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सवारी को लेकर निजी और रोडवेज चालकों में विवाद
अमर उजाला ब्यूरो दातागंज।
Updated Mon, 20 Mar 2017 11:45 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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- हाथापाई की नौबत आते-आते बची, लोगों ने बीचबचाव कर किया शांत
रोडवेज स्टैंड परिसर से सवारी भरने को लेकर सोमवार को डग्गामार चालक और रोडवेज चालक परिचालक में विवाद हो गया। हाथापाई की नौबत तक बन आई। विवाद होता देख लोगों ने बीचबचाव कर मामला शांत किया।
एक करोड़ 65 लाख 85 लाख की लागत से तैयार किए गए रोडवेज स्टबस स्टाप का 28 अक्तूबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने लोकार्पण किया था। उस वक्त क्षेत्र की जनता में खुशी की लहर थी। लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं रही। रोडवेज स्टैंड बनने के बाद भी सुविधाओं का टोटा बना रहा। न तो कोई कर्मचारी तैनात किया गया, न ही बसें ही बढ़ाई गईं। इतना ही नहीं जो रोडवेज बसें चलती वह भी परिसर में न जाकर उनके चालक सीधे बाइपास से निकाल ले जाते। इससे यात्रियों के सामने समस्या ज्यों कि त्यों ही बनी रहीं। वहीं खाली स्टैंड परिसर को देखते हुए इसका फायदा डग्गामारों ने जरूर उठा लिया। यह परिसर के अंदर व बाहर वाहन लगाकर सवारियों को भरकर ले जाने लगे। कम किराया और रोडवेज स्टैंड से सुविधा को देखते हुए यात्री भी मजबूरी में सफर करने लगे। रोडवेज बस के चालक ने डग्गामार वाहनों को सवारियां भरता देख नाराजगी जताई। इससे निजी वाहन चालक भी बहस करने लगे और देखते ही देखते विवाद बढ़ गया। कई बार निजी बस वालों की शिकायत भी परिवहन विभाग के अधिकारियों से की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
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रोडवेज स्टैंड परिसर से सवारी भरने को लेकर सोमवार को डग्गामार चालक और रोडवेज चालक परिचालक में विवाद हो गया। हाथापाई की नौबत तक बन आई। विवाद होता देख लोगों ने बीचबचाव कर मामला शांत किया।
एक करोड़ 65 लाख 85 लाख की लागत से तैयार किए गए रोडवेज स्टबस स्टाप का 28 अक्तूबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने लोकार्पण किया था। उस वक्त क्षेत्र की जनता में खुशी की लहर थी। लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं रही। रोडवेज स्टैंड बनने के बाद भी सुविधाओं का टोटा बना रहा। न तो कोई कर्मचारी तैनात किया गया, न ही बसें ही बढ़ाई गईं। इतना ही नहीं जो रोडवेज बसें चलती वह भी परिसर में न जाकर उनके चालक सीधे बाइपास से निकाल ले जाते। इससे यात्रियों के सामने समस्या ज्यों कि त्यों ही बनी रहीं। वहीं खाली स्टैंड परिसर को देखते हुए इसका फायदा डग्गामारों ने जरूर उठा लिया। यह परिसर के अंदर व बाहर वाहन लगाकर सवारियों को भरकर ले जाने लगे। कम किराया और रोडवेज स्टैंड से सुविधा को देखते हुए यात्री भी मजबूरी में सफर करने लगे। रोडवेज बस के चालक ने डग्गामार वाहनों को सवारियां भरता देख नाराजगी जताई। इससे निजी वाहन चालक भी बहस करने लगे और देखते ही देखते विवाद बढ़ गया। कई बार निजी बस वालों की शिकायत भी परिवहन विभाग के अधिकारियों से की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
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