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गर्दन बचाने को बाबू का नया कारनामा, एआरटीओ के नाम से दे आया तहरीर

Mon, 02 May 2022 12:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 02 May 2022 12:27 AM IST
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crime
बदायूं। एआरटीओ कार्यालय में हुए फर्जीबाड़े में रोज नए कारनामे सामने आ रहे हैं। जिस चहेते बाबू की गर्दन बचाने को एआरटीओ प्रशासन बरेली से लखनऊ तक जतन कर रहे हैं उसने दोबारा से एआरटीओ को फंसाने का इंतजाम कर दिया है। उसने बाइक ट्रांसफर कराने वाले के खिलाफ एआरटीओ के नाम से ही तहरीर दे दी। भला हुआ जो पुलिस ने अस्पष्ट नाम पते के चक्कर में रिपोर्ट नहीं लिखी। मामला संज्ञान में आने पर एआरटीओ हैरत में हैं और बाबू को नया नोटिस देने का दावा कर रहे हैं।
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आरोप है कि एआरटीओ कार्यालय के बाबू ने कबूलपुरा निवासी मृतक को कार्यालय में उपस्थित दिखाकर उसके नाम की बाइक उसके भाई को ट्रांसफर कर दी थी। इतना ही नहीं बाबू ने मृतक को विक्रेता और उसके भाई को क्रेता दिखाकर उनके फोटो पर हस्ताक्षर भी किए थे। उस फाइल पर एआरटीओ प्रशासन आरबी गुप्ता ने भी हस्ताक्षर किए थे।
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जब अमर उजाला ने इस फर्जीबाड़े का खुलासा किया तो एआरटीओ कार्यालय में खलबली मच गई। दोषी के खिलाफ कार्रवाई की बजाय अधिकारी मामला निपटाने की कोशिश में लग गए, जिसकी वजह से उन्हें खुद भी बरेली तलब होकर सफाई देनी पड़ी। मामले की पूरी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जा चुकी है।
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इसके बावजूद एआरटीओ कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी मामला दबाने की कोशिश में हैं। नया शिगूफा ये हुआ कि अब बाइक ट्रांसफर कराने वाले को ही फंसाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। सिविल लाइंस थाने में एक तहरीर एआरटीओ पदनाम से देकर क्रेता पर रिपोर्ट कराने का अनुरोध किया गया। इंस्पेक्टर आरके तिवारी ने इस पर स्पष्ट नाम व पता न होने की वजह से रिपोर्ट नहीं लिखी और दूसरी तहरीर देने को कहा। रविवार को एआरटीओ प्रशासन को यह जानकारी हुई कि संबंधित बाबू ने उनके नाम से ही तहरीर दी है। अब वह बाबू को दूसरा नोटिस देने की बात कह रहे हैं। जाहिर है कि एआरटीओ के नाम से रिपोर्ट कराने पर एआरटीओ सीधे एक पक्ष बन जाते और बाबू का रोल पीछे हो जाता।
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संबंधित लिपिक ने मुझे बताया था कि वह क्रेता के खिलाफ तहरीर देना चाहता है तो मैंने उसे सहमति दे दी। मुझे नहीं पता था कि वह मेरे पद्नाम से तहरीर दे आया है। यह सरासर गलत है। बाबू को नया नोटिस देंगे। उस मामले में भी प्रारंभिक गलती बाबू की ही है।

- आरबी गुप्ता, एआरटीओ प्रशासन
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हमें एआरटीओ के यहां से एक तहरीर मिली है। उस पर अस्पष्ट सा पद्नाम लिखा है। हमने तहरीर देने वाले से कहा था कि स्पष्ट नाम, पता व पद के साथ तहरीर लाएं तब रिपोर्ट लिखेंगे।
- आरके तिवारी, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस
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