{"_id":"61439d468ebc3eb4da776d50","slug":"crime-badaun-news-bly459853813","type":"story","status":"publish","title_hn":"आत्महत्या कर चुके शख्स पर ठहरी सीबीआई की जांच की सुई, कई सवाल उठे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आत्महत्या कर चुके शख्स पर ठहरी सीबीआई की जांच की सुई, कई सवाल उठे
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बदायूं। शहर के कटरा ब्राह्मपुर मोहल्ले में गुप्ता दंपती हत्याकांड के मामले में सीबीआई की जांच तीन साल पहले आत्महत्या कर चुके उदय प्रकाश वर्मा पर ठहर गई है। हालांकि अब तक मामले का खुलासा नहीं हुआ है लेकिन जो तथ्य सामने आ रहे हैं उससे माना जा रहा है कि उदय लूट के इरादे से घर में घुसा था और उसने गुप्ता दंपती की हत्या कर दी। ऐसे में लोगों का कहना है कि उदय के जीवित रहते यह सवाल क्यों नहीं उठाए गए। मरने के बाद उसे दोषी ठहराना कई सवाल खड़े कर रहा है।
गुप्ता दंपती हत्याकांड की जांच कोतवाली पुलिस ने की थी। जो तथ्य सामने आए थे। उसमें कहीं लूट का जिक्र नहीं हुआ। पुलिस मानती रही कि हत्यारे केवल हत्या के इरादे से घुसे थे। पुलिस ये भी मान रही थी कि हत्यारे दो से ज्यादा हो सकते थे। पुलिस खुलासा करती उससे पहले मामला सीबीआई को चला गया। सीबीआई शुरू में पुलिस के पैटर्न पर चली। बाद में तमाम लोगों के बयान दर्ज किए। परिवार समेत 63 लोगों के ब्लड सैंपल लिए। पांच साल की छानबीन में अब सीबीआई जांच की सुई गुप्ता दंपती के पड़ोसी उदय प्रकाश वर्मा आ टिकी है। उदय जनवरी 2018 में फंदे से लटककर जान दे चुका है। वह दवा कारोबारी था। वह कंपनी से दवाएं खरीदकर सप्लाई करता था। दो दिन पहले सीबीआई ने उसके घर की तलाशी ली। इस दौरान दो कपड़े, एक चाकू, कुछ फोटो और कागज बरामद होना दिखाए गए। माना जा रहा है उदय घर में लूट के लिए घुसा था और उसने गुप्ता दंपती की हत्या कर दी। जब ये बातें मोहल्ले और परिवार को पता चलीं हैं तब से सीबीआई की कहानी उनके गले से नहीं उतर रही है। तमाम ऐसे सवाल सामने आ रहे हैं जिनका जवाब ढूंढना मुश्किल हो रहा है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पेचकस से बताई हत्या, बरामद किया चाकू
दंपती हत्याकांड में पोस्टमार्टम से लेकर पुलिस की जांच और सीबीआई की जांच में भी आला कत्ल के रूप में पेचकस का जिक्र था। दावा था कि हत्या पेचकस से की गई थी। आला कत्ल में पेचकस और पुराने मोबाइल को कोर्ट में पेश किया गया था लेकिन दो दिन पहले जिस तरह एक चाकू बरामद होना दिखाया जा रहा है। इससे कई सवाल सामने आ रहे हैं।
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तीन जगह का सर्च वारंट लेकर आई थी सीबीआई
तीन दिन पहले बदायूं आई सीबीआई तीन जगह के सर्च वारंट लेकर आई थी। इसमें एक उदय का, दूसरा उसके मझले भाई हल्द्वानी निवासी योगेश व तीसरा बरेली निवासी भाई मुकेश का था। सीबीआई ने तीनों जगह जाकर तलाशी ली।
20 को दर्ज होंगे भाई के बयान
गुप्ता दंपती हत्याकांड में केवल उदय ही नहीं उनके भाई योगेश और मुकेश पर भी सीबीआई की निगाह है। सीबीआई के अधिकारियों ने योगेश को 20 सितंबर को अपने बयान दर्ज कराने के लिए लखनऊ बुलाया है।
...तो लूट नहीं हत्या था मकसद
गुप्ता दंपती हत्याकांड में जब दंपती के शव मिले थे तब ब्रजेंद्र गुप्ता के हाथ में सोने की अंगूठी और पत्नी शन्नो भी सोने की अंगूठियां पहने थीं। इससे पुलिस ने माना था कि अगर लूट का इरादा होता, तो हत्यारे जेवर जरूर ले जाते लेकिन सीबीआई की जांच लूट के बाद हत्या की ओर जा रही है।
उदय बना आरोपी तो मुकुल गुप्ता के हत्यारोपियों को मिलेगा फायदा
अगर सीबीआई जांच में उदय प्रकाश वर्मा हत्यारोपी साबित होता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा मुकुल गुप्ता के हत्यारोपियों को मिलेगा। मुकुल गुप्ता दंपती के बेटे थे। पुलिस ने उन्हें बरेली सीबीगंज इलाके में रिक्शे से उतारकर गोली मार दी थी। पुलिस ने बदमाश बताकर एनकाउंटर करना बताया था। इसमें गोरखपुर के मौजूदा आईजी जे रविंद्र गौड़ समेत 11 पुलिसकर्मियों के नाम थे। जांच में यह फर्जी एनकाउंटर साबित हुआ। मुआवजे के तौर पर दंपती को रकम दी गई लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था। कहा था कि वह रकम नहीं लेंगे। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो। कार्रवाई से पहले दंपती की हत्या कर दी गई।
योगेश बोले-मर चुका है भाई, दोषी ठहराओ या निर्दोष क्या फर्क पड़ता है
- उदय के भाई योगेश ने बताया कि उनके भाई की मौत हो चुकी है। अब इससे क्या फर्क पड़ता है कि वह दोषी थे या निर्दोष। लेकिन ये बात जरूर कहेंगे कि वह दंपती की हत्या नहीं कर सकते। कद काठी के अनुसार वह ब्रजेंद्र गुप्ता के आगे कुछ नहीं थे। सही जवाब उनके भाई ही दे सकते थे। जीवित रहते उनसे किसी ने पूछा नहीं। जबकि दंपती की हत्या के तीन-चार साल बाद उनकी मौत हुई थी।
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गुप्ता दंपती हत्याकांड की जांच कोतवाली पुलिस ने की थी। जो तथ्य सामने आए थे। उसमें कहीं लूट का जिक्र नहीं हुआ। पुलिस मानती रही कि हत्यारे केवल हत्या के इरादे से घुसे थे। पुलिस ये भी मान रही थी कि हत्यारे दो से ज्यादा हो सकते थे। पुलिस खुलासा करती उससे पहले मामला सीबीआई को चला गया। सीबीआई शुरू में पुलिस के पैटर्न पर चली। बाद में तमाम लोगों के बयान दर्ज किए। परिवार समेत 63 लोगों के ब्लड सैंपल लिए। पांच साल की छानबीन में अब सीबीआई जांच की सुई गुप्ता दंपती के पड़ोसी उदय प्रकाश वर्मा आ टिकी है। उदय जनवरी 2018 में फंदे से लटककर जान दे चुका है। वह दवा कारोबारी था। वह कंपनी से दवाएं खरीदकर सप्लाई करता था। दो दिन पहले सीबीआई ने उसके घर की तलाशी ली। इस दौरान दो कपड़े, एक चाकू, कुछ फोटो और कागज बरामद होना दिखाए गए। माना जा रहा है उदय घर में लूट के लिए घुसा था और उसने गुप्ता दंपती की हत्या कर दी। जब ये बातें मोहल्ले और परिवार को पता चलीं हैं तब से सीबीआई की कहानी उनके गले से नहीं उतर रही है। तमाम ऐसे सवाल सामने आ रहे हैं जिनका जवाब ढूंढना मुश्किल हो रहा है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पेचकस से बताई हत्या, बरामद किया चाकू
दंपती हत्याकांड में पोस्टमार्टम से लेकर पुलिस की जांच और सीबीआई की जांच में भी आला कत्ल के रूप में पेचकस का जिक्र था। दावा था कि हत्या पेचकस से की गई थी। आला कत्ल में पेचकस और पुराने मोबाइल को कोर्ट में पेश किया गया था लेकिन दो दिन पहले जिस तरह एक चाकू बरामद होना दिखाया जा रहा है। इससे कई सवाल सामने आ रहे हैं।
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तीन जगह का सर्च वारंट लेकर आई थी सीबीआई
तीन दिन पहले बदायूं आई सीबीआई तीन जगह के सर्च वारंट लेकर आई थी। इसमें एक उदय का, दूसरा उसके मझले भाई हल्द्वानी निवासी योगेश व तीसरा बरेली निवासी भाई मुकेश का था। सीबीआई ने तीनों जगह जाकर तलाशी ली।
20 को दर्ज होंगे भाई के बयान
गुप्ता दंपती हत्याकांड में केवल उदय ही नहीं उनके भाई योगेश और मुकेश पर भी सीबीआई की निगाह है। सीबीआई के अधिकारियों ने योगेश को 20 सितंबर को अपने बयान दर्ज कराने के लिए लखनऊ बुलाया है।
...तो लूट नहीं हत्या था मकसद
गुप्ता दंपती हत्याकांड में जब दंपती के शव मिले थे तब ब्रजेंद्र गुप्ता के हाथ में सोने की अंगूठी और पत्नी शन्नो भी सोने की अंगूठियां पहने थीं। इससे पुलिस ने माना था कि अगर लूट का इरादा होता, तो हत्यारे जेवर जरूर ले जाते लेकिन सीबीआई की जांच लूट के बाद हत्या की ओर जा रही है।
उदय बना आरोपी तो मुकुल गुप्ता के हत्यारोपियों को मिलेगा फायदा
अगर सीबीआई जांच में उदय प्रकाश वर्मा हत्यारोपी साबित होता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा मुकुल गुप्ता के हत्यारोपियों को मिलेगा। मुकुल गुप्ता दंपती के बेटे थे। पुलिस ने उन्हें बरेली सीबीगंज इलाके में रिक्शे से उतारकर गोली मार दी थी। पुलिस ने बदमाश बताकर एनकाउंटर करना बताया था। इसमें गोरखपुर के मौजूदा आईजी जे रविंद्र गौड़ समेत 11 पुलिसकर्मियों के नाम थे। जांच में यह फर्जी एनकाउंटर साबित हुआ। मुआवजे के तौर पर दंपती को रकम दी गई लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था। कहा था कि वह रकम नहीं लेंगे। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो। कार्रवाई से पहले दंपती की हत्या कर दी गई।
योगेश बोले-मर चुका है भाई, दोषी ठहराओ या निर्दोष क्या फर्क पड़ता है
- उदय के भाई योगेश ने बताया कि उनके भाई की मौत हो चुकी है। अब इससे क्या फर्क पड़ता है कि वह दोषी थे या निर्दोष। लेकिन ये बात जरूर कहेंगे कि वह दंपती की हत्या नहीं कर सकते। कद काठी के अनुसार वह ब्रजेंद्र गुप्ता के आगे कुछ नहीं थे। सही जवाब उनके भाई ही दे सकते थे। जीवित रहते उनसे किसी ने पूछा नहीं। जबकि दंपती की हत्या के तीन-चार साल बाद उनकी मौत हुई थी।