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साहब! कोरोना से ज्यादा कोविड अस्पताल की गंदगी डराती है
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बदायूं। साहब! इस अस्पताल की गंदगी कोरोना से ज्यादा डराती है। यह कहना है शहर के बाईपास स्थित आसरा आवास में बने कोविड हॉस्पिटल (लेवल-1) में भर्ती मरीज राजवीर का। यहां की बदहाली बयां करने वाले राजवीर इकलौते नहीं है। यहां के कमरों में लंबे समय से झाडू नहीं लगी है। शौचालय और बाथरूम की हालत सबसे ज्यादा बदतर है। उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि जैसे सफाई कर्मचारी कभी इनमें घुसे ही नहीं होंगे। ऐसी गंदगी में कोरोना संक्रमित मरीजों के जल्द स्वस्थ होने के बजाय किसी और संक्रमण के चपेट में आने की संभावना है।
कोरोना संक्रमण फैलने की शुरुआत में उझानी स्वास्थ्य केंद्र को लेवल-1 का कोविड हॉस्पिटल बनाया गया था। जब तक मरीजों की संख्या दो-चार निकलती रही, तब तक कोरोना पॉजिटिव मरीजों को उझानी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया जाता रहा लेकिन कोरोना पॉजिटिव मरीजों का ग्राफ बढ़ने लगा तो उझानी स्वास्थ्य केंद्र छोटा पड़ गया। इसके साथ ही उसमें अव्यवस्थाएं हावी हो गईं। वहां मरीजों को खाने-पीने से लेकर साफ-सफाई से संबंधित तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ा। रोजाना मरीजों ने शिकायत की। कोविड हॉस्पिटल में मरीजों ने प्रदर्शन तक किया। तब थकहार कर जिला प्रशासन ने उसे बंद कराया और आसरा आवास में व्यवस्था शुरू कराई। उस समय कहा गया था कि यहां व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जाएंगी तो मरीजों को दोबारा यहां भर्ती किया जाएगा।
आज उझानी स्वास्थ्य केंद्र से ज्यादा बुरी हालत आसरा आवास की है। यहां मुख्य समस्या गंदगी की है। आसरा आवास में भले ही गेट पर झाडू लगाई जा रही हो लेकिन अंदर कमरों की हालत बदहाल हो चुकी है। लंबे समय से कमरों में झाडू नहीं लगी है। जीना, शौचालय और बाथरूम में महीनों से सफाई नहीं हुई है। शौचालयों में पानी व्यवस्था तक खराब है। उनमें दुर्गंध की वजह से लोगों का बैठना तक दूभर है।
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अधिकारी बाहर से लेते हैं जायजा, कर्मचारी उठा रहे फायदा
कोविड हॉस्पिटल में तैनात कर्मचारियों की मौज है। उन्हें न तो कोरोना पॉजिटिव के नजदीक जाना है और न उनके साथ बैठना है। पॉजिटिव एक बार कमरे में पहुंच गए तो पंद्रह दिन तक बाहर आने की इजाजत नहीं है। उनके कमरों में क्या व्यवस्था है, क्या साफ-सफाई है। अधिकारी बाहर से ही जायजा ले लेते हैं। किसी भी अधिकारी ने बाथरूम की हालत नहीं देखी। वह अंदर जाएंगे नहीं, उन्हें कुछ पता चलेगा नहीं, तो कर्मचारी भी आराम से ड्यूटी कर रहे हैं।
आसरा आवास में सात बजे के बाद नहीं मिलता खाना
भोजन के मामले में आसरा आवास के नियम बिल्कुल सख्त हैं। यहां जेल से भी कड़ा कानून है। मरीजों को सात बजे के बाद खाना नहीं मिलता। फिर चाहे मरीज साढ़े सात बजे आया हो या आठ बजे, उसे आसरा आवास में भूखा ही सोना पड़ेगा। शुक्रवार रात करीब आठ बजे दहगवां से चार मरीज आए थे। पहले डॉक्टर से भोजन देने को कहा गया। उन्होंने कहा कि लेट हो गए। सुबह खाना मिलेगा। जब ये मामला डीएम कुमार प्रशांत के पास पहुंचा तो उन्होंने संबंधित को कड़े शब्दों में चेतावनी दी, तब कहीं जाकर मरीजों को खाना दिया गया।
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कोरोना संक्रमण फैलने की शुरुआत में उझानी स्वास्थ्य केंद्र को लेवल-1 का कोविड हॉस्पिटल बनाया गया था। जब तक मरीजों की संख्या दो-चार निकलती रही, तब तक कोरोना पॉजिटिव मरीजों को उझानी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया जाता रहा लेकिन कोरोना पॉजिटिव मरीजों का ग्राफ बढ़ने लगा तो उझानी स्वास्थ्य केंद्र छोटा पड़ गया। इसके साथ ही उसमें अव्यवस्थाएं हावी हो गईं। वहां मरीजों को खाने-पीने से लेकर साफ-सफाई से संबंधित तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ा। रोजाना मरीजों ने शिकायत की। कोविड हॉस्पिटल में मरीजों ने प्रदर्शन तक किया। तब थकहार कर जिला प्रशासन ने उसे बंद कराया और आसरा आवास में व्यवस्था शुरू कराई। उस समय कहा गया था कि यहां व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जाएंगी तो मरीजों को दोबारा यहां भर्ती किया जाएगा।
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आज उझानी स्वास्थ्य केंद्र से ज्यादा बुरी हालत आसरा आवास की है। यहां मुख्य समस्या गंदगी की है। आसरा आवास में भले ही गेट पर झाडू लगाई जा रही हो लेकिन अंदर कमरों की हालत बदहाल हो चुकी है। लंबे समय से कमरों में झाडू नहीं लगी है। जीना, शौचालय और बाथरूम में महीनों से सफाई नहीं हुई है। शौचालयों में पानी व्यवस्था तक खराब है। उनमें दुर्गंध की वजह से लोगों का बैठना तक दूभर है।
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अधिकारी बाहर से लेते हैं जायजा, कर्मचारी उठा रहे फायदा
कोविड हॉस्पिटल में तैनात कर्मचारियों की मौज है। उन्हें न तो कोरोना पॉजिटिव के नजदीक जाना है और न उनके साथ बैठना है। पॉजिटिव एक बार कमरे में पहुंच गए तो पंद्रह दिन तक बाहर आने की इजाजत नहीं है। उनके कमरों में क्या व्यवस्था है, क्या साफ-सफाई है। अधिकारी बाहर से ही जायजा ले लेते हैं। किसी भी अधिकारी ने बाथरूम की हालत नहीं देखी। वह अंदर जाएंगे नहीं, उन्हें कुछ पता चलेगा नहीं, तो कर्मचारी भी आराम से ड्यूटी कर रहे हैं।
आसरा आवास में सात बजे के बाद नहीं मिलता खाना
भोजन के मामले में आसरा आवास के नियम बिल्कुल सख्त हैं। यहां जेल से भी कड़ा कानून है। मरीजों को सात बजे के बाद खाना नहीं मिलता। फिर चाहे मरीज साढ़े सात बजे आया हो या आठ बजे, उसे आसरा आवास में भूखा ही सोना पड़ेगा। शुक्रवार रात करीब आठ बजे दहगवां से चार मरीज आए थे। पहले डॉक्टर से भोजन देने को कहा गया। उन्होंने कहा कि लेट हो गए। सुबह खाना मिलेगा। जब ये मामला डीएम कुमार प्रशांत के पास पहुंचा तो उन्होंने संबंधित को कड़े शब्दों में चेतावनी दी, तब कहीं जाकर मरीजों को खाना दिया गया।