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तीन लोगों को एक साल की सजा, जुर्माना भी
Updated Wed, 06 Sep 2017 11:59 PM IST
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बिसौली। दो अलग-अलग मुकदमों में न्यायिक मजिस्ट्रेट बिसौली ने बुधवार को सजा सुना दी। एक मामले में एक साल की सजा और जुर्माना डाला। दूसरे में अर्थ दंड डाला गया है।
उघैती थाना क्षेत्र के गांव करियामई निवासी नारायण हरि पुत्र महेंद्र ने 1997 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने घर में खाना खा रहा था। तभी अचानक परिवार के ही अखिलेंद्र, शंकरदेव, कैलाश कुमार और वीरपाल ने मारपीट की। करीब बीस साल मुकदमा चलने के बाद बुधवार को तीनों अभियुक्तों को एक साल का कारावास की सजा सुनाइ गई। प्रत्येक अभियुक्त पर दो दो हजार का जुर्माना भी डाला गया है।
दूसरे मामले में कोतवाली बिसौली क्षेत्र के गांव निजरा निवासी मुन्नी देवी पत्नी रुकुम सिंह ने वर्ष 2010 में परिवाद दायर किया था। इसमें आरोप लगाया कि उसके पति की मौत सड़क दुर्घटना में हुई थी। इसके बाद सास बसंती, ससुर बांदू सिंह, देवर उरमान और राजेंद्र, राजवीर दूसरी शादी का दबाव बनाने लगे। मुन्नी देवी ने शादी से इंकार कर दिया तो सभी ने उसे पीटा और जान से मारने की धमकी भी दी। परेशान होकर जब मुन्नी थाने गई तब उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इस पर उसने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया। सात साल मुकदमा चलने के बाद बुधवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट शांभवी यादव ने प्रत्येक को 2500 रुपये जुर्माने से दंडित किया।
उघैती थाना क्षेत्र के गांव करियामई निवासी नारायण हरि पुत्र महेंद्र ने 1997 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने घर में खाना खा रहा था। तभी अचानक परिवार के ही अखिलेंद्र, शंकरदेव, कैलाश कुमार और वीरपाल ने मारपीट की। करीब बीस साल मुकदमा चलने के बाद बुधवार को तीनों अभियुक्तों को एक साल का कारावास की सजा सुनाइ गई। प्रत्येक अभियुक्त पर दो दो हजार का जुर्माना भी डाला गया है।
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दूसरे मामले में कोतवाली बिसौली क्षेत्र के गांव निजरा निवासी मुन्नी देवी पत्नी रुकुम सिंह ने वर्ष 2010 में परिवाद दायर किया था। इसमें आरोप लगाया कि उसके पति की मौत सड़क दुर्घटना में हुई थी। इसके बाद सास बसंती, ससुर बांदू सिंह, देवर उरमान और राजेंद्र, राजवीर दूसरी शादी का दबाव बनाने लगे। मुन्नी देवी ने शादी से इंकार कर दिया तो सभी ने उसे पीटा और जान से मारने की धमकी भी दी। परेशान होकर जब मुन्नी थाने गई तब उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इस पर उसने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया। सात साल मुकदमा चलने के बाद बुधवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट शांभवी यादव ने प्रत्येक को 2500 रुपये जुर्माने से दंडित किया।
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