{"_id":"5d9e2b0e8ebc3e016308fa43","slug":"crime-badaun-news-bly379465476","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरोपी नायब तहसीलदार से बयान लिखवाना किसी के गले नहीं उतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरोपी नायब तहसीलदार से बयान लिखवाना किसी के गले नहीं उतरा
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सहसवान (बदायूं)। तहसील के लॉकअप में हालात बिगड़ने पर इलाज के लिए ले जाते समय बकायेदार ब्रजपाल की मौत के मामले की जांच एडीएम प्रशासन रामनिवास शर्मा ने शुरू कर दी है, लेकिन यह जांच अब अपने आप में ही सवाल खड़े कर रही है। दरअसल, उन्होंने बुधवार को बयान दर्ज करने के लिए उस नायब तहसीलदार राजकुमार को बुलाया, जो आरोपी बताए गए थे। नायब तहसीलदार ने कई लोगों के बयान लिखे। ऐसे में माना जा रहा है कि जिला प्रशासन जान बूझकर जांच परिवर्तन करने के प्रयास में है।
एडीएम प्रशासन रामनिवास शर्मा बुधवार सुबह करीब 11 बजे तहसील पहुंच गए थे। सबसे पहले उन्होंने ब्रजपाल के साथ लॉकअप में बंद रहे बकायेदार हीरालाल, हुक्मी और शायक अली के बयान दर्ज कराए। खास बात ये रही कि ब्रजपाल के मामले में मुख्य आरोपी नायब तहसीलदार राजकुमार ने तीनों बकायेदारों के बयान दर्ज किए। यहां बता दें कि ब्रजपाल की मौत के बाद वायरल हुए वीडियो में भी उसके द्वारा नायब तहसीलदार और अमीन आशाराम को उसके उत्पीड़न का जिम्मेदार बताया गया था।
इधर अल्लीपुर शेखपुर निवासी हुक्मी पुत्र नत्थू ने अपने बयान में लिखवाया कि उसे मजिस्ट्रेटी जांच होने की सूचना समाचार पत्र से लगी, जिससे वह बयान दर्ज कराने चला आया। उसने बताया कि लॉकअप का ताला खोलकर ब्रजपाल को अस्पताल ले जाया गया था, तो वहीं जरीफनगर निवासी हीरालाल पुत्र धर्मवीर ने बताया कि तहसील की हवालात में अंग्रेजी शराब का पौआ पहुंचा था। उसने ब्रजपाल को शराब पीते देखा था। शराब कौन लेकर आया था, इसके बारे में उसे जानकारी नहीं है। इधर बताते हैं कि हुक्मी पढ़ा लिखा नहीं है, ऐसे में उसके द्वारा अखबार पढ़कर जानकारी होना और हीरालाल द्वारा शराब का पौवा पहुंचने की आधी अधूरी बात बताना किसी के गले नहीं उतर रहा।
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ये था मामला
जरीफनगर निवासी ब्रजपाल (40) पुत्र ओमपाल पर एक बिजली चोरी के मामले में 81 हजार 947 रुपये बकाया चल रहे थे। तीन नवंबर 2018 को आरसी जारी हुई थी। 23 सितंबर को नायब तहसीलदार राजकुमार और अमीन आशाराम ने ब्रजपाल को पकड़कर हवालात में बंद कर दिया था। तीन अक्तूबर की सुबह अचानक ब्रजपाल की हालत बिगड़ गई थी। करीब दो घंटे बाद ताला तोड़कर उसे बाहर निकाला गया था। जिला अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई थी।
....आखिर कैसे बदल गए बयान
जिस दिन तहसील के लॉकअप ब्रजपाल की हालत बिगड़ी थी, उस दिन हीरालाल पुत्र धर्मवीर, हुक्मी पुत्र नत्थू, शायक अली पुत्र रोनक अली भी साथ में बंद थे। उनकी एक वीडियो भी वायरल हुई थी, जिसमें तीनों लोगों ने कहा था कि ब्रजपाल की हालत सुबह मंजन करते वक्त बिगड़ी थी। सुबह साढ़े नौ बजे ताला तोड़कर ब्रजपाल को लॉकअप से निकाला गया था, लेकिन अब तीनों बोल रहे हैं कि ब्रजपाल को लॉकअप का ताला खोलकर निकाला गया।
भाकियू का प्रदर्शन, जेल भेजे जाएं आरोपी
सहसवान (बदायूं)। ब्रजपाल की मौत के मामले में भारतीय किसान यूनियन ने बुधवार को तहसील गेट पर धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें जेल भेजने की मांग की। भाकियू मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने कहा कि ब्रजपाल मौर्य की मौत का जिम्मेदार तहसील प्रशासन है। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और आरोपियों को जेल भेजा जाए। प्रशासन मामले को दबाने में लगा हुआ है। जिलाध्यक्ष धर्मपाल सिंह ने कहा कि ब्रजपाल के परिवार वालों को 25 लाख का मुआवजा मिलना चाहिए। परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए। वहीं मंडल उपाध्यक्ष चौधरी सौदान सिंह ने कहा कि आरसी ब्रजपाल पुत्र ओमकार की थी, जबकि राजस्व विभाग ने ब्रजपाल पुत्र ओमपाल को बंद कर दिया था, जो कि गलत था। इस दौरान राम कुमार शर्मा, नरेंद्र सक्सेना, नसरीन, कल्लन मियां, कृष्णपाल मौर्य आदि मौजूद रहे।
घबराया तहसील प्रशासन, कराया हवन
ब्रजपाल की मौत के बाद तहसील प्रशासन पूरी तरह घबरा गया है। कुछ अधिकारी इतना डर गए हैं कि उन्हें उम्मीद है कि वह ब्रजपाल की मौत के मामले में कहीं न कहीं लपेटे में आ सकते हैं। इससे बुधवार सुबह तहसील परिसर में हवन का आयोजन किया गया। बाकायदा विधि विधान से पूजा की गई। तहसील का शुद्धिकरण किया गया। इसमें शामिल कर्मचारियों और अधिकारियों ने आहुतियां देकर भगवान से शांति बनी रहे इसकी प्रार्थना की।
डीएम के निर्देश पर मजिस्ट्रेटी जांच करने के लिए गया था। वहां पर लोगों ने अपने-अपने बयान दर्ज कराए हैं। अब उनकी जांच होगी, उसके बाद में ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। वहां पर कोई बयान लिखने वाला नहीं था, इस वजह से नायब तहसीलदार राजकुमार को बुलाया गया था और अपने सामने बयान लिखवाए हैं।
-रामनिवास शर्मा, एडीएम प्रशासन
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एडीएम प्रशासन रामनिवास शर्मा बुधवार सुबह करीब 11 बजे तहसील पहुंच गए थे। सबसे पहले उन्होंने ब्रजपाल के साथ लॉकअप में बंद रहे बकायेदार हीरालाल, हुक्मी और शायक अली के बयान दर्ज कराए। खास बात ये रही कि ब्रजपाल के मामले में मुख्य आरोपी नायब तहसीलदार राजकुमार ने तीनों बकायेदारों के बयान दर्ज किए। यहां बता दें कि ब्रजपाल की मौत के बाद वायरल हुए वीडियो में भी उसके द्वारा नायब तहसीलदार और अमीन आशाराम को उसके उत्पीड़न का जिम्मेदार बताया गया था।
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इधर अल्लीपुर शेखपुर निवासी हुक्मी पुत्र नत्थू ने अपने बयान में लिखवाया कि उसे मजिस्ट्रेटी जांच होने की सूचना समाचार पत्र से लगी, जिससे वह बयान दर्ज कराने चला आया। उसने बताया कि लॉकअप का ताला खोलकर ब्रजपाल को अस्पताल ले जाया गया था, तो वहीं जरीफनगर निवासी हीरालाल पुत्र धर्मवीर ने बताया कि तहसील की हवालात में अंग्रेजी शराब का पौआ पहुंचा था। उसने ब्रजपाल को शराब पीते देखा था। शराब कौन लेकर आया था, इसके बारे में उसे जानकारी नहीं है। इधर बताते हैं कि हुक्मी पढ़ा लिखा नहीं है, ऐसे में उसके द्वारा अखबार पढ़कर जानकारी होना और हीरालाल द्वारा शराब का पौवा पहुंचने की आधी अधूरी बात बताना किसी के गले नहीं उतर रहा।
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ये था मामला
जरीफनगर निवासी ब्रजपाल (40) पुत्र ओमपाल पर एक बिजली चोरी के मामले में 81 हजार 947 रुपये बकाया चल रहे थे। तीन नवंबर 2018 को आरसी जारी हुई थी। 23 सितंबर को नायब तहसीलदार राजकुमार और अमीन आशाराम ने ब्रजपाल को पकड़कर हवालात में बंद कर दिया था। तीन अक्तूबर की सुबह अचानक ब्रजपाल की हालत बिगड़ गई थी। करीब दो घंटे बाद ताला तोड़कर उसे बाहर निकाला गया था। जिला अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई थी।
....आखिर कैसे बदल गए बयान
जिस दिन तहसील के लॉकअप ब्रजपाल की हालत बिगड़ी थी, उस दिन हीरालाल पुत्र धर्मवीर, हुक्मी पुत्र नत्थू, शायक अली पुत्र रोनक अली भी साथ में बंद थे। उनकी एक वीडियो भी वायरल हुई थी, जिसमें तीनों लोगों ने कहा था कि ब्रजपाल की हालत सुबह मंजन करते वक्त बिगड़ी थी। सुबह साढ़े नौ बजे ताला तोड़कर ब्रजपाल को लॉकअप से निकाला गया था, लेकिन अब तीनों बोल रहे हैं कि ब्रजपाल को लॉकअप का ताला खोलकर निकाला गया।
भाकियू का प्रदर्शन, जेल भेजे जाएं आरोपी
सहसवान (बदायूं)। ब्रजपाल की मौत के मामले में भारतीय किसान यूनियन ने बुधवार को तहसील गेट पर धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें जेल भेजने की मांग की। भाकियू मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने कहा कि ब्रजपाल मौर्य की मौत का जिम्मेदार तहसील प्रशासन है। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और आरोपियों को जेल भेजा जाए। प्रशासन मामले को दबाने में लगा हुआ है। जिलाध्यक्ष धर्मपाल सिंह ने कहा कि ब्रजपाल के परिवार वालों को 25 लाख का मुआवजा मिलना चाहिए। परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए। वहीं मंडल उपाध्यक्ष चौधरी सौदान सिंह ने कहा कि आरसी ब्रजपाल पुत्र ओमकार की थी, जबकि राजस्व विभाग ने ब्रजपाल पुत्र ओमपाल को बंद कर दिया था, जो कि गलत था। इस दौरान राम कुमार शर्मा, नरेंद्र सक्सेना, नसरीन, कल्लन मियां, कृष्णपाल मौर्य आदि मौजूद रहे।
घबराया तहसील प्रशासन, कराया हवन
ब्रजपाल की मौत के बाद तहसील प्रशासन पूरी तरह घबरा गया है। कुछ अधिकारी इतना डर गए हैं कि उन्हें उम्मीद है कि वह ब्रजपाल की मौत के मामले में कहीं न कहीं लपेटे में आ सकते हैं। इससे बुधवार सुबह तहसील परिसर में हवन का आयोजन किया गया। बाकायदा विधि विधान से पूजा की गई। तहसील का शुद्धिकरण किया गया। इसमें शामिल कर्मचारियों और अधिकारियों ने आहुतियां देकर भगवान से शांति बनी रहे इसकी प्रार्थना की।
डीएम के निर्देश पर मजिस्ट्रेटी जांच करने के लिए गया था। वहां पर लोगों ने अपने-अपने बयान दर्ज कराए हैं। अब उनकी जांच होगी, उसके बाद में ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। वहां पर कोई बयान लिखने वाला नहीं था, इस वजह से नायब तहसीलदार राजकुमार को बुलाया गया था और अपने सामने बयान लिखवाए हैं।
-रामनिवास शर्मा, एडीएम प्रशासन