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बीमा कंपनी को 13.50 लाख रुपये अदा करने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
Updated Fri, 22 Sep 2017 11:35 PM IST
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उपभोक्ता आयोग
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बरेली जिले की तहसील फरीदपुर क्षेत्र के एक युवक की पांच साल पहले हुई हत्या के बाद परिवार वालों ने उसके बीमा का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता फोरम में दायर किए वाद का फैसला शुक्रवार को आ गया। फोरम ने वादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम को 13.50 लाख रुपये की धनराशि अदा करने का आदेश दिया है। साथ ही वाद दायर करने की तिथि से उक्त धनराशि पर नौ प्रतिशत ब्याज की अदायगी का भी आदेश है।
फरीदपुर क्षेत्र के रहने वाले शांतिप्रकाश ने अपने पुत्र वैभव मिश्रा की हत्या होने के बाद बीमा पॉलिसी के भुगतान का दावा किया था। इस पर एलआईसी ने उनके दावे को कुछ आपत्तियां दर्शाकर निरस्त कर दिया था। तब शांति स्वरूप ने वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार वर्मा के माध्यम से यहां जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया था। यहां बता दें कि मृतक ने बदायूं एलआईसी से अपना बीमा कराया था। करीब पांच साल से चल रहे इस वाद पर फोरम की पीठ के अध्यक्ष शिवकरन, सदस्य प्रवीन कुमार यादव और मधु सक्सेना ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। उसके अनुसार एलआईसी के निरस्त किए गए दावे को सिरे से खारिज कर दिया गया। पीठ ने मृतक वैभव मिश्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पाया कि उसकी हत्या सिर में चोट पहुंचाकर और जलाकर की गई थी। पीठ ने अपना निर्णय सुनाते हुए कहा कि बीमा कंपनी ने परिवादी का बीमा दावा और दुर्घटना हित लाभ अदा न करके सेवा में कमी की है। कहा कि बीमा कंपनी ने परिवादी को उसके मृतक पुत्र का बीमा दावा की रकम 12.50 लाख रुपये और दुर्घटना हित लाभ का एक लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा फोरम ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि परिवादी को बीमा वाद व्यय के रूप में दो हजार रुपये भी अदा किए जाएं।
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फरीदपुर क्षेत्र के रहने वाले शांतिप्रकाश ने अपने पुत्र वैभव मिश्रा की हत्या होने के बाद बीमा पॉलिसी के भुगतान का दावा किया था। इस पर एलआईसी ने उनके दावे को कुछ आपत्तियां दर्शाकर निरस्त कर दिया था। तब शांति स्वरूप ने वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार वर्मा के माध्यम से यहां जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया था। यहां बता दें कि मृतक ने बदायूं एलआईसी से अपना बीमा कराया था। करीब पांच साल से चल रहे इस वाद पर फोरम की पीठ के अध्यक्ष शिवकरन, सदस्य प्रवीन कुमार यादव और मधु सक्सेना ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। उसके अनुसार एलआईसी के निरस्त किए गए दावे को सिरे से खारिज कर दिया गया। पीठ ने मृतक वैभव मिश्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पाया कि उसकी हत्या सिर में चोट पहुंचाकर और जलाकर की गई थी। पीठ ने अपना निर्णय सुनाते हुए कहा कि बीमा कंपनी ने परिवादी का बीमा दावा और दुर्घटना हित लाभ अदा न करके सेवा में कमी की है। कहा कि बीमा कंपनी ने परिवादी को उसके मृतक पुत्र का बीमा दावा की रकम 12.50 लाख रुपये और दुर्घटना हित लाभ का एक लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा फोरम ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि परिवादी को बीमा वाद व्यय के रूप में दो हजार रुपये भी अदा किए जाएं।
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