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‘पोटली’ कारोबार पर एकछत्र राज चाहता था फहीम
बदायूं, ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jul 2016 11:56 PM IST
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‘पोटली’ कारोबार पर एकछत्र राज चाहता था फहीम
- फोटो : अमर उजाला
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बड़े भाई नईम की हत्या के बाद छिड़ गई थी दो गुटों में जंग
फहीम की हत्या के बाद बढ़ गया गैंगवार का खतरा
एक विधायक के करीबी नईम राजा की हत्या के बाद उसका छोटा भाई फहीम तुर्क सुर्खियों में आया था। नईम की हत्या आठ महीने पहले 'पोटली' के कारोबार के विवाद में की गई थी। इसके बाद फहीम इस कारोबार पर अपना एकछत्र राज चाहता था। नईम की हत्या के बाद से ही मांस कारोबारियों के दो गुटों के बीच 'पोटली' पर कब्जे को लेकर गैंगवार की स्थिति बनी हुई थी।
मांस के लिए काटे जाने वाले पशुओं के शरीर से निकलने वाले एक अंग 'पोटली' की विदेशों में काफी कीमत है। कारोबारी बताते हैं कि आंतों जैसे इस अंग को पहले सुखाया जाता है, इसके बाद इसको बेचा जाता है। यहां इस अंग की कीमत 300 से 500 रुपये के बीच होती है। विदेशों में एक्सपोर्ट करने पर 'पोटली' की कीमत पांच से छह हजार रुपये तक मिलती है। शहर में लंबे समय से मांस कारोबारियों के बीच पोटली के कारोबार को लेकर जंग छिड़ी हुई है। इसको लेकर काफी समय से गैंगवार चल रहा था। नईम पर भी कई बार कातिलाना हमला हुआ था। नईम की हत्या के बाद उसका कारोबार फहीम ने संभाला था। इसके बाद से फहीम भी मांस कारोबारियों के निशाने पर था। आखिर मंगलवार सुबह फहीम का खेल भी खत्म हो गया।
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डबल मर्डर से सुर्खियों में आया था नईम राजा
बदायूं। फहीम का भाई हिस्ट्रीशीटर नईम उर्फ राजा शहर के मोहल्ला खंडसारी में दो नवंबर 2013 को बुजुर्ग भाई-बहन के मर्डर के बाद सुर्खियों में आया था। उन दिनों राजा जिला जेल में निरुद्ध था। 12 अक्तूबर को यह बीमारी के बहाने जेल से जिला अस्पताल में भर्ती हुआ। हिस्ट्रीशीटर 2/3 नवंबर की रात शातिराना अंदाज में अस्पताल से निकल कर खंडसारी मोहल्ले पहुंचा। वहां उसने डबल मर्डर को अंजाम दिया था।
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जिला अस्पताल के कई डॉक्टर भी राजा पर मेहरबान थे। उसको बिना किसी बीमारी के 25 दिन तक जिला अस्पताल में रखा गया। इस मामले में राजा का इलाज करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ मजिस्ट्रेटी जांच हुई थी। उसके मरने के बाद ये जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई। नईम की हत्या में नामजद अमजद, शराफत, लखन और राजा डबल मर्डर की वारदात में गवाह हैं।
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30 मिनट में नौ थानों की पुलिस का मूवमेंट
बदायूं। फहीम की हत्या को अधिकारियों ने काफी संजीदगी से लिया। वक्त रहते शहर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। सिर्फ 30 मिनट में 10 थानों की पुलिस ने मूवमेंट किया और फोर्स शहर पहुंच गया। पीएसी के साथ पुलिस को मोहल्ला खंडसारी, मीट मार्केट, जिला अस्पताल, कबूलपुरा, मीट मार्केट पर तैनात कर दिया गया। इतना ही नहीं आरोपियों के घरों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई। एसएसपी ने स्थित को भांपते हुए बिनावर, कुंवरगांव, अलापुर, उझानी, मूसाझाग, वजीरगंज, कोतवाली, सिविल लाइंस और कादरचौक थानों से पुलिस को बुला लिया।
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खंडसारी और अस्पताल बना छावनी
बदायूं। फहीम की हत्या की खबर शहर में आग की तहर फैलने के बाद अफवाहों का बाजार भी गरम हो गया। शहर के कई इलाकों में तनाव का माहौल बन गया। 12 बजे तक फहीम का शव जिला अस्पताल में रहा। इस दौरान यहां कई बार हंगामा भी हुआ। बाद में शव पोस्टमार्टम को भेजा गया। पोस्टमार्टम हाउस पर भी कई बार माहौल बिगड़ते-बिगड़ते बचा। एहतियात बरतते हुए सभी इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया गया। पुलिस के साथ पीएसी को भी लगाया गया।
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फहीम की हत्या के बाद बढ़ गया गैंगवार का खतरा
एक विधायक के करीबी नईम राजा की हत्या के बाद उसका छोटा भाई फहीम तुर्क सुर्खियों में आया था। नईम की हत्या आठ महीने पहले 'पोटली' के कारोबार के विवाद में की गई थी। इसके बाद फहीम इस कारोबार पर अपना एकछत्र राज चाहता था। नईम की हत्या के बाद से ही मांस कारोबारियों के दो गुटों के बीच 'पोटली' पर कब्जे को लेकर गैंगवार की स्थिति बनी हुई थी।
मांस के लिए काटे जाने वाले पशुओं के शरीर से निकलने वाले एक अंग 'पोटली' की विदेशों में काफी कीमत है। कारोबारी बताते हैं कि आंतों जैसे इस अंग को पहले सुखाया जाता है, इसके बाद इसको बेचा जाता है। यहां इस अंग की कीमत 300 से 500 रुपये के बीच होती है। विदेशों में एक्सपोर्ट करने पर 'पोटली' की कीमत पांच से छह हजार रुपये तक मिलती है। शहर में लंबे समय से मांस कारोबारियों के बीच पोटली के कारोबार को लेकर जंग छिड़ी हुई है। इसको लेकर काफी समय से गैंगवार चल रहा था। नईम पर भी कई बार कातिलाना हमला हुआ था। नईम की हत्या के बाद उसका कारोबार फहीम ने संभाला था। इसके बाद से फहीम भी मांस कारोबारियों के निशाने पर था। आखिर मंगलवार सुबह फहीम का खेल भी खत्म हो गया।
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डबल मर्डर से सुर्खियों में आया था नईम राजा
बदायूं। फहीम का भाई हिस्ट्रीशीटर नईम उर्फ राजा शहर के मोहल्ला खंडसारी में दो नवंबर 2013 को बुजुर्ग भाई-बहन के मर्डर के बाद सुर्खियों में आया था। उन दिनों राजा जिला जेल में निरुद्ध था। 12 अक्तूबर को यह बीमारी के बहाने जेल से जिला अस्पताल में भर्ती हुआ। हिस्ट्रीशीटर 2/3 नवंबर की रात शातिराना अंदाज में अस्पताल से निकल कर खंडसारी मोहल्ले पहुंचा। वहां उसने डबल मर्डर को अंजाम दिया था।
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जिला अस्पताल के कई डॉक्टर भी राजा पर मेहरबान थे। उसको बिना किसी बीमारी के 25 दिन तक जिला अस्पताल में रखा गया। इस मामले में राजा का इलाज करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ मजिस्ट्रेटी जांच हुई थी। उसके मरने के बाद ये जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई। नईम की हत्या में नामजद अमजद, शराफत, लखन और राजा डबल मर्डर की वारदात में गवाह हैं।
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30 मिनट में नौ थानों की पुलिस का मूवमेंट
बदायूं। फहीम की हत्या को अधिकारियों ने काफी संजीदगी से लिया। वक्त रहते शहर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। सिर्फ 30 मिनट में 10 थानों की पुलिस ने मूवमेंट किया और फोर्स शहर पहुंच गया। पीएसी के साथ पुलिस को मोहल्ला खंडसारी, मीट मार्केट, जिला अस्पताल, कबूलपुरा, मीट मार्केट पर तैनात कर दिया गया। इतना ही नहीं आरोपियों के घरों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई। एसएसपी ने स्थित को भांपते हुए बिनावर, कुंवरगांव, अलापुर, उझानी, मूसाझाग, वजीरगंज, कोतवाली, सिविल लाइंस और कादरचौक थानों से पुलिस को बुला लिया।
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खंडसारी और अस्पताल बना छावनी
बदायूं। फहीम की हत्या की खबर शहर में आग की तहर फैलने के बाद अफवाहों का बाजार भी गरम हो गया। शहर के कई इलाकों में तनाव का माहौल बन गया। 12 बजे तक फहीम का शव जिला अस्पताल में रहा। इस दौरान यहां कई बार हंगामा भी हुआ। बाद में शव पोस्टमार्टम को भेजा गया। पोस्टमार्टम हाउस पर भी कई बार माहौल बिगड़ते-बिगड़ते बचा। एहतियात बरतते हुए सभी इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया गया। पुलिस के साथ पीएसी को भी लगाया गया।