फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Civic Amenities

अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस पर विशेष : 60 के पार फिर भी जज्बा बरकरार

Fri, 01 Oct 2021 01:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 01 Oct 2021 01:17 AM IST
विज्ञापन
Civic Amenities
बदायूं। बुजुर्गों के पास अनुभव और ज्ञान का अनमोल खजाना होता है। पूरा जीवन परिवार के लिए खपाने के बाद कुछ जिम्मेदारियों से वे सेवानिवृत्ति जरूर ले लेते हैं, लेकिन वे हमें जीवन में बेहतर करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। शहर व आसपास इलाकों में कई ऐसे बुजुर्ग हैं जो जिंदादिली की मिसाल हैं। उम्र बढ़ने के बाद भी उनका हौसला कम नहीं हुआ है। इनमें से कुछ से हमने भी बात की।
विज्ञापन

-
सामाजिक बदलावों के बीच अब बुजुर्गों को वह सम्मान नहीं : गुलाब
गुलाब सिंह चिकित्सा विभाग से रिटायर हुए थे। उम्र 70 साल है। वह पेंशनर्स परिषद के कोषाध्यक्ष हैं और बुजुर्गों को उनका हक दिलाने में आगे रहते हैं। कहते हैं कि सामाजिक बदलावों के बीच अब बुजुर्गों को वह सम्मान नहीं मिलता जो मिलना चाहिए। हालांकि, अब भी कई संयुक्त परिवार ऐसे हैं जो आज भी बुजुर्गों की राय और मशविरे के बिना काम नहीं करते।
विज्ञापन

-
कभी खुद कमजोर न समझो, समझ लिया
सिविल लाइन निवासी ओमप्रकाश शर्मा भी कई साल पहले जिला उद्योग केंद्र से रिटायर हो चुके हैं। वह उम्र और बीमारी को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते। फिलहाल वह पेंशनर्स परिषद में अध्यक्ष हैं और साथी कर्मचारियों की समस्याओं के निस्तारण का काम करते हैं। कहते हैं कि एक बार खुद को कमजोर मान लिया तो बैठ जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

-
जमुना सिंह शहर से सटे बहेड़ी गांव के निवासी हैं। किसानी करते हैं। उम्र बढ़ गई है पर खुद ही खेती करने और कराने में यकीन करते हैं। सुबह की सैर से लेकर घर के तमाम जरूरी काम यही निपटाते हैं। कहते हैं कि शहरों के मुकाबले गांवों में बुजुर्गों का ज्यादा सम्मान है। आधुनिक युग के युवाओं को समझाना चाहिए कि बुजुर्गों के बिना संस्कृति और सामाजिक परंपराएं आगे नहीं बढ़ सकतीं।

-
मलेरिया विभाग से रिटायर शहर निवासी संतोष शर्मा लंबे समय तक कर्मचारी संगठन के नेता रह चुके हैं। अब वह सीधे तौर पर संगठन में नहीं हैं पर संरक्षक के रूप में लगातार काम कर रहे हैं। साथियों के काम से लखनऊ तक की दौड़ लगाने में उन्हें दिक्कत नहीं होती। घर व बाहर के तमाम जरूरी काम खुद निपटाते हैं। कहते हैं कि बुजुर्ग भारतीय समाज का अहम हिस्सा हैं। उनके अनुभवों के बिना एक सुसंस्कृत समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed