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सिविल लाइन बना बिजली थाना, तीन दिन में सौ मुकदमे
Updated Fri, 03 Nov 2017 11:27 PM IST
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Crime
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बदायूं। शासन स्तर पर बिजली चोरी के मुकदमें दर्ज करने की केंद्रीयकृत व्यवस्था करते हुए जिले के सिविल लाइंस थाने को बिजली थाना घोषित किया गया है। एक नवंबर से जिले भर के बिजली चोरी के सारे केस यहां दर्ज होने लगे हैं। तीन दिन में सौ से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं। इनकी लिखापढ़ी करते हुए मुंशियों के हाथ दर्द करने लगे हैं।
बिजली विभाग के अधिकारियों का दर्द था कि थानों में बिजली चोरी की रिपोर्ट दर्ज नहीं होती हैं। इसके लिए संबंधित जेई को थानेदारों के नखरे झेलने पड़ते हैं। कई-कई दिन वह थानों में चक्कर लगाते हैं। प्रदेश भर की इस समस्या का समाधान डीजीपी ने हाल ही में जारी किए आदेश से कर दिया है। उन्होंने हर जिले में एक थाने को बिजली थाना घोषित करने के निर्देश दिए। निर्देश था कि सारे जिले के बिजली चोरी के मुकदमे एक थाने में दर्ज हों और इनकी विवेचना क्राइम ब्रांच के एक अधिकृत निरीक्षक से कराई जाए। इस कड़ी में बदायूं जिले के ऐसे केस दर्ज करने के लिए सिविल लाइंस को बिजली थाना घोषित किया गया है। एक नवंबर को 35, दो को 50 मुकदमे यहां दर्ज हुए थे। इसी कड़ी में तीन नवंबर को देर शाम तक 20 केस दर्ज हो चुके थे। करीब 25 तहरीर तैयार पड़ी थीं जिन पर मुकदमे लिखे जाने थे। केस दर्ज करने वाले बता रहे थे कि टाइपिंग करते करते उनके हाथ दुख गए हैं, पर काम खत्म नहीं होने में आ रहा। वह लोग लगातार काम कर रहे हैं।
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इकलौते विवेचक की आएगी मुसीबत
थाने में सिर्फ केस दर्ज करने का काम होना है। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर रघुराज सिंह को इन मामलों की विवेचना करनी है। ऐसे में जब थाने का स्टाफ परेशान है तो इंस्पेक्टर को तो बहुत लिखापढ़ी करनी होगी। अब तक के हरेक मुकदमे की जांच का एक पर्चा भी काटा तो सौ पर्चे उन्हें काटने होंगे। ऐसे में उनकी टेंशन भी बढ़ने जा रही है।
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वर्जन
शासन और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर प्राथमिकता से बिजली चोरी के केस दर्ज किए जा रहे हैं। फिलहाल तो हमने अपने स्टाफ को बिजली चोरी के मामले दर्ज करने में लगा रखा है। जरूरत पर अतिरिक्त मुंशी भी लगा रहे हैं। थाने के बाकी काम भी प्रभावित हुए हैं।
- देवेश सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस
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बिजली विभाग के अधिकारियों का दर्द था कि थानों में बिजली चोरी की रिपोर्ट दर्ज नहीं होती हैं। इसके लिए संबंधित जेई को थानेदारों के नखरे झेलने पड़ते हैं। कई-कई दिन वह थानों में चक्कर लगाते हैं। प्रदेश भर की इस समस्या का समाधान डीजीपी ने हाल ही में जारी किए आदेश से कर दिया है। उन्होंने हर जिले में एक थाने को बिजली थाना घोषित करने के निर्देश दिए। निर्देश था कि सारे जिले के बिजली चोरी के मुकदमे एक थाने में दर्ज हों और इनकी विवेचना क्राइम ब्रांच के एक अधिकृत निरीक्षक से कराई जाए। इस कड़ी में बदायूं जिले के ऐसे केस दर्ज करने के लिए सिविल लाइंस को बिजली थाना घोषित किया गया है। एक नवंबर को 35, दो को 50 मुकदमे यहां दर्ज हुए थे। इसी कड़ी में तीन नवंबर को देर शाम तक 20 केस दर्ज हो चुके थे। करीब 25 तहरीर तैयार पड़ी थीं जिन पर मुकदमे लिखे जाने थे। केस दर्ज करने वाले बता रहे थे कि टाइपिंग करते करते उनके हाथ दुख गए हैं, पर काम खत्म नहीं होने में आ रहा। वह लोग लगातार काम कर रहे हैं।
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इकलौते विवेचक की आएगी मुसीबत
थाने में सिर्फ केस दर्ज करने का काम होना है। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर रघुराज सिंह को इन मामलों की विवेचना करनी है। ऐसे में जब थाने का स्टाफ परेशान है तो इंस्पेक्टर को तो बहुत लिखापढ़ी करनी होगी। अब तक के हरेक मुकदमे की जांच का एक पर्चा भी काटा तो सौ पर्चे उन्हें काटने होंगे। ऐसे में उनकी टेंशन भी बढ़ने जा रही है।
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शासन और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर प्राथमिकता से बिजली चोरी के केस दर्ज किए जा रहे हैं। फिलहाल तो हमने अपने स्टाफ को बिजली चोरी के मामले दर्ज करने में लगा रखा है। जरूरत पर अतिरिक्त मुंशी भी लगा रहे हैं। थाने के बाकी काम भी प्रभावित हुए हैं।
- देवेश सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस