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धनूपुरा-भोजपुर में बनेंगे बरातघर और खेल मैदान, समतल कराई जगह
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गांव में जमीन को समतल करने को मंगवाई गई जेसीबी
- फोटो : BADAUN
बदायूं/ कादरचौक। कादरचौक ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम धनूपुरा और भोजपुर के ग्रामीणों को बरातघर व खेल मैदान की भी सौगात मिल गई है। शनिवार को गांव पहुंचे एसडीएम सदर पारसनाथ व सीओ अनिरुद्ध सिंह ने जेसीबी मंगवाकर सरकारी जगह को समतल कराया। कुछ जगह पर अतिक्रमण था। उसे भी कब्जामुक्त करा दिया। एसडीएम ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इनका भी निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
शनिवार दोपहर गांव पहुंचे एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य और सीओ अनिरुद्ध सिंह ने ग्रामीणों के साथ बैठकर विकास कार्यों के संबंध में बात की। इस दौरान ग्रामीणों ने तमाम समस्याओं को बताया। उन्होंने कहा कि धनूपुरा और भोजपुर गांव कादरचौक से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर है। ऐसे में लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है। कभी लोगों को सवारी मिल जाती है तो कभी पैदल चलना पड़ता है। इस पर सीओ ने कादरचौक में चलने वाले पांच टेंपो इस रोड पर लगा दिए। सीओ ने उन्हें हरी झंडी देकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि अब ग्रामीणों की ये समस्या भी खत्म हुई। गांव में एक ओर पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय के निर्माण को नींव खुदाई का कार्य चल रहा है। यहां अभी ईंटे और बजरी, बजरफुट, सीमेंट नहीं आया है। बताया जाता है कि ये भी दो-एक दिन में आ जाएगा। शनिवार को गांव को बरातघर और खेल मैदान की भी सौगात मिल गई। सीओ ने एक जेसीबी मंगवाकर जगह को समतल कराया। कुछ जगह पर अतिक्रमण था, इस दौरान उसे भी कब्जामुक्त करा दिया।
इलाके में नहीं है सिंचाई की व्यवस्था, ट्यूबवेल बनें तो बने बात
धनूपुरा और भोजपुर के ग्रामीणों की करीब साढ़े सात सौ बीघा जमीन बंजरनुमा पड़ी है। उस पर न खेती हो रही है और न ही वह खेतों को जोत बो रहे हैं। इसकी वजह बताई जा रही है कि इलाके में सिंचाई का इंतजाम नहीं है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने जब ये कदम उठाया है तो कम से कम इलाके में ट्यूबवेल भी बनवाए जाएं, जिससे किसान अपने खेतों की सिंचाई कर सकें। यहां के लोगों के लिए ट्यूबवेल की सबसे बड़ी सौगात होगी। खेतीबाड़ी से उनके परिवार का गुजारा हो सकेगा।
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सोशल मीडिया पर भी दौड़ने लगीं अमर उजाला की खबरें
धनूपुरा और भोजपुर की तस्वीर बदलने का प्रयास भले ही पुलिस का हो, लेकिन अपराध की दलदल में फंस चुके ग्रामीणों की किस्मत बदलने में अमर उजाला भी पुलिस की इस मुहिम में बराबर का साथ दे रहा है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी अमर उजाला में प्रकाशित खबरें दौड़ने लगी हैं। जिस दिन से पुलिस और प्रशासन ने यह मुहिम शुरू की है उस दिन से लगातार अमर उजाला इसे धार देने में जुटा है ताकि न केवल पुलिस का यह प्रयास रंग लाए बल्कि और जगहों की पुलिस भी इससे प्रेरित हो, साथ ही यह भी समझे कि केवल बदलाव की बात करने से कुछ नहीं होता, उसके लिए प्रयास करने होते हैं। सीओ उझानी अनिरुद्ध सिंह के व्यक्तिगत प्रयास से शुरू हुई यह कड़ी आगे और बढ़ती जा रही है। वास्तव में खाकी के इस प्रयास को समझने की सबसे ज्यादा जरूरत खादी को है।
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शनिवार दोपहर गांव पहुंचे एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य और सीओ अनिरुद्ध सिंह ने ग्रामीणों के साथ बैठकर विकास कार्यों के संबंध में बात की। इस दौरान ग्रामीणों ने तमाम समस्याओं को बताया। उन्होंने कहा कि धनूपुरा और भोजपुर गांव कादरचौक से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर है। ऐसे में लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है। कभी लोगों को सवारी मिल जाती है तो कभी पैदल चलना पड़ता है। इस पर सीओ ने कादरचौक में चलने वाले पांच टेंपो इस रोड पर लगा दिए। सीओ ने उन्हें हरी झंडी देकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि अब ग्रामीणों की ये समस्या भी खत्म हुई। गांव में एक ओर पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय के निर्माण को नींव खुदाई का कार्य चल रहा है। यहां अभी ईंटे और बजरी, बजरफुट, सीमेंट नहीं आया है। बताया जाता है कि ये भी दो-एक दिन में आ जाएगा। शनिवार को गांव को बरातघर और खेल मैदान की भी सौगात मिल गई। सीओ ने एक जेसीबी मंगवाकर जगह को समतल कराया। कुछ जगह पर अतिक्रमण था, इस दौरान उसे भी कब्जामुक्त करा दिया।
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इलाके में नहीं है सिंचाई की व्यवस्था, ट्यूबवेल बनें तो बने बात
धनूपुरा और भोजपुर के ग्रामीणों की करीब साढ़े सात सौ बीघा जमीन बंजरनुमा पड़ी है। उस पर न खेती हो रही है और न ही वह खेतों को जोत बो रहे हैं। इसकी वजह बताई जा रही है कि इलाके में सिंचाई का इंतजाम नहीं है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने जब ये कदम उठाया है तो कम से कम इलाके में ट्यूबवेल भी बनवाए जाएं, जिससे किसान अपने खेतों की सिंचाई कर सकें। यहां के लोगों के लिए ट्यूबवेल की सबसे बड़ी सौगात होगी। खेतीबाड़ी से उनके परिवार का गुजारा हो सकेगा।
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सोशल मीडिया पर भी दौड़ने लगीं अमर उजाला की खबरें
धनूपुरा और भोजपुर की तस्वीर बदलने का प्रयास भले ही पुलिस का हो, लेकिन अपराध की दलदल में फंस चुके ग्रामीणों की किस्मत बदलने में अमर उजाला भी पुलिस की इस मुहिम में बराबर का साथ दे रहा है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी अमर उजाला में प्रकाशित खबरें दौड़ने लगी हैं। जिस दिन से पुलिस और प्रशासन ने यह मुहिम शुरू की है उस दिन से लगातार अमर उजाला इसे धार देने में जुटा है ताकि न केवल पुलिस का यह प्रयास रंग लाए बल्कि और जगहों की पुलिस भी इससे प्रेरित हो, साथ ही यह भी समझे कि केवल बदलाव की बात करने से कुछ नहीं होता, उसके लिए प्रयास करने होते हैं। सीओ उझानी अनिरुद्ध सिंह के व्यक्तिगत प्रयास से शुरू हुई यह कड़ी आगे और बढ़ती जा रही है। वास्तव में खाकी के इस प्रयास को समझने की सबसे ज्यादा जरूरत खादी को है।