{"_id":"610305558ebc3e090f5a60f1","slug":"civic-amenities-badaun-news-bly454764974","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा का जलस्तर फिर बढ़ा, कटान शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा का जलस्तर फिर बढ़ा, कटान शुरू
विज्ञापन
बदायूं। पिछले कई दिनों से पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। बृहस्पतिवार को नरौरा बैराज से 63 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी गंगा में छोड़ा गया। इससे गंगा का जलस्तर बढ़ गया और उसहैत व सहसवान समेत कई इलाकों में कटान फिर शुरू हो गया है।
जून के तीसरे सप्ताह में नरौरा बैराज से लगातार कई दिन तक दो लाख क्सेसूक से ज्यादा पानी गंगा में छोड़े जाने से उसहैत, सहसवान, जरीफनगर, कछला के 20 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। तब गंगा ने काफी कटान किया था। इसके बाद हालात सामान्य हो गए। अब पिछले कई दिनों से बारिश हो रही है, जिस कारण फिर से गंगा के जलस्तर में इजाफा होने लगा है। पिछले बृहस्पतिवार को गंगा में नरौरा बैराज से 1.11 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसके बाद वाटर डिस्चार्ज कम होता गया। अब फिर से वाटर डिस्चार्ज बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को गंगा में नरौरा बैराज से 63 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके अलावा बिजनौर से 1.24 लाख और हरिद्वार से 1.16 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
बिजनौर से छोड़ा गया पानी शुक्रवार तक नरौरा पहुंच जाएगा और इसके बाद नरौरा से यह पानी कछला तक आने में करीब 12 घंटे का वक्त लगेगा। एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी आने के बाद गंगा में उफान आएगा। इधर, बृहस्पतिवार को जलस्तर में इजाफा होने के कारण गंगा उसहैत के अहमदनगर बछौरा, जटा समेत कई गांवों के पास कटान कर रही हैं। बाढ़ खंड कटान रोकने में जुटा है।
विज्ञापन
गंगा किनारे बसे 20 गांव ज्यादा संवेदनशील
बाढ़ के लिहाज से उसहैत, सहसवान, जरीफनगर और कछला इलाके के गंगा किनारे बसे 20 गांव बाढ़ और कटान के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील हैं। उसहैत में भुंडी बांध बनने के बाद कुछ गांव संवेदनशीन श्रेणी से बाहर हो गए हैं। गंगा में लगातार कई दिन अगर एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी आता है तो इन संवेदनशील गांवों के लिए बाढ़ और कटान का खतरा पैदा हो जाता है। बाढ़ खंड कटान वाले स्थानों पर निगरानी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति सामान्य है। आने वाले दिनों में संभावित बाढ़ और कटान से निपटने की सभी तैयारियां कर ली गई हैं।
अभी बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं। कुछ स्थानों पर मामूली कटान हो रहा है। इसे रोका जा रहा है। बाढ़ और कटान के लिहाज से संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जा रही है। आने वाले दिनों में नरौरा बैराज से ज्यादा वाटर डिस्चार्ज होता है तो बाढ़ के हालात बन सकते हैं। - जयंती प्रसाद, सहायक अभियंता बाढ़ खंड
विज्ञापन
जून के तीसरे सप्ताह में नरौरा बैराज से लगातार कई दिन तक दो लाख क्सेसूक से ज्यादा पानी गंगा में छोड़े जाने से उसहैत, सहसवान, जरीफनगर, कछला के 20 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। तब गंगा ने काफी कटान किया था। इसके बाद हालात सामान्य हो गए। अब पिछले कई दिनों से बारिश हो रही है, जिस कारण फिर से गंगा के जलस्तर में इजाफा होने लगा है। पिछले बृहस्पतिवार को गंगा में नरौरा बैराज से 1.11 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसके बाद वाटर डिस्चार्ज कम होता गया। अब फिर से वाटर डिस्चार्ज बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को गंगा में नरौरा बैराज से 63 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके अलावा बिजनौर से 1.24 लाख और हरिद्वार से 1.16 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
विज्ञापन
बिजनौर से छोड़ा गया पानी शुक्रवार तक नरौरा पहुंच जाएगा और इसके बाद नरौरा से यह पानी कछला तक आने में करीब 12 घंटे का वक्त लगेगा। एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी आने के बाद गंगा में उफान आएगा। इधर, बृहस्पतिवार को जलस्तर में इजाफा होने के कारण गंगा उसहैत के अहमदनगर बछौरा, जटा समेत कई गांवों के पास कटान कर रही हैं। बाढ़ खंड कटान रोकने में जुटा है।
विज्ञापन
गंगा किनारे बसे 20 गांव ज्यादा संवेदनशील
बाढ़ के लिहाज से उसहैत, सहसवान, जरीफनगर और कछला इलाके के गंगा किनारे बसे 20 गांव बाढ़ और कटान के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील हैं। उसहैत में भुंडी बांध बनने के बाद कुछ गांव संवेदनशीन श्रेणी से बाहर हो गए हैं। गंगा में लगातार कई दिन अगर एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी आता है तो इन संवेदनशील गांवों के लिए बाढ़ और कटान का खतरा पैदा हो जाता है। बाढ़ खंड कटान वाले स्थानों पर निगरानी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति सामान्य है। आने वाले दिनों में संभावित बाढ़ और कटान से निपटने की सभी तैयारियां कर ली गई हैं।
अभी बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं। कुछ स्थानों पर मामूली कटान हो रहा है। इसे रोका जा रहा है। बाढ़ और कटान के लिहाज से संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जा रही है। आने वाले दिनों में नरौरा बैराज से ज्यादा वाटर डिस्चार्ज होता है तो बाढ़ के हालात बन सकते हैं। - जयंती प्रसाद, सहायक अभियंता बाढ़ खंड