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‘सोत’ से कब्जे हटाना भूले साहब.. क्या माफिया ने बिगाड़ा ‘हिसाब’
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बदायूं। कभी अपने प्राकृतिक स्रोतों के कारण पहचान रखने वाली सोत नदी पर कब्जे का मुद्दा पुराना है। अब लगभग सूख चुकी सोत नदी को प्रशासन से कब्जों से मुक्त कराने के प्रयास तो किए, लेकिन उसकी कछुआ चाल को देखकर लगता है, मानो प्रशासन चाहता ही न हो कि सोत नदी कब्जा मुक्त हो। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब नदी कब्जा मुक्त ही नहीं होगी तो इसके पुनर्जीवन के प्रयास कैसे शुरू होंगे और कब। इसे देखकर तो लगता है कि जो किसान नदी के पुनर्जीवन की आस लगाकर बैठे हैं उन्हें निराशा ही मिलेगी।
मुरादाबाद मंडल के अमरोहा जिले के समीप से निकली सोत नदी लगभग 220 किलोमीटर लंबी है, सबसे ज्यादा क्षेत्र बदायूं जिले में पड़ता है। इस जिले में बिसौली, बिल्सी, बदायूं और तहसील दातागंज होकर ये नदी निकलती है, लेकिन जैसे-जैसे यह सूखना शुरू हुई, माफिया और सफेदपोश नेताओं की नजरें इस पर पड़ने लगीं और दोनों के गठजोड़ से इस पर कब्जे होने लगे। बीते एक दशक में स्थिति ये हो गई कि शहर के लालपुल इलाके से निकलकर ये नदी बिल्कुल ही लापता हो गई। माफिया ने बिना किसी डर से यहां ऐसा कब्जा किया कि नदी की छाती पर स्थायी बिल्डिंग तक बना लीं। मामला शहर से जुड़ा था ऐसे में सत्ता परिवर्तन होने के साथ ही कब्जा करने वालों पर शासन की नजरें टेड़ी हो गईं। तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह ने शासन से निर्देश मिलने के बाद लालपुल इलाके की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को एक-एक करके ध्वस्त करा दिया। इस कार्रवाई के बाद जिले के लोगों को लगने लगा था कि अब शायद नदी के दिन बहुर जाएंगे और फिर से वह किसानों के लिए सिंचाई का बड़ा साधन बन जाएगी, लेकिन किसानों में अब फिर से निराशा फैलने लगी है। किसानों का कहना है कि प्रशासन फिर से इस मुद्दे को भूल गया है। जब नदी अतिक्रमण मुक्त नहीं हो पाएगी तो फिर इसे पुनर्जीवित कैसे किया जा सकेगा।
आखिर कब जागेगा प्रशासन
पहले कभी जिले में सोत नदी के पानी से किसान अपने खेतों की सिंचाई किया करते थे। गर्मी में लोग उसमें स्नान कर राहत पाते थे, लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ बदल गया। ऐसे में प्रशासन को इस बारे में सोचना चाहिए कि कैसे सोत नदी को दोबारा अस्तित्व में लाया जा सके।
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-दिनेश असावा, बिल्सी
हवा, पानी के बिना जीवन संभव नहीं है। जहां एक तरफ पेड़ काटे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिले में बहने वाली सोत नदी भी सूख चुकी हे। सोतनदी के पुनर्जीवन की आवश्यकता है, ताकि किसानों समेत आम जनता का भला हो सके।
-नीरज सोलंकी, नागरजूना
सोत नदी के जिले में बहने से किसानों की तमाम दिक्कत खुद ही दूर हो जाती थी। ऐसेे में किसानों को सोत नदी का सहारा चाहिए। ताकि किसानों के चेहरे पर वो चमक फिर से आ सकें, जो पहले कभी रहा करती थी।
-जसवीर यादव, मौसमपुर
किसानों के साथ में आम लोगों को भी सोत नदी के फायदा है। क्योंकि नदी की वजह से आसपास के इलाकों को जलस्तर कभी नहीं घटेगा। जिसका फायदा मौजूदा लोगों के साथ-साथ आने वाली पीढ़ी को भी मिलेगा।
- सर्वेश कुमार, बेला
सोत नदी को कब्जा मुक्त कराया जाएगा। इस दिशा में लगातार काम चल रहा है। पिछले दिनों कई स्थानों से अवैध कब्जा हटवाया गया था, आगे भी अभियान जारी रहेगा। पूरी सोत कब्जा मुक्त कराई जाएगी।
- रामनिवास शर्मा, एडीएम प्रशासन
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मुरादाबाद मंडल के अमरोहा जिले के समीप से निकली सोत नदी लगभग 220 किलोमीटर लंबी है, सबसे ज्यादा क्षेत्र बदायूं जिले में पड़ता है। इस जिले में बिसौली, बिल्सी, बदायूं और तहसील दातागंज होकर ये नदी निकलती है, लेकिन जैसे-जैसे यह सूखना शुरू हुई, माफिया और सफेदपोश नेताओं की नजरें इस पर पड़ने लगीं और दोनों के गठजोड़ से इस पर कब्जे होने लगे। बीते एक दशक में स्थिति ये हो गई कि शहर के लालपुल इलाके से निकलकर ये नदी बिल्कुल ही लापता हो गई। माफिया ने बिना किसी डर से यहां ऐसा कब्जा किया कि नदी की छाती पर स्थायी बिल्डिंग तक बना लीं। मामला शहर से जुड़ा था ऐसे में सत्ता परिवर्तन होने के साथ ही कब्जा करने वालों पर शासन की नजरें टेड़ी हो गईं। तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह ने शासन से निर्देश मिलने के बाद लालपुल इलाके की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को एक-एक करके ध्वस्त करा दिया। इस कार्रवाई के बाद जिले के लोगों को लगने लगा था कि अब शायद नदी के दिन बहुर जाएंगे और फिर से वह किसानों के लिए सिंचाई का बड़ा साधन बन जाएगी, लेकिन किसानों में अब फिर से निराशा फैलने लगी है। किसानों का कहना है कि प्रशासन फिर से इस मुद्दे को भूल गया है। जब नदी अतिक्रमण मुक्त नहीं हो पाएगी तो फिर इसे पुनर्जीवित कैसे किया जा सकेगा।
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आखिर कब जागेगा प्रशासन
पहले कभी जिले में सोत नदी के पानी से किसान अपने खेतों की सिंचाई किया करते थे। गर्मी में लोग उसमें स्नान कर राहत पाते थे, लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ बदल गया। ऐसे में प्रशासन को इस बारे में सोचना चाहिए कि कैसे सोत नदी को दोबारा अस्तित्व में लाया जा सके।
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-दिनेश असावा, बिल्सी
हवा, पानी के बिना जीवन संभव नहीं है। जहां एक तरफ पेड़ काटे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिले में बहने वाली सोत नदी भी सूख चुकी हे। सोतनदी के पुनर्जीवन की आवश्यकता है, ताकि किसानों समेत आम जनता का भला हो सके।
-नीरज सोलंकी, नागरजूना
सोत नदी के जिले में बहने से किसानों की तमाम दिक्कत खुद ही दूर हो जाती थी। ऐसेे में किसानों को सोत नदी का सहारा चाहिए। ताकि किसानों के चेहरे पर वो चमक फिर से आ सकें, जो पहले कभी रहा करती थी।
-जसवीर यादव, मौसमपुर
किसानों के साथ में आम लोगों को भी सोत नदी के फायदा है। क्योंकि नदी की वजह से आसपास के इलाकों को जलस्तर कभी नहीं घटेगा। जिसका फायदा मौजूदा लोगों के साथ-साथ आने वाली पीढ़ी को भी मिलेगा।
- सर्वेश कुमार, बेला
सोत नदी को कब्जा मुक्त कराया जाएगा। इस दिशा में लगातार काम चल रहा है। पिछले दिनों कई स्थानों से अवैध कब्जा हटवाया गया था, आगे भी अभियान जारी रहेगा। पूरी सोत कब्जा मुक्त कराई जाएगी।
- रामनिवास शर्मा, एडीएम प्रशासन