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मौका मिला तो प्रशासकों ने 25 लाख से ज्यादा खर्च कर डाले
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बदायूं। पिछले दिनों प्रधानी का चुनाव न हो पाने पर कुछ समय के लिए ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की तैनाती की गई थी। इस दौरान देखने में आया कि कुछ माह में ग्राम पंचायतों में कई लाख रुपये का काम हो गया। ऐसे में कराए गए कार्यों का सत्यापन करने के लिए जांच टीम बनाई गई है।
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए गए थे। प्रशासकों ने महज दो महीने में ही 25 लाख रुपए से अधिक खर्च कर डाले। शासन में बैठे अधिकारियों को संदेह हुआ तो प्रदेश के सभी जिलों की ऐसी ग्राम पंचायतों का रिकॉर्ड खंगाला गया, जहां प्रशासकों ने दो माह में 25 लाख या उससे अधिक धन खर्च कर दिया। इसमें जिले के चार ब्लॉकों की पांच ग्राम पंचायत सामने आई हैं। यहां पर 25 लाख रुपये से अधिक धनराशि विकास के नाम पर खर्च की गई है। इनमें सबसे ऊपर बिसौली की नागपुर है। यहां 40 लाख से अधिक खर्च किए गए हैं। जबकि उझानी की भरकउया में 32 लाख से अधिक, सालारपुर के बिनावर में 29 लाख से अधिक, वहीं कादरचौक के ग्राम पंचायत भमउइया भदिया और रमजानपुर में 25-25 लाख रुपये से अधिक खर्च किए हैं। शासन ने डीएम को निर्देश दिए हैं कि वह टीम बनाकर इन ग्राम पंचायत में खर्च की गई धनराशि की जांच कराएं तथा वहां कराए कार्यों का सत्यापन हो। संवाद
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ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए गए थे। प्रशासकों ने महज दो महीने में ही 25 लाख रुपए से अधिक खर्च कर डाले। शासन में बैठे अधिकारियों को संदेह हुआ तो प्रदेश के सभी जिलों की ऐसी ग्राम पंचायतों का रिकॉर्ड खंगाला गया, जहां प्रशासकों ने दो माह में 25 लाख या उससे अधिक धन खर्च कर दिया। इसमें जिले के चार ब्लॉकों की पांच ग्राम पंचायत सामने आई हैं। यहां पर 25 लाख रुपये से अधिक धनराशि विकास के नाम पर खर्च की गई है। इनमें सबसे ऊपर बिसौली की नागपुर है। यहां 40 लाख से अधिक खर्च किए गए हैं। जबकि उझानी की भरकउया में 32 लाख से अधिक, सालारपुर के बिनावर में 29 लाख से अधिक, वहीं कादरचौक के ग्राम पंचायत भमउइया भदिया और रमजानपुर में 25-25 लाख रुपये से अधिक खर्च किए हैं। शासन ने डीएम को निर्देश दिए हैं कि वह टीम बनाकर इन ग्राम पंचायत में खर्च की गई धनराशि की जांच कराएं तथा वहां कराए कार्यों का सत्यापन हो। संवाद
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