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केंद्रों पर बेच रहे थे गेहूं-धान और खुद को गरीब दिखाकर मुफ्त ले रहे थे राशन
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बदायूं। जिले में गरीब अन्न कल्याण योजना के तहत फजीवाड़े का मामला सामने आया है। शासन स्तर से हो रही जांच में जिले में करीब 813 लोग ऐसे मिले हैं जो खुद को गरीब दिखाकर सरकार से राशन के रूप में गेहूं और चावल मुफ्त पा रहे थे। वहीं इन्हीं लोगों ने सरकारी क्रय केंद्रों पर अपनी फसल के रूप में गेहूं और धान बेचा था। आंकड़ेबाजी में यह लोग फंसे हैं, इनके राशन कार्ड निरस्त करने की कवायद चल रही है।
कोरोना काल के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबों को मुफ्त व सस्ता राशन दिया जा रहा है। जिले में पांच लाख 15 हजार राशन कार्डधारक हैं। इनमें 45 हजार अंत्योदय कार्ड धारक और चार लाख 70 हजार पात्र गृहस्थी के कार्डधारक हैं। पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट (कार्ड में दर्ज सदस्यों की संख्या) पांच किलोग्राम के हिसाब से राशन दिया जाता है। इन्हें तीन रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल व दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं दिया जाता है। जबकि अंत्योदय राशन कार्डधारकों को 35 किलोग्राम राशन दिए जाने की व्यवस्था है।
इधर, सरकार की नजर में गरीब बने लोग बतौर किसान अनाज उगाकर सरकारी क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं व धान बेच रहे थे। यहां आधार कार्ड, बैंक खाता व अन्य अभिलेख लगाए जाते हैं। इनकी वजह से शासन स्तर से हो रही जांच में प्रदेश भर में चालीस हजार से ज्यादा उपभोक्ता फंस गए हैं। इनमें लाखों का अनाज बेचने के बाद गरीब बनकर राशन लेने वाले जिले के 813 कार्डधारक भी फंस गए हैं। अब इनकी कुंडली तैयार की जा रही है। यह कार्डधारक कब से राशन ले रहे हैं। अब तक कितना राशन ले चुके हैं। इसकी पूरी जांच की जाएगी। साथ ही अपात्रों के राशन कार्ड निरस्त किए जाएंगे। उनसे अब तक लिए राशन की धनराशि भी वसूल की जा सकती है।
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शासन से 813 लोगों की सूची भेजी गई है जो संदिग्ध श्रेणी में आते हैं। इनकी टीम से जांच कराई जा रही है। जांच के उपरांत जो भी कार्ड धारक अपात्र मिलेंगे उनके राशन कार्ड निरस्त कर दिए जाएंगे। साथ ही शासन के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- रमन मिश्रा, जिला पूर्ति अधिकारी
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कोरोना काल के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबों को मुफ्त व सस्ता राशन दिया जा रहा है। जिले में पांच लाख 15 हजार राशन कार्डधारक हैं। इनमें 45 हजार अंत्योदय कार्ड धारक और चार लाख 70 हजार पात्र गृहस्थी के कार्डधारक हैं। पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट (कार्ड में दर्ज सदस्यों की संख्या) पांच किलोग्राम के हिसाब से राशन दिया जाता है। इन्हें तीन रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल व दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं दिया जाता है। जबकि अंत्योदय राशन कार्डधारकों को 35 किलोग्राम राशन दिए जाने की व्यवस्था है।
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इधर, सरकार की नजर में गरीब बने लोग बतौर किसान अनाज उगाकर सरकारी क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं व धान बेच रहे थे। यहां आधार कार्ड, बैंक खाता व अन्य अभिलेख लगाए जाते हैं। इनकी वजह से शासन स्तर से हो रही जांच में प्रदेश भर में चालीस हजार से ज्यादा उपभोक्ता फंस गए हैं। इनमें लाखों का अनाज बेचने के बाद गरीब बनकर राशन लेने वाले जिले के 813 कार्डधारक भी फंस गए हैं। अब इनकी कुंडली तैयार की जा रही है। यह कार्डधारक कब से राशन ले रहे हैं। अब तक कितना राशन ले चुके हैं। इसकी पूरी जांच की जाएगी। साथ ही अपात्रों के राशन कार्ड निरस्त किए जाएंगे। उनसे अब तक लिए राशन की धनराशि भी वसूल की जा सकती है।
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शासन से 813 लोगों की सूची भेजी गई है जो संदिग्ध श्रेणी में आते हैं। इनकी टीम से जांच कराई जा रही है। जांच के उपरांत जो भी कार्ड धारक अपात्र मिलेंगे उनके राशन कार्ड निरस्त कर दिए जाएंगे। साथ ही शासन के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- रमन मिश्रा, जिला पूर्ति अधिकारी