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बंद औद्योगिक इकाइयों के दिन बहुरने की जगी उम्मीद
बदायूं
Updated Sat, 23 Jan 2016 08:13 PM IST
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सालारपुर स्थित इंड्रस्ट्रियल एरिया की दशा पर शासन ने रिपोर्ट तलब की है। इसे बंद हुईं औद्योगिक इकाइयों को फिर से चालू करने की कवायद के तौर पर देखा जा सकता है। जिला उद्योग केंद्र ने रिपोर्ट पर काम शुरू कर दिया है। एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। इधर, जिले में ऊन कारपेट कलस्टर प्लांट की स्थापना का रास्ता भी साफ हो गया है। इसके लिए कटिंग और फिनिशिंग प्लांट लगाया जाएगा।
आंवला रोड स्थित सालारपुर में करीब दो दशक पहले इंड्रस्ट्रियल एरिया बनाया गया था। उत्तर प्रदेश वित्त निगम और उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल कार्पोरेशन के वित्तीय सहयोग से यहां सरिया फैक्ट्री, गत्ता फैक्ट्री, इंडिया मार्का हैंडपंप प्लांट समेत 43 उद्योग स्थापित हुए। इंड्रस्ट्रियल एरिया में उद्योग स्थापित करने के लिए 51 प्लाट आवंटित किए गए। कच्चे माल, परिवहन की सुविधा और प्रोत्साहन नीति के अभाव में धीरे-धीरे उद्योग धंधे दम तोड़ने लगे। उद्यमियों की सब्सिडी हड़पने की नीतियों की वजह से एक-एक कर 23 इंकाइयां बंद हो गईं।
इंड्रस्ट्रियल एरिया का दम टूटने लगा तो आठ इकाइयों को उत्तर प्रदेश वित्त निगम और सात को धारा-29 के तहत उत्तर प्रदेश इंड्रस्ट्रियल कार्पोरेशन ने अपने अधीन ले लिया। तीन इकाइयों के मामले कोर्ट में लंबित हैं ऐसे में इनमें लगीं मशीनें भी धूल फांक रही हैं। शासन को लंबे समय के बाद इंड्रस्ट्रियल एरिया की याद आई है। जिला उद्योग केंद्र शासन को भेजने के लिए रिपोर्ट तैयार कर रहा है। इधर, जिले में ऊन कारपेट कलस्टर प्लांट के लिए भी शासन ने मंजूरी दे दी है। इसका लाभ जिले के कालीन कारीगरों को होगा।
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शासन ने मांगी यह सूचनाएं
इंड्रस्ट्रियल एरिया में कुल कितनी इकाइयां चालू हैं। अब तक कितनी इकाइयां बंद हो चुकी हैं। इनके बंद होने की क्या वजह है। इंड्रस्ट्रियल एरिया में कितने प्लाटों को आवंटन हो चुका है। कितने प्लाटों का आवंटन होना अभी बाकी है। कितने उद्यमियों की ओर से लीज शर्तों का उल्लंघन किया गया। पिछले दो साल में कितनी इकाइयां बंद हुईं। इसके साथ शासन ने बंद इकाइयों को फिर से चालू कराने के लिए सुझाव भी मांगे हैं।
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक वीरेंद्र कुमार के अनुसार शासन स्तर से इंड्रस्ट्रियल एरिया पर रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर शासन को भेज दी जाएगी। इकाइयों को चालू कराने के लिए हम अपने स्तर से भी कोशिश कर रहे हैं। लीज शर्तों का उल्लंघन करने वाले उद्यमियों को नोटिस दिए जाएंगे।
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आंवला रोड स्थित सालारपुर में करीब दो दशक पहले इंड्रस्ट्रियल एरिया बनाया गया था। उत्तर प्रदेश वित्त निगम और उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल कार्पोरेशन के वित्तीय सहयोग से यहां सरिया फैक्ट्री, गत्ता फैक्ट्री, इंडिया मार्का हैंडपंप प्लांट समेत 43 उद्योग स्थापित हुए। इंड्रस्ट्रियल एरिया में उद्योग स्थापित करने के लिए 51 प्लाट आवंटित किए गए। कच्चे माल, परिवहन की सुविधा और प्रोत्साहन नीति के अभाव में धीरे-धीरे उद्योग धंधे दम तोड़ने लगे। उद्यमियों की सब्सिडी हड़पने की नीतियों की वजह से एक-एक कर 23 इंकाइयां बंद हो गईं।
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इंड्रस्ट्रियल एरिया का दम टूटने लगा तो आठ इकाइयों को उत्तर प्रदेश वित्त निगम और सात को धारा-29 के तहत उत्तर प्रदेश इंड्रस्ट्रियल कार्पोरेशन ने अपने अधीन ले लिया। तीन इकाइयों के मामले कोर्ट में लंबित हैं ऐसे में इनमें लगीं मशीनें भी धूल फांक रही हैं। शासन को लंबे समय के बाद इंड्रस्ट्रियल एरिया की याद आई है। जिला उद्योग केंद्र शासन को भेजने के लिए रिपोर्ट तैयार कर रहा है। इधर, जिले में ऊन कारपेट कलस्टर प्लांट के लिए भी शासन ने मंजूरी दे दी है। इसका लाभ जिले के कालीन कारीगरों को होगा।
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शासन ने मांगी यह सूचनाएं
इंड्रस्ट्रियल एरिया में कुल कितनी इकाइयां चालू हैं। अब तक कितनी इकाइयां बंद हो चुकी हैं। इनके बंद होने की क्या वजह है। इंड्रस्ट्रियल एरिया में कितने प्लाटों को आवंटन हो चुका है। कितने प्लाटों का आवंटन होना अभी बाकी है। कितने उद्यमियों की ओर से लीज शर्तों का उल्लंघन किया गया। पिछले दो साल में कितनी इकाइयां बंद हुईं। इसके साथ शासन ने बंद इकाइयों को फिर से चालू कराने के लिए सुझाव भी मांगे हैं।
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक वीरेंद्र कुमार के अनुसार शासन स्तर से इंड्रस्ट्रियल एरिया पर रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर शासन को भेज दी जाएगी। इकाइयों को चालू कराने के लिए हम अपने स्तर से भी कोशिश कर रहे हैं। लीज शर्तों का उल्लंघन करने वाले उद्यमियों को नोटिस दिए जाएंगे।