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तकाजों से तंग युवक ने फांसी लगाकर दे दी जान

Tue, 08 Jan 2019 05:29 PM IST
geetesh jolly geetesh jolly
Updated Tue, 08 Jan 2019 05:29 PM IST
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तकाजों से तंग युवक ने फांसी लगाकर दे दी जान
तकाजों से तंग युवक ने फांसी लगाकर दे दी जान
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बदायूं। तकाजों से तंग आकर एक युवक ने फांसी लगाकर जान दे दी। युवक एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी करता था, जिसमें उसने लोगों के पैसे जमा कराए थे। कंपनी पैसे लेकर भाग गई तो लोग अपने पैसे वापस लेने के लिए युवक के पीछे पड़ गए। इससे तंग आकर उसने जान दे दी।
करीब 33 वर्षीय गेंदनलाल पुत्र गुलाब सिंह सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला टंकी मीरा जी की चौकी निवासी था। कई साल से गेंदनलाल अपनी पत्नी नीतू के साथ बरेली में रह रहा था। परिवार वालों की माने तो गेंदनलाल एक फाइनेंस कंपनी में काम करता था। उसने कई लोगों के रुपये फाइनेंस कंपनी में जमा कराए गए थे। कुछ समय बाद कंपनी भाग गई। इससे रुपये गंवाने वाले लोग गेंदनलाल के पीछे पड़ गए। उन्होंने उससे रुपये मांगने शुरू कर दिए, जिससे परेशान होकर वह बरेली चला गया और वहीं रहने लगा। चार दिन पहले उसकी पत्नी नीतू अपनी तीन साल की बेटी को लेकर मायके चली गई। सोमवार रात गेंदनलाल किसी वक्त बरेली से बदायूं चला आया, लेकिन वह अपने घर पर न जाकर बजरंग नगर मोहल्ले से आगे नगला घेर जाने वाले रास्ते पर अपने खेत पर चला गया। फिर उसने रात के किसी समय आम के पेड़ पर फंदे पर झूलकर जान दे दी। मंगलवार सुबह लोग उस तरफ टहलने गए तो गेंदनलाल की लाश पेड़ पर लटकी देखकर अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही देर में मोहल्ले के लोग और उसके परिवार वाले पहुंच गए। सूचना पर कोतवाली पुलिस भी आ गई। तलाशी में उसकी जेब से एक सुसाइड नोट निकला। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर दोपहर के समय पोस्टमार्टम कराया और उसके बाद परिवार वालों के हवाले कर दिया।
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सुसाइड नोट में लिखा- लाश ढोने में होगा खर्चा, इसलिए आ गया बदायूं
गेंदनलाल ने जो सुसाइड नोट में लिखा है वह उसकी मानसिक स्थिति को बयां करने के लिए काफी है। नोट में लिखा है कि वह अपनी जिंदगी से परेशान आ चुका है। वह अपनी जान दे रहा है। पुलिस उसकी पत्नी और परिवार वालों को परेशान न करे। पत्नी बहुत अच्छी है, भाई भी बहुत अच्छा है, वह अपने फर्ज निभा रहे हैं। मैंने हमेशा परिवार वालों को दुख के सिवा कुछ नहीं दिया है। अब मैं जीना नहीं चाहता। मैं चाहता तो बरेली में जान दे सकता था लेकिन मेरे मां-बाप बहुत गरीब हैं। बरेली से लाश ले जाने में खर्चा होता। इसलिए अपनी जगह पर ही जान दूंगा।
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