो शासन तक सकते में आ गया। तहसीलदार बिल्सी ने इस मामले में बिल्सी थाने में ही रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। इसके बाद गिरफ्तारी का नहीं, सरकारी धन वापसी का प्रयास किया गया। तहसील के अधिकारियों के निर्देशों पर केस के विवेचक दरोगा स्वर्ण सिंह ने घपले का धन जमा कराए जाने की प्रक्रिया भी शुरू की। इसके साथ ही उन्होंने कुछ लोगों के शपथ पत्र भी लिए। इस प्रकरण में तहसील के अधिकारियों ने अपने को सुरक्षित करना वरीयता में रखा है। यही वजह है कि पुलिस जांच अधिकारी ने उन लोगों के शपथपत्र भी लिए। अब विवेचक ने केस की तफ्तीश करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। जिससे राजनीति दबाव कहें या पुलिस की शिथिलता तहसील का सबसे बड़ा राहत घोटाला मकडजाल में फंसता दिखाई देता है।
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जांच के साथ ही जमा कराए 25 लाख
करीब 60 लोगों ने एफीडेबिड के साथ 25 लाख रुपये की वापसी कर दी है। तहसील के राहत कोष में बैंक के माध्यम से धन जमा करने पर जोर अधिक दिया गया है। जबकि जोर दिया जाना था, दोषियों की गिरफ्तारी को। अभी भी कोई अभियुक्त इस प्रकरण में गिरफ्तार नही किया गया है।
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ये मुल्जिम हो चुके हैं चिह्नित
अबतक की जांच प्रक्रिया के बारे में बिल्सी के एसआई, जांच अधिकारी स्वर्ण सिंह ने बताया कि महावीर प्रसाद, सतीश, भगवान सिंह, तीन लेखपालों समेत बहजोई का ढावा संचालक किशन यादव मुख्य अभियुक्त हैं। किशन यादव के परिवार वाले और रिश्तेदार भी शामिल हैं। बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा, हाथरस समेत कई अन्य जिलों में भी आपदा राहत केचेक दूसरों के खातों में जमा किए गए हैं। चेक हथियाने में उघैती थाने के गांव गंगरौली निवासी उनका किशन यादव का रिश्तेदार मास्टर उरमान और उसका पुत्र अजय भी इस प्रकरण में अभियुक्त बनाए गए हैं।
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यह था प्रकरण चेक घोटाले का
तहसील से कोरे चेक हथियाकर तमाम लोगों के खाते में डलवाकर धन निकाल लिया गया। इसमें करोड़ो का घोटाला होने का अनुमान है। बहजोई, जिला संभल में इस प्रकार का घोटाला पकड़ में आया तो बहजोई की पीएनबी शाखा के मैनेजर से लेकर तमाम लोग इस घोटाले में जुड़े नजर आए। पीएनबी केमैनेजर को साजिश में शामिल तो जांच अधिकारी मान रहे हैं लेकिन उन्होंने उन्हें कहीं अभियुक्त नहीं बनाया है। जांच अधिकारी पर भी धन दोहन के तमाम आरोप लगने लगे हैं। हालांकि वह ईमानदारी से जांच किए जाने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वह कोई गलत मंशा रखते तो आर्थिक अपराध शाखा से जांच कराए जाने की सिफारिश क्यों करते।
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तीन लेखपालों पर गिर चुकी है निलंबन की गाज
एसडीएम विधान जायसवाल का कहना है कि जांच की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रकरण में संलिप्त पाए गए तीन लेखपाल महावीर प्रसाद, सतीश और भगवान सिंह को पहले ही निलंबित कर दिया गया है। इन लेखपालों के नाम एसआई ने भी अपनी जांच में उजागर किए थे।
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बिल्सी तहसील में पिछले दिनों हुआ करोड़ों का सूखा राहत चेक घोटाला अभी भी तमाम सवाल समेटे है। इस घोटाले में जिम्मेदार राजस्व अधिकारियों को बचाने के प्रयास जांच के दौरान भी जारी रहे हैं। हालांकि जो राजस्व अधिकारी बिल्सी तहसील से स्थानांतरित हुए हैं, उन्हें भी रिलीव नहीं किया जा रहा है। एक महीना पहले इस प्रकरण का खुलासा हुआ तो शासन तक सकते में आ गया। तहसीलदार बिल्सी ने इस मामले में बिल्सी थाने में ही रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। इसके बाद गिरफ्तारी का नहीं, सरकारी धन वापसी का प्रयास किया गया। तहसील के अधिकारियों के निर्देशों पर केस के विवेचक दरोगा स्वर्ण सिंह ने घपले का धन जमा कराए जाने की प्रक्रिया भी शुरू की। इसके साथ ही उन्होंने कुछ लोगों के शपथ पत्र भी लिए। इस प्रकरण में तहसील के अधिकारियों ने अपने को सुरक्षित करना वरीयता में रखा है। यही वजह है कि पुलिस जांच अधिकारी ने उन लोगों के शपथपत्र भी लिए। अब विवेचक ने केस की तफ्तीश करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। जिससे राजनीति दबाव कहें या पुलिस की शिथिलता तहसील का सबसे बड़ा राहत घोटाला मकडजाल में फंसता दिखाई देता है।
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जांच के साथ ही जमा कराए 25 लाख
करीब 60 लोगों ने एफीडेबिड के साथ 25 लाख रुपये की वापसी कर दी है। तहसील के राहत कोष में बैंक के माध्यम से धन जमा करने पर जोर अधिक दिया गया है। जबकि जोर दिया जाना था, दोषियों की गिरफ्तारी को। अभी भी कोई अभियुक्त इस प्रकरण में गिरफ्तार नही किया गया है।
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ये मुल्जिम हो चुके हैं चिह्नित
अबतक की जांच प्रक्रिया के बारे में बिल्सी के एसआई, जांच अधिकारी स्वर्ण सिंह ने बताया कि महावीर प्रसाद, सतीश, भगवान सिंह, तीन लेखपालों समेत बहजोई का ढावा संचालक किशन यादव मुख्य अभियुक्त हैं। किशन यादव के परिवार वाले और रिश्तेदार भी शामिल हैं। बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा, हाथरस समेत कई अन्य जिलों में भी आपदा राहत केचेक दूसरों के खातों में जमा किए गए हैं। चेक हथियाने में उघैती थाने के गांव गंगरौली निवासी उनका किशन यादव का रिश्तेदार मास्टर उरमान और उसका पुत्र अजय भी इस प्रकरण में अभियुक्त बनाए गए हैं।
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यह था प्रकरण चेक घोटाले का
तहसील से कोरे चेक हथियाकर तमाम लोगों के खाते में डलवाकर धन निकाल लिया गया। इसमें करोड़ो का घोटाला होने का अनुमान है। बहजोई, जिला संभल में इस प्रकार का घोटाला पकड़ में आया तो बहजोई की पीएनबी शाखा के मैनेजर से लेकर तमाम लोग इस घोटाले में जुड़े नजर आए। पीएनबी केमैनेजर को साजिश में शामिल तो जांच अधिकारी मान रहे हैं लेकिन उन्होंने उन्हें कहीं अभियुक्त नहीं बनाया है। जांच अधिकारी पर भी धन दोहन के तमाम आरोप लगने लगे हैं। हालांकि वह ईमानदारी से जांच किए जाने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वह कोई गलत मंशा रखते तो आर्थिक अपराध शाखा से जांच कराए जाने की सिफारिश क्यों करते।
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तीन लेखपालों पर गिर चुकी है निलंबन की गाज
एसडीएम विधान जायसवाल का कहना है कि जांच की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रकरण में संलिप्त पाए गए तीन लेखपाल महावीर प्रसाद, सतीश और भगवान सिंह को पहले ही निलंबित कर दिया गया है। इन लेखपालों के नाम एसआई ने भी अपनी जांच में उजागर किए थे।