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सरकारी कागजों में आठ महीने बाद जिंदा हुए डॉ. हरपाल सिंह

Sun, 13 Aug 2017 09:03 PM IST
Updated Sun, 13 Aug 2017 09:03 PM IST
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सरकारी कागजों में आठ महीने बाद जिंदा हुए डॉ. हरपाल सिंह
बदायूं। सरकारी दफ्तरों में बैठे बाबू जिसको चाहें जिंदा कर दें और जिसे चाहें कागजों में मार दें। यहां जिला अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक पद पर तैनात डॉ. हरपाल सिंह के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। मेरठ में तैनात रहे दूसरे डॉ. हरपाल सिंह की 2011 में वहीं हत्या कर दी गई थी। लखनऊ निदेशालय में बैठे बाबुओं ने सरकारी रिकार्ड में बदायूं जिला अस्पताल में तैनात डॉ. हरपाल सिंह को मृत दर्शा दिया था। इससे आठ महीने तक उनकी पदोन्नति रुकी रही। कोर्ट की फटकार के बाद निदेशालय ने अपनी गलती सुधारी। अब यहां तैनात डॉ. हरपाल सिंह को चिकित्सधीक्षक पद से पदोन्नत कर एसीएमओ बनाया गया है।
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डॉ. हरपाल सिंह की जिला अस्पताल में बतौर फिजीशियन यहां कई वर्षों से तैनात हैं। जनवरी 2017 में स्वास्थ्य निदेशालय ने लेबल थ्री के डॉक्टरों को पदोन्नति दी थी। पदोन्नति सूची आई तो पता लगा कि उसमें डॉ. हरपाल सिंह को मृत दिखाते हुए पदोन्नत नहीं किया गया है। निदेशालय की इस चूक पर डॉ. हरपाल भी दंग रह गए। लखनऊ में अधिकारियों से संपर्क किया तो उनको बताया गया कि उनकी वर्ष 2011 में हत्या की जा चुकी है। डॉ. हरपाल सिंह ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की शरण ली। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसला डॉ. हरपाल सिंह के पक्ष में लिया। गौर करने वाली बात यह है कि डॉ. हरपाल सिंह को 2011 में मृत दिखा दिया गया था। इसके बावजूद वह नियमित ड्यूटी करते रहे। वेतन का भुगतान भी होता रहा। किसी अधिकारी का इस पर ध्यान नहीं गया। अब कोर्ट के आदेश पर शासन ने हरपाल सिंह को लेबल फोर में पदोन्नति देते हुए उनकी तैनाती बदायूं में ही अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में कर दी है। डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि उनको कोर्ट पर पूरा भरोसा था।
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