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कछला पुल के पहुंच मार्ग के गड्ढे में मिट्टी भरी, मजबूती पर संशय बरकरार
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कछला पुल के पहुंच मार्ग के गड्ढे पर डाली गई मिट्टी। संवाद
- फोटो : BADAUN
उझानी (बदायूं)। कछला में गंगा नदी पर बने पुल के क्षतिग्रस्त हुए पहुंच मार्ग को शुक्रवार सुबह तक दुरुस्त कर दिया गया। 15 फुट से अधिक गहराई वाले गड्ढे को महज मिट्टी से ही भरा गया है। हालांकि मिट्टी में पत्थर की टुकड़ी मिलाकर डाले जाने की बात कही जा रही थी। ऐसे में पहुंच मार्ग की मजबूती पर संशय बना हुआ है।
बरेली-मथुरा हाईवे पर कासगंज जिले की साइड में पहुंच मार्ग के किनारे से पिछले दिनों मिट्टी धंसनी शुरू हुई तो धीरे-धीरे गड्ढा गहरा होता चला गया। तीन दिन पहले इलाके के लोगों के जरिये मामला जिले के अफसरों के संज्ञान में पहुंचा तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अफसर भी नींद से जागे। बृहस्पतिवार सुबह एनएचएआई के साइट इंजीनियर मयंक चौहान की देखरेख में गड्ढा भरने का काम शुरू हुआ, जो रात भर चला। बताते हैं कि गड्ढा भरने के लिए पत्थर की टुकड़ी मिक्स मिट्टी के इस्तेमाल की बात की गई थी लेकिन एनएचएआई ने जेसीबी के जरिये खोदाई कराके मिट्टी से गड्ढा भरा है।
जानकार बताते हैं कि बारिश के दिनों में जब पहले दो बार मिट्टी नहीं टिक पाई तो इस बार क्या गारंटी है पहुंच मार्ग सुरक्षित बना रहेगा। बारिश के दौरान पुल के ऊपर का पानी फिर भी इसी तरफ गिरेगा। इसके लिए जरूरी है कि मिट्टी के ऊपर कम से कम मोटे पत्थर लगाए जाएं।
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पहुंच मार्ग के दोनों ओर है अत्यधिक गहराई
कछला पुल पर कासगंज जिले की साइड में पहुंच मार्ग के दोनों ओर जमीनी सतह काफी गहराई में है। पश्चिमी साइड में जहां गड्ढों में पानी भर गया है तो पूर्वी ओर अगर मार्ग से कोई फिसल भी जाए तो करीब 20 फुट गहराई में गिरेगा। बारिश के दिनों में गंगा का जलस्तर भी घटता-बढ़ता रहता है। बांध तो पास में बना है लेकिन उससे पहुंच मार्ग को मजबूती नहीं मिलती। वाहनों की रफ्तार की वजह से मिट्टी बिना बारिश के भी ढह जाती है। उसे रोकने के लिए पत्थरों को जमीनों सतह से लगाना भी आवश्यक है।
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बरेली-मथुरा हाईवे पर कासगंज जिले की साइड में पहुंच मार्ग के किनारे से पिछले दिनों मिट्टी धंसनी शुरू हुई तो धीरे-धीरे गड्ढा गहरा होता चला गया। तीन दिन पहले इलाके के लोगों के जरिये मामला जिले के अफसरों के संज्ञान में पहुंचा तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अफसर भी नींद से जागे। बृहस्पतिवार सुबह एनएचएआई के साइट इंजीनियर मयंक चौहान की देखरेख में गड्ढा भरने का काम शुरू हुआ, जो रात भर चला। बताते हैं कि गड्ढा भरने के लिए पत्थर की टुकड़ी मिक्स मिट्टी के इस्तेमाल की बात की गई थी लेकिन एनएचएआई ने जेसीबी के जरिये खोदाई कराके मिट्टी से गड्ढा भरा है।
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जानकार बताते हैं कि बारिश के दिनों में जब पहले दो बार मिट्टी नहीं टिक पाई तो इस बार क्या गारंटी है पहुंच मार्ग सुरक्षित बना रहेगा। बारिश के दौरान पुल के ऊपर का पानी फिर भी इसी तरफ गिरेगा। इसके लिए जरूरी है कि मिट्टी के ऊपर कम से कम मोटे पत्थर लगाए जाएं।
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पहुंच मार्ग के दोनों ओर है अत्यधिक गहराई
कछला पुल पर कासगंज जिले की साइड में पहुंच मार्ग के दोनों ओर जमीनी सतह काफी गहराई में है। पश्चिमी साइड में जहां गड्ढों में पानी भर गया है तो पूर्वी ओर अगर मार्ग से कोई फिसल भी जाए तो करीब 20 फुट गहराई में गिरेगा। बारिश के दिनों में गंगा का जलस्तर भी घटता-बढ़ता रहता है। बांध तो पास में बना है लेकिन उससे पहुंच मार्ग को मजबूती नहीं मिलती। वाहनों की रफ्तार की वजह से मिट्टी बिना बारिश के भी ढह जाती है। उसे रोकने के लिए पत्थरों को जमीनों सतह से लगाना भी आवश्यक है।