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बाढ से मेंथा की फसल को भारी नुकसान
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उझानी (बदायूं)। गंगा के जलस्तर में गिरावट आने के बाद भी तलहटी के खेतों में बाढ़ का पानी भरा है, जिसकी वजह से फसलें सड़ने लगी हैं। मेंथा की फसल को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। गन्ना और मिर्च की फसलें भी प्रभावित हुई हैं।
जिले में दहगवां क्षेत्र से शुरू होकर उसहैत इलाके तक गंगा का फाट है। गंगा किनारे बसे गांवों के लोगों की हजारों बीघा जमीन तलहटी में हैं। पिछले दिनों किसानों ने पॉलेज के अलावा कद्दू वर्गीय फसलों को उत्पादन में बेच दी थीं। मगर मेंथा, मिर्च और गन्ना की फसल के दौरान इलाके के बाढ़ ने अपने आगोश में समेट ले लिया। मैदानी क्षेत्र में बारिश इतनी ज्यादा नहीं हुई, लेकिन गंगा और रामगंगा में बैराज से पानी छोड़ने जाने पर आई बाढ़ ने तबाही मचा दी।
हुसैनपुर खेड़ा गांव के नेम सिंह और ढकनगला के चंद्रपाल के खेत में मेंथा की फसल बाढ़ का पानी भरा होने से ने सड़ने के कगार पर पहुंचा गई है। इसी तरह चंदनपुर, सरौता, ननाखेड़ा और पिपरौल आदि के निवासी ग्रामीणों की फसलों को भी काफी नुकसान हुआ है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति कादरचौक, उसहैत और सहसवान क्षेत्र में गंगा किनारे के किसानों के सामने बनी हुई है। पककर तैयार मेंथा की फसल की कटाई में जुटे किसानों का तो यहां तक कहना है कि पौधे एक बार पानी में डूब जाएं तो पिराई के दौरान ऑयल 25 से 30 फीसदी से ज्यादा नहीं निकलता।
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पशुओं में मुंहपका और खुरपका रोग फैलने की आशंका
उझानी। बाढ़ के दिनों में गंगा किनारे के गांवों में पशुओं की बीमारियां पैर पसार लेती हैं। गांवों में पशुओं के चारे की दिक्कत होने लगी है। वहीं गंदा पानी भरा होने से पशुओं में मुंहपका और खुरपका रोग होने की आशंका बढ़ गई है। बता दें कि खुर पका बीमारी बारिश और बाढ़ के दौरान ज्यादा दिक्कत बढ़ाती है। संवाद
बाढ़ की वजह से गंगा किनारे के गांवों में खासकर मेंथा और मिर्च की फसलों को नुकसान हुआ है। मेंथा के जिन खेतों में पानी बाहर निकल चुका है, उनमें नुकसान कम रहेगा। ईख की फसल को कोई खास नुकसान नहीं है। फिर भी किसानों को मेंथा की कटाई पर जोर देना चाहिए।- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
चार-पांच दिन पहले गंगा में बाढ़ का पानी बढ़ा तो उसने गंगा किनारे के खेतों में फसल को भी चपेट में ले लिया। 15 बीघा खेत में अरबी की फसल थी, सो बाढ़ के पानी ने तबाह कर दी। फसल से बहुत उम्मीद थी, लेकिन अरबी पर लागत भी बाढ़ के पानी में बह गई।- विजय कुमार
पिछले साल गंगा में बाढ़ लेट आई थी। बाढ़ का पानी आने से पहले ही मेंथा की फसल की कटाई और पिराई का काम पूरा हो चुका था लेकिन इस बार बाढ जल्दी आ जाने से फसल तबाह हो गई है। करीब 20 बीघा मेंथा की फसल पर हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं।- कमल सिंह
मेरे पास गंगा किनारे करीब 40 बीघा जमीन है। आधे से ज्यादा में ईख है। बाकी में मिर्च और मेंथा किया लेकिन मिर्च और मेंथा की फसल को बाढ़ के पानी ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ के पानी में कमी के बाद ईख की फसल तो ठीक हो जाएगी।- रामनिवास
गंगा में बाढ़ ने सैकड़ों किसानों को नुकसान पहुंचाया है। नुकसान तो मुझे भी हुआ है लेकिन इस बार मेंथा की रोपाई नहीं करके वह बच गया। ईख बाढ़ के पानी में डूब गई है। नुकसान तो रहेगा, लेकिन गंगा किनारे गांवों के मेंथा उत्पादक घाटे में रहेंगे। - रामदास
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जिले में दहगवां क्षेत्र से शुरू होकर उसहैत इलाके तक गंगा का फाट है। गंगा किनारे बसे गांवों के लोगों की हजारों बीघा जमीन तलहटी में हैं। पिछले दिनों किसानों ने पॉलेज के अलावा कद्दू वर्गीय फसलों को उत्पादन में बेच दी थीं। मगर मेंथा, मिर्च और गन्ना की फसल के दौरान इलाके के बाढ़ ने अपने आगोश में समेट ले लिया। मैदानी क्षेत्र में बारिश इतनी ज्यादा नहीं हुई, लेकिन गंगा और रामगंगा में बैराज से पानी छोड़ने जाने पर आई बाढ़ ने तबाही मचा दी।
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हुसैनपुर खेड़ा गांव के नेम सिंह और ढकनगला के चंद्रपाल के खेत में मेंथा की फसल बाढ़ का पानी भरा होने से ने सड़ने के कगार पर पहुंचा गई है। इसी तरह चंदनपुर, सरौता, ननाखेड़ा और पिपरौल आदि के निवासी ग्रामीणों की फसलों को भी काफी नुकसान हुआ है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति कादरचौक, उसहैत और सहसवान क्षेत्र में गंगा किनारे के किसानों के सामने बनी हुई है। पककर तैयार मेंथा की फसल की कटाई में जुटे किसानों का तो यहां तक कहना है कि पौधे एक बार पानी में डूब जाएं तो पिराई के दौरान ऑयल 25 से 30 फीसदी से ज्यादा नहीं निकलता।
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पशुओं में मुंहपका और खुरपका रोग फैलने की आशंका
उझानी। बाढ़ के दिनों में गंगा किनारे के गांवों में पशुओं की बीमारियां पैर पसार लेती हैं। गांवों में पशुओं के चारे की दिक्कत होने लगी है। वहीं गंदा पानी भरा होने से पशुओं में मुंहपका और खुरपका रोग होने की आशंका बढ़ गई है। बता दें कि खुर पका बीमारी बारिश और बाढ़ के दौरान ज्यादा दिक्कत बढ़ाती है। संवाद
बाढ़ की वजह से गंगा किनारे के गांवों में खासकर मेंथा और मिर्च की फसलों को नुकसान हुआ है। मेंथा के जिन खेतों में पानी बाहर निकल चुका है, उनमें नुकसान कम रहेगा। ईख की फसल को कोई खास नुकसान नहीं है। फिर भी किसानों को मेंथा की कटाई पर जोर देना चाहिए।- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
चार-पांच दिन पहले गंगा में बाढ़ का पानी बढ़ा तो उसने गंगा किनारे के खेतों में फसल को भी चपेट में ले लिया। 15 बीघा खेत में अरबी की फसल थी, सो बाढ़ के पानी ने तबाह कर दी। फसल से बहुत उम्मीद थी, लेकिन अरबी पर लागत भी बाढ़ के पानी में बह गई।- विजय कुमार
पिछले साल गंगा में बाढ़ लेट आई थी। बाढ़ का पानी आने से पहले ही मेंथा की फसल की कटाई और पिराई का काम पूरा हो चुका था लेकिन इस बार बाढ जल्दी आ जाने से फसल तबाह हो गई है। करीब 20 बीघा मेंथा की फसल पर हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं।- कमल सिंह
मेरे पास गंगा किनारे करीब 40 बीघा जमीन है। आधे से ज्यादा में ईख है। बाकी में मिर्च और मेंथा किया लेकिन मिर्च और मेंथा की फसल को बाढ़ के पानी ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ के पानी में कमी के बाद ईख की फसल तो ठीक हो जाएगी।- रामनिवास
गंगा में बाढ़ ने सैकड़ों किसानों को नुकसान पहुंचाया है। नुकसान तो मुझे भी हुआ है लेकिन इस बार मेंथा की रोपाई नहीं करके वह बच गया। ईख बाढ़ के पानी में डूब गई है। नुकसान तो रहेगा, लेकिन गंगा किनारे गांवों के मेंथा उत्पादक घाटे में रहेंगे। - रामदास