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अपहृत किशोरी का पांच माह बाद भी पता नहीं
अमर उजाला ब्यूरो सहसवान।
Updated Thu, 23 Mar 2017 12:21 AM IST
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- पीड़ित को लगातार धमकी दे रहे हैं आरोपी
अपहृत किशोरी का पुलिस पांच माह बाद भी सुराग लगाने में नाकाम रही है। जबकि आरोपी पीड़ित को मुकदमा वापस न लेने पर लगातार जान की धमकी दे रहे हैं। पीड़िता ने अब आईजी बरेली को प्रार्थना पत्र देकर अपनी बेटी को बरामद करने और अपनी जान माल की सुरक्षा की मांग की है।
जरीफनगर थाना क्षेत्र के गांव की नाबालिग किशोरी अपनी मां के साथ बदायूं से दवा लेकर घर वापस लौटने के लिए कचहरी चौराहे पर बस का इंतजार कर रही थी। आरोप है कि इसी दौरान गांव का बाबूराम, लालसिंह और एक व्यक्ति अज्ञात चार पहिया गाड़ी से आए। उन्होंने कहा कि गाड़ी गांव जा रही है, इसमें बैठ जाओ। महिला अपनी नाबालिग पुत्री के साथ गाड़ी में बैठ गई। गाड़ी जैसे ही शेखूपुर तिराहे से आगे निकली सुनसान जगह पर कार सवार तीनों लोगों ने महिला को धक्का देकर नीचे उतार दिया और उसकी बेटी को लेकर फरार हो गए। महिला ने इसकी शिकायत थाना सिविल लाइन पुलिस से की, मगर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर लगभग पांच माह बाद मुकदमा दर्ज किया। तब से महिला अपनी बेटी की बरामदगी के लिए पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा रही है। महिला का कहना है कि नामजद आरोपी उस पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।
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अपहृत किशोरी का पुलिस पांच माह बाद भी सुराग लगाने में नाकाम रही है। जबकि आरोपी पीड़ित को मुकदमा वापस न लेने पर लगातार जान की धमकी दे रहे हैं। पीड़िता ने अब आईजी बरेली को प्रार्थना पत्र देकर अपनी बेटी को बरामद करने और अपनी जान माल की सुरक्षा की मांग की है।
जरीफनगर थाना क्षेत्र के गांव की नाबालिग किशोरी अपनी मां के साथ बदायूं से दवा लेकर घर वापस लौटने के लिए कचहरी चौराहे पर बस का इंतजार कर रही थी। आरोप है कि इसी दौरान गांव का बाबूराम, लालसिंह और एक व्यक्ति अज्ञात चार पहिया गाड़ी से आए। उन्होंने कहा कि गाड़ी गांव जा रही है, इसमें बैठ जाओ। महिला अपनी नाबालिग पुत्री के साथ गाड़ी में बैठ गई। गाड़ी जैसे ही शेखूपुर तिराहे से आगे निकली सुनसान जगह पर कार सवार तीनों लोगों ने महिला को धक्का देकर नीचे उतार दिया और उसकी बेटी को लेकर फरार हो गए। महिला ने इसकी शिकायत थाना सिविल लाइन पुलिस से की, मगर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर लगभग पांच माह बाद मुकदमा दर्ज किया। तब से महिला अपनी बेटी की बरामदगी के लिए पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा रही है। महिला का कहना है कि नामजद आरोपी उस पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।
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