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नगर पंचायत अध्यक्ष के पति समेत दस के खिलाफ एफआईआर
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कुंवरगांव (बदायूं)। पुलिस ने कुंवरगांव नगर पंचायत अध्यक्ष शीतल गुप्ता के पति संजय गुप्ता समेत दस लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। उन पर ग्राम देवता की जमीन अवैध रूप से कब्जाने और पुजारी से मारपीट करने का आरोप है।
कुंवरगांव कस्बे के वार्ड नंबर चार निवासी पुजारी सैदू सिंह के मुताबिक उनके वार्ड में ग्राम देवता का मंदिर है। इस मंदिर के नाम 0.3040 हेक्टेअर जमीन खाली पड़ी है। इस पर नगर पंचायत अध्यक्ष शीतल गुप्ता के पति संजय गुप्ता ने कब्जा कर लिया और उसके बाद कस्बे के हरिशंकर, लल्लू, विजय, सुखलाल और देवीराम को प्लाटिंग करके बेच दी। इसके बारे में उन्हें तब पता चला, जब एक माह पहले 31 जुलाई को ये लोग उस जमीन पर निर्माण कराने पहुंचे। इसकी सूचना मिलने पर पहुंचे सैदू सिंह ने निर्माण का विरोध किया। आरोपियों ने उनके साथ जमकर मारपीट की। इसमें उनके गंभीर चोटें भी आईं।
इसकी सूचना देने पर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई, लेकिन संजय गुप्ता के कहने पर पुलिस उल्टे सैदू सिंह को पकड़कर ले गई थी। पांच घंटे तक उन्हें थाने में बैठाए रखा। मरहम पट्टी तो दूर उनका मेडिकल परीक्षण तक नहीं कराया गया। बाद में जबरन फैसलानामा लिखवाकर लिया गया। इसके बाद उन्हें छोड़ा गया। दूसरे दिन उन्होंने तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने दबाव में आकर कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली। बुधवार को पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर संजय गुप्ता समेत सभी दस लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
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कुंवरगांव कस्बे के वार्ड नंबर चार निवासी पुजारी सैदू सिंह के मुताबिक उनके वार्ड में ग्राम देवता का मंदिर है। इस मंदिर के नाम 0.3040 हेक्टेअर जमीन खाली पड़ी है। इस पर नगर पंचायत अध्यक्ष शीतल गुप्ता के पति संजय गुप्ता ने कब्जा कर लिया और उसके बाद कस्बे के हरिशंकर, लल्लू, विजय, सुखलाल और देवीराम को प्लाटिंग करके बेच दी। इसके बारे में उन्हें तब पता चला, जब एक माह पहले 31 जुलाई को ये लोग उस जमीन पर निर्माण कराने पहुंचे। इसकी सूचना मिलने पर पहुंचे सैदू सिंह ने निर्माण का विरोध किया। आरोपियों ने उनके साथ जमकर मारपीट की। इसमें उनके गंभीर चोटें भी आईं।
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इसकी सूचना देने पर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई, लेकिन संजय गुप्ता के कहने पर पुलिस उल्टे सैदू सिंह को पकड़कर ले गई थी। पांच घंटे तक उन्हें थाने में बैठाए रखा। मरहम पट्टी तो दूर उनका मेडिकल परीक्षण तक नहीं कराया गया। बाद में जबरन फैसलानामा लिखवाकर लिया गया। इसके बाद उन्हें छोड़ा गया। दूसरे दिन उन्होंने तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने दबाव में आकर कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली। बुधवार को पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर संजय गुप्ता समेत सभी दस लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
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