बदायूं: पति की हत्या कराने वाली महिला और उसके प्रेमी समेत तीन लोगों को उम्रकैद, कादरचौक थाना क्षेत्र का मामला
कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव लभारी निवासी अनिल कुमार ने 23 नवंबर 2011 को कुंवरगांव थाने आकर तहरीर दी थी। उसके मुताबिक 16 नवंबर 2011 को उसके पिता हरिशंकर कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव बल्लिया गए थे, लेकिन घर नहीं लौटे। इसके बाद अनिल ने एक दिसंबर 2011 को फिर एक तहरीर दी।
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कादरचौक थाना क्षेत्र में 10 साल पहले पति की हत्या कराने वाली महिला और उसके प्रेमी समेत तीन लोगों को फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश सारिका गोयल ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसमें चौथे आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। कोर्ट ने सभी पर 45 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव लभारी निवासी अनिल कुमार ने 23 नवंबर 2011 को कुंवरगांव थाने आकर तहरीर दी थी। उसके मुताबिक 16 नवंबर 2011 को उसके पिता हरिशंकर कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव बल्लिया गए थे, लेकिन घर नहीं लौटे। इसके बाद अनिल ने एक दिसंबर 2011 को फिर एक तहरीर दी, जिसमें उसने बताया कि पिता हरिशंकर घर से बल्लिया गांव धान लेने गए थे।
पीड़ित ने बताया कि उसे पता चला कि उसकी मां उर्मिला देवी के उसके ही घर में रहने वाले गांव हैबतपुर थाना बिल्सी निवासी रमेश से संबंध थे। पिता हरिशंकर ने आपत्ति भी की थी। पिता और रमेश में काफी नोकझोंक भी हुई। आरोप लगाया कि उसकी मां उर्मिला देवी और रमेश ने मिलकर उसके पिता हरिशंकर की गड़ासे से काटकर हत्या कर दी।
मृतक के हाथ का पंजा मिला था
पुत्र का कहना था कि थाना कुंवरगांव के चौकीदार ने 25 नवंबर 2011 को मामला दर्ज कराया कि बल्लिया गांव के खेत में एक व्यक्ति का कटे हुए हाथ का पंजा मिला। उसे जानवर खींच कर ले जा रहे थे। शव के कटे हुए हाथ का पंजा सुरक्षित रखा गया था। जब पुलिस ने उसे हाथ का पंजा दिखाया तो उसने कलाई में बंधे कलावे और नाखून देखकर उसकी अपने पिता के हाथ के रूप में पहचान की।
सुनवाई के दौरान चौथे आरोपी की मौत हुई
उसके बाद अनिल ने रमेश, मां उर्मिला, दुलार और नरोत्तम पुत्र दुलार निवासी बल्लिया थाना कुंवरगांव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना के बाद रमेश, उर्मिला, नरोत्तम और दुलार के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दुलार की मृत्यु हो गई।
फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश सारिका गोयल ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। कोर्ट ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी ओमपाल कश्यप और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद रमेश, उर्मिला देवी और नरोत्तम को हरिशंकर की हत्या में मुजरिम करार दिया। कोर्ट ने तीनों मुजरिमों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।