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आचार संहिता की आड़ में वसूली पर दरोगा, दो सिपाही लाइनहाजिर
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बदायूं। कुंवरगांव थाने के दरोगा लक्ष्मण प्रसाद, सिपाही मोनू और गौरव टाइटलर को एसएसपी ने लाइन हाजिर कर दिया है। आरोप है कि बरेली के रामनगर क्षेत्र के गांव आलमपुर की प्रधान सुनीता के पति ओमेंद्र सिंह की स्कार्पियो गाड़ी रोककर इन लोगों ने आचार संहिता का डर दिखाकर पांच हजार रुपये वसूल लिए और बाकी रकम एक व्यक्ति के खाते में पेटीएम करा दी। सीओ सिटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। इसकी रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी जाएगी, किसी और का दोष मिला तो उस पर भी कार्रवाई हो सकती है।
वाकया 13 जनवरी की रात का है। रामनगर ब्लॉक की प्रधान सुनीता और उनके प ति ओमेंद्र सिंह उझानी रिश्तेदारी में आए थे। अपनी स्कार्पियो गाड़ी से वह वापस घर लौट रहे थे। ओमेंद्र का रिश्ते का साला हेमंत भी उनके साथ था। आरोप है कि रास्ते में कुंवरगांव थाने के पास दरोगा लक्ष्मण प्रसाद, सिपाही गौरव टाइटलर व मोनू खड़े थे। ओमेंद्र ने किसी काम से गाड़ी रोकी तो तीनों पुलिसकर्मी गाड़ी पर लगे झंडे की वीडियो बनाने लगे। वजह पूछने पर आचार संहिता का हवाला दिया।
आरोप है कि कुछ देर बाद तीनों ने गाड़ी में स्मैक दिखाकर तीनों को जेल भेजने की धमकी दी। विरोध किया तो प्रधान व उनके भाई को गाड़ी में बंद करके चाबी निकाल ली और प्रधान के पति से 20 हजार रुपये मांगे। दस हजार में सौदा हुआ और इन लोगों के पास मौजूद पांच हजार रुपये ले लिए। बाकी पांच हजार रुपये इन पुलिसकर्मियों ने एक युवक के खाते में डलवा दिए और उनको जाने दिया।
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अगले दिन पीड़ित पक्ष ने एडीजी बरेली जोन से मिलकर शिकायत की। घटनाक्रम बताने के साथ ही इससे जुड़े साक्ष्य भी दिखाए। एडीजी ने एसएसपी को निर्देश दिए तो उन्होंने सीओ सिटी आलोक मिश्रा को जांच सौंप दी। आरोपियों के बयान भी दर्ज कराए गए। सीओ सिटी ने शुरुआती जांच में पुलिसकर्मियों को दोषी माना। उनकी रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने दरोगा समेत दोनों सिपाहियों को लाइन हाजिर किया है।
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कुंवरगांव थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति द्वारा तीन पुलिस कर्मियों पर पैसे लेकर गाड़ी छोड़ने का आरोप लगाया गया था। इस पर एसएसपी द्वारा सीओ सिटी को जांच दी गई थी। सीओ सिटी द्वारा जांच रिपोर्ट एसएसपी को सौंपी गई। इसमें प्रथम दृष्टत: तीनों पुलिसकर्मियों को दोषी पाते हुए तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन संबद्ध कर दिया गया है और विभागीय कार्रवाई का आदेश दे दिया गया है।
- प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी
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वाकया 13 जनवरी की रात का है। रामनगर ब्लॉक की प्रधान सुनीता और उनके प ति ओमेंद्र सिंह उझानी रिश्तेदारी में आए थे। अपनी स्कार्पियो गाड़ी से वह वापस घर लौट रहे थे। ओमेंद्र का रिश्ते का साला हेमंत भी उनके साथ था। आरोप है कि रास्ते में कुंवरगांव थाने के पास दरोगा लक्ष्मण प्रसाद, सिपाही गौरव टाइटलर व मोनू खड़े थे। ओमेंद्र ने किसी काम से गाड़ी रोकी तो तीनों पुलिसकर्मी गाड़ी पर लगे झंडे की वीडियो बनाने लगे। वजह पूछने पर आचार संहिता का हवाला दिया।
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आरोप है कि कुछ देर बाद तीनों ने गाड़ी में स्मैक दिखाकर तीनों को जेल भेजने की धमकी दी। विरोध किया तो प्रधान व उनके भाई को गाड़ी में बंद करके चाबी निकाल ली और प्रधान के पति से 20 हजार रुपये मांगे। दस हजार में सौदा हुआ और इन लोगों के पास मौजूद पांच हजार रुपये ले लिए। बाकी पांच हजार रुपये इन पुलिसकर्मियों ने एक युवक के खाते में डलवा दिए और उनको जाने दिया।
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अगले दिन पीड़ित पक्ष ने एडीजी बरेली जोन से मिलकर शिकायत की। घटनाक्रम बताने के साथ ही इससे जुड़े साक्ष्य भी दिखाए। एडीजी ने एसएसपी को निर्देश दिए तो उन्होंने सीओ सिटी आलोक मिश्रा को जांच सौंप दी। आरोपियों के बयान भी दर्ज कराए गए। सीओ सिटी ने शुरुआती जांच में पुलिसकर्मियों को दोषी माना। उनकी रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने दरोगा समेत दोनों सिपाहियों को लाइन हाजिर किया है।
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कुंवरगांव थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति द्वारा तीन पुलिस कर्मियों पर पैसे लेकर गाड़ी छोड़ने का आरोप लगाया गया था। इस पर एसएसपी द्वारा सीओ सिटी को जांच दी गई थी। सीओ सिटी द्वारा जांच रिपोर्ट एसएसपी को सौंपी गई। इसमें प्रथम दृष्टत: तीनों पुलिसकर्मियों को दोषी पाते हुए तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन संबद्ध कर दिया गया है और विभागीय कार्रवाई का आदेश दे दिया गया है।
- प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी