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21 और चेक का सच आया सामने
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sat, 28 May 2016 12:34 AM IST
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दैवीय आपदा राहत घोटाला 8.89 लाख रुपये से बढ़कर 13 लाख रुपये का हो गया है। 21 नये चेक के बारे में पता लगा है जो सहसवान में खोले गए फर्जी बैंक खातों में जमा किए गए थे। 111 चेक अब भी बाकी हैं। इन चेक से भी लाखों रुपये के गबन की आशंका जताई जा रही है। पूरे मामले में स्टेट बैंक प्रबंधन के साथ एसबीआई के व्यापार प्रतिनिधियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
बीते वित्तीय वर्ष में जिले में मौसम की मार से फसलों की बर्बादी हुई थी। शासन ने प्रभावित किसानों को आपदा राहत के तहत मुआवजा दिया था। सहसवान तहसील के लेखपाल अकरम खां और भगवान दास ने मिलकर 151 चेक गायब कर दिए। जब बात खुली तो पता लगा कि इनमें से सात चेक के जरिए दिल्ली के प्रीत विहार इलाके के अमन मेहता के खाते में 8.89 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। 12 चेक का भुगतान आशंका होने पर बैंक ने रोक दिया था। मामले में दोनों लेखपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। बाकी के 132 चेक के बारे में कुछ पता नहीं लग पा रहा था।
अब जांच के दौरान साफ हुआ है कि इनमें से 21 चेक सहसवान में ही फर्जी बैंक खाते खोलकर करीब चार लाख रुपये की रकम ट्रांसफर की गई है। फर्जी बैंक खातों में मार्च में चार, अप्रैल में 15 और मई में दो चेक जमा किए गए। पड़ताल में मालूम हुआ है कि ये सभी 21 बैंक खाते फर्जी आईडी से खोले गए हैं। पूरे प्रकरण में एसबीआई के तीन व्यापार प्रतिनिधियों के साथ बैंक प्रबंधन की भूमिका भी संदेह के घेरे में हैं। जांच में कई बैंक अधिकारियों की भी गर्दन फंसने से इंकार नहीं किया जा सकता।
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पहले पांच लाख निकाले, फिर सरकारी खाते में जमा किए
सहसवान। आपदा राहत घोटाले में एक और मामला सामने आया है। शहर की एसबीआई मुख्य ब्रांच से सात मई को चेक संख्या 627899 के जरिए पांच लाख रुपये निकाले गए थे। बाद में यह राशि 23 मई को तहसीलदार सहसवान के सरकारी खाते में जमा कर दी गई। गायब हुए 151 चेक में यह भी एक चेक था। गौर करने वाली बात यह है कि यहां भी बैंक प्रबंधन ने पांच लाख रुपये का चेक कैश करने से पहले तहसील प्रशासन से पड़ताल नहीं की। अब भी 111 चेक बाकी हैं। इन पर स्थित साफ होने तक घोटाला करोड़ों रुपये का हो सकता है।
बैंक प्रबंधक की भूमिका पर उठ रहे सवाल
सहसवान। भारतीय स्टेट बैंक की सहसवान शाखा के एक प्रबंधक की भूमिका पर भी पूरे मामले में सवाल उठ रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि ये प्रबंधक इससे पहले गुन्नौर में तैनात थे। वहां भी इसी तरह से गबन का मामला प्रकाश में आया था। इसके बाद उनको सहसवान भेज दिया गया था। हालांकि, शाखा प्रबंधक का कहना है कि उनको चेक भुगतान होने के मामले में कोई जानकारी नहीं है। वह भी अपने स्तर से पड़ताल करा रहे हैं।
वर्जन-
मामले में पड़ताल चल रही है। धीरे-धीरे तमाम जानकारियां सामने आ रही हैं। गबन के पीछे किन लोगों का हाथ है? यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
-आरपी यादव, एडीएम वित्त एवं राजस्व/प्रभारी अधिकारी दैवीय आपदा राहत
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बीते वित्तीय वर्ष में जिले में मौसम की मार से फसलों की बर्बादी हुई थी। शासन ने प्रभावित किसानों को आपदा राहत के तहत मुआवजा दिया था। सहसवान तहसील के लेखपाल अकरम खां और भगवान दास ने मिलकर 151 चेक गायब कर दिए। जब बात खुली तो पता लगा कि इनमें से सात चेक के जरिए दिल्ली के प्रीत विहार इलाके के अमन मेहता के खाते में 8.89 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। 12 चेक का भुगतान आशंका होने पर बैंक ने रोक दिया था। मामले में दोनों लेखपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। बाकी के 132 चेक के बारे में कुछ पता नहीं लग पा रहा था।
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अब जांच के दौरान साफ हुआ है कि इनमें से 21 चेक सहसवान में ही फर्जी बैंक खाते खोलकर करीब चार लाख रुपये की रकम ट्रांसफर की गई है। फर्जी बैंक खातों में मार्च में चार, अप्रैल में 15 और मई में दो चेक जमा किए गए। पड़ताल में मालूम हुआ है कि ये सभी 21 बैंक खाते फर्जी आईडी से खोले गए हैं। पूरे प्रकरण में एसबीआई के तीन व्यापार प्रतिनिधियों के साथ बैंक प्रबंधन की भूमिका भी संदेह के घेरे में हैं। जांच में कई बैंक अधिकारियों की भी गर्दन फंसने से इंकार नहीं किया जा सकता।
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पहले पांच लाख निकाले, फिर सरकारी खाते में जमा किए
सहसवान। आपदा राहत घोटाले में एक और मामला सामने आया है। शहर की एसबीआई मुख्य ब्रांच से सात मई को चेक संख्या 627899 के जरिए पांच लाख रुपये निकाले गए थे। बाद में यह राशि 23 मई को तहसीलदार सहसवान के सरकारी खाते में जमा कर दी गई। गायब हुए 151 चेक में यह भी एक चेक था। गौर करने वाली बात यह है कि यहां भी बैंक प्रबंधन ने पांच लाख रुपये का चेक कैश करने से पहले तहसील प्रशासन से पड़ताल नहीं की। अब भी 111 चेक बाकी हैं। इन पर स्थित साफ होने तक घोटाला करोड़ों रुपये का हो सकता है।
बैंक प्रबंधक की भूमिका पर उठ रहे सवाल
सहसवान। भारतीय स्टेट बैंक की सहसवान शाखा के एक प्रबंधक की भूमिका पर भी पूरे मामले में सवाल उठ रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि ये प्रबंधक इससे पहले गुन्नौर में तैनात थे। वहां भी इसी तरह से गबन का मामला प्रकाश में आया था। इसके बाद उनको सहसवान भेज दिया गया था। हालांकि, शाखा प्रबंधक का कहना है कि उनको चेक भुगतान होने के मामले में कोई जानकारी नहीं है। वह भी अपने स्तर से पड़ताल करा रहे हैं।
वर्जन-
मामले में पड़ताल चल रही है। धीरे-धीरे तमाम जानकारियां सामने आ रही हैं। गबन के पीछे किन लोगों का हाथ है? यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
-आरपी यादव, एडीएम वित्त एवं राजस्व/प्रभारी अधिकारी दैवीय आपदा राहत