{"_id":"5d851f168ebc3e01622a1f82","slug":"civic-amenities-badaun-news-bly376905175","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंदौसी से जुड़ते ही इस्लामनगर का होने लगेगा चहुंमुखी विकास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंदौसी से जुड़ते ही इस्लामनगर का होने लगेगा चहुंमुखी विकास
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इस्लामनगर (बदायूं)। नगर को संभल से जोड़ने के प्रयासों के एक बार फिर शुरू होने की खबर से यहां के व्यापारियों और आम लोगों में हर्ष है। लोगों का कहना है कि इस्लामनगर अगर संभल जिले में शामिल हो जाए तो कस्बे का चहुंमुखी विकास होगा और व्यापारिक गतिविधियां भी बढ़ जाएंगी। यहां बता दें कि ऐसी मांग पहले भी उठी थी, अब एक बार फिर इस संबंध में लोगों ने मांग उठाई है। पिछले दिनों कुछ लोग मुख्यमंत्री आवास पर गए थे और इस संबंध में मांगपत्र सौंपा था।
संभल जिले का मुख्यालय 12 किलोमीटर दूर बहजोई है। जो कस्बे के बहुत पास है। क्षेत्र का अधिकतर व्यापारिक जुड़ाव चंदौसी से सालों से चला आ रहा है। कस्बे की मंडी भी पहले चंदौसी ही थी। फल, सब्जी वाले रोज सुबह संभल जिले के चंदौसी जाकर फल, सब्जी व अन्य जरूरत का सामान लाकर कस्बे में बेचते हैं। कभी क्षेत्र में कोल्ड स्टोर न होने पर क्षेत्र का आलू चंदौसी बहजोई में ही रखा जाता था, हालांकि अब कस्बे में ही दो कोल्ड स्टोर हैं। कस्बा क्षेत्र के लोग संभल जिले के चंदौसी व बहजोई से ही आसपास के जिलों व अलीगढ़, मथुरा, अगरा, दिल्ली, लखनऊ जाने के लिए बस व ट्रेन पकड़ते हैं। कस्बे में अनाज की खरीद का रेट भी चंदौसी व बहजोई मंडी से ही तय होता है। किसान बहजोई व चंदौसी से अपनी फसल गल्ला दलहन, तिलहन का रेट लेकर क्षेत्र के आढ़ती को अपना गल्ला बेचते हैं। प्रदेश की बड़ी मैंथा तेल मंडी भी चंदौसी में ही है। दूर-दूर से मैंथा व्यापारी चंदौसी आकर मैंथा तेल खरीदते हैं। किसान भारी स्तर पर मैंथा उत्पादन करते है, जो चंदौसी जाकर ही बिकता है।
कुल मिलाकर कस्बे का सारा व्यापार चंदौसी पर ही निर्भर रहता है। जो संभल जिले का ही हिस्सा है। क्षेत्र को बिजली भी चंदौसी स्टेशन से ही मिलती है। कहां जाए तो क्षेत्र का सबकुछ ही संभल जिले पर ही निर्भर रहता है। लोग अपने दैनिक जरूरत के कार्यों को भी चंदौसी ही जाते हैं। ब्लॉक क्षेत्र के काफी लोग संभल जिले के चंदौसी में घर बनाकर व किराए पर रहकर अपने बच्चों को वहीं पर शिक्षा दिलाते हैं, बच्चों की शिक्षा के लिए भी क्षेत्र के लोग संभल जिले पर ही निर्भर रहते हैं।
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व्यापारियों को वाणिज्य कर, आयकर के कार्यों के लिए मुख्यालय (बदायूं) जाना पड़ता है। जो कस्बे से 60 किलोमीटर दूर है। घर परिवार का व्यक्ति बदायूं मुख्यालय जाए तो सुबह आकर वह देर शाम ही घर पहुंच पाता है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि जितना जल्दी हो सके सरकार मेहरबान हो जाए और उन्हें बहजोई मुख्यालय से जोड़ दे, तो ज्यादा अच्छा होगा।
जिला मुख्यालय दूर होने से नौकरी करने वाले लोगों को दिक्कत होती है। संभल में शामिल होने से सहूलियत मिलेगी। क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा भौगोलिक स्थिति बदल जाएगी।
-दयासिंधु शंखधार, पूर्व विधायक
क्षेत्र की जनता को अधिकारियों से शिकायत करने व मिलने को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है। अधिक दूरी के चलते किराया भी ज्यादा खर्च होता है। हालात यह है कि काफी लोग जिला मुख्यालय जाने से डरते हैं। संभल में शामिल होने से न्याय की उम्मीद बढ़ जाएगी।
-हाजी बिट्टन अली, पूर्व विधायक 000
छात्र-छात्राओं का शिक्षण कार्य संभल से जुड़ा है। क्षेत्र को अगर उसमें शामिल कर दिया जाए तो बेहतर शिक्षा मिलेगी। व्यापारिक लाभ भी होंगे। सपा सरकार में पूर्व सपा सांसद धर्मेंद्र यादव से मिलकर अपने कार्यकाल में जुड़वाने का प्रयास किया था, तब रिपोर्ट भी मांगी गई थी, लेकिन बाद में प्रयास नहीं हो सके।
-वीरेंद्र लीडर, पूर्व चेयरमैन
दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय रहते संभल जिला मुख्यालय से बेहतर उपचार मिलेगा। कस्बे से बदायूं जाते-जाते ही घायल के साथ अनहोनी होने का डर बना रहता है।
-वाहिद खान, पूर्व चेयरमैन
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संभल जिले का मुख्यालय 12 किलोमीटर दूर बहजोई है। जो कस्बे के बहुत पास है। क्षेत्र का अधिकतर व्यापारिक जुड़ाव चंदौसी से सालों से चला आ रहा है। कस्बे की मंडी भी पहले चंदौसी ही थी। फल, सब्जी वाले रोज सुबह संभल जिले के चंदौसी जाकर फल, सब्जी व अन्य जरूरत का सामान लाकर कस्बे में बेचते हैं। कभी क्षेत्र में कोल्ड स्टोर न होने पर क्षेत्र का आलू चंदौसी बहजोई में ही रखा जाता था, हालांकि अब कस्बे में ही दो कोल्ड स्टोर हैं। कस्बा क्षेत्र के लोग संभल जिले के चंदौसी व बहजोई से ही आसपास के जिलों व अलीगढ़, मथुरा, अगरा, दिल्ली, लखनऊ जाने के लिए बस व ट्रेन पकड़ते हैं। कस्बे में अनाज की खरीद का रेट भी चंदौसी व बहजोई मंडी से ही तय होता है। किसान बहजोई व चंदौसी से अपनी फसल गल्ला दलहन, तिलहन का रेट लेकर क्षेत्र के आढ़ती को अपना गल्ला बेचते हैं। प्रदेश की बड़ी मैंथा तेल मंडी भी चंदौसी में ही है। दूर-दूर से मैंथा व्यापारी चंदौसी आकर मैंथा तेल खरीदते हैं। किसान भारी स्तर पर मैंथा उत्पादन करते है, जो चंदौसी जाकर ही बिकता है।
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कुल मिलाकर कस्बे का सारा व्यापार चंदौसी पर ही निर्भर रहता है। जो संभल जिले का ही हिस्सा है। क्षेत्र को बिजली भी चंदौसी स्टेशन से ही मिलती है। कहां जाए तो क्षेत्र का सबकुछ ही संभल जिले पर ही निर्भर रहता है। लोग अपने दैनिक जरूरत के कार्यों को भी चंदौसी ही जाते हैं। ब्लॉक क्षेत्र के काफी लोग संभल जिले के चंदौसी में घर बनाकर व किराए पर रहकर अपने बच्चों को वहीं पर शिक्षा दिलाते हैं, बच्चों की शिक्षा के लिए भी क्षेत्र के लोग संभल जिले पर ही निर्भर रहते हैं।
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व्यापारियों को वाणिज्य कर, आयकर के कार्यों के लिए मुख्यालय (बदायूं) जाना पड़ता है। जो कस्बे से 60 किलोमीटर दूर है। घर परिवार का व्यक्ति बदायूं मुख्यालय जाए तो सुबह आकर वह देर शाम ही घर पहुंच पाता है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि जितना जल्दी हो सके सरकार मेहरबान हो जाए और उन्हें बहजोई मुख्यालय से जोड़ दे, तो ज्यादा अच्छा होगा।
जिला मुख्यालय दूर होने से नौकरी करने वाले लोगों को दिक्कत होती है। संभल में शामिल होने से सहूलियत मिलेगी। क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा भौगोलिक स्थिति बदल जाएगी।
-दयासिंधु शंखधार, पूर्व विधायक
क्षेत्र की जनता को अधिकारियों से शिकायत करने व मिलने को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है। अधिक दूरी के चलते किराया भी ज्यादा खर्च होता है। हालात यह है कि काफी लोग जिला मुख्यालय जाने से डरते हैं। संभल में शामिल होने से न्याय की उम्मीद बढ़ जाएगी।
-हाजी बिट्टन अली, पूर्व विधायक 000
छात्र-छात्राओं का शिक्षण कार्य संभल से जुड़ा है। क्षेत्र को अगर उसमें शामिल कर दिया जाए तो बेहतर शिक्षा मिलेगी। व्यापारिक लाभ भी होंगे। सपा सरकार में पूर्व सपा सांसद धर्मेंद्र यादव से मिलकर अपने कार्यकाल में जुड़वाने का प्रयास किया था, तब रिपोर्ट भी मांगी गई थी, लेकिन बाद में प्रयास नहीं हो सके।
-वीरेंद्र लीडर, पूर्व चेयरमैन
दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय रहते संभल जिला मुख्यालय से बेहतर उपचार मिलेगा। कस्बे से बदायूं जाते-जाते ही घायल के साथ अनहोनी होने का डर बना रहता है।
-वाहिद खान, पूर्व चेयरमैन