{"_id":"5d83c0dd8ebc3e017d36339a","slug":"civic-amenities-badaun-news-bly3767706167","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोर्ट के आदेश से गन्ना उत्पादकों में जगी बकाया भुगतान की उम्मीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोर्ट के आदेश से गन्ना उत्पादकों में जगी बकाया भुगतान की उम्मीद
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उझानी (बदायूं)। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ब्याज समेत किसानों को एक माह के भीतर भुगतान करने के आदेश के बाद किसानों ने राहत की सांस ली है। इसे लेकर समय-समय पर किसानों की आवाज बुलंद करने वाले भाकियू नेताओं के चेहरों पर भी रौनक लौट आई है। भुगतान कब से मिलना शुरू हो जाएगा, यह अभी तय नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि कोर्ट के आदेश के बाद अधिकारी और चीनी मिलें अब और ज्यादा टालमटोल नहीं कर पाएंगी। उन्हें बकाया भुगतान चुकता करना ही पड़ेगा।
बदायूं जिले में शेखूपुर की जिला सहकारी चीनी मिल, बिसौली की यदु शुगर मिल के अलावा जिले में ही अपने सेंटर लगाकर रामपुर में शाहबाद के करीमगंज, कासगंज जिले की न्योली शुगर मिल, संभल जिले में रजपुरा और बरेली की फरीदपुर की चीनी मिलों ने भी गन्ना खरीदा था। इनमें रजपुरा और फरीदपुर की चीनी मिलों को गन्ना बेचने वाले किसानों को बकाया भुगतान प्राप्त हो चुका है, लेकिन शेष चीनी मिलों को गन्ना बेचकर किसानों को बकाया भुगतान पाले के भटकना पड़ा। गन्ना उत्पादकों ने पहले तो खुद ही बकाया भुगतान को लेकर अफसरों को जगाने की कोशिश की, लेकिन जब कोई नतीजा सामने नहीं आया तो उनके हक की आवाज बुलंद करने के लिए भारतीय किसान यूनियन ने आंदोलन की राह पकड़ ली। हालांकि नियम किसानों को 14 दिन के अंदर बेचे गए गन्ने का भुगतान देने की है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा था। चीनी मिलें किसानों का करोड़ों रुपये गन्ना मूल्य भुगतान दाबे बैठी हैं।
यदु शगर मिल पर सर्वाधिक 114.8 करोड़ रुपये बकाया
उझानी। बदायूं जिले के किसानों से जिन पांच चीनी मिलों ने गन्ना खरीदा, उनमें बिसौली की यदु शुगर मिल का रकबा सबसे ज्यादा था। यदु शुगर मिल पर गन्ना उत्पादकों का इस समय 114.8 करोड़ रुपया बकाया है। शेखूपुर की जिला सहकारी चीनी मिल पर 3.87 करोड़ रुपये तो रामपुर जिले में शाहबाद के करीमगंज की चीनी मिल 11.63 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान दाबे बैठी हैं। कासगंज के न्योली शुगर मिल पर 5.42 करोड़ रुपये बकाया है।
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किसानों के बकाया गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर भाकियू के स्तर से कई बार आवाज उठाई गई थी, लेकिन गन्ना विभाग के अफसरों ने अन्नदाता की आवाज का दबाने की कोशिश की। अब, अफसरों को जागना होगा।
-आसिम उमर, जिला महामंत्री भाकियू
चीनी मिलों ने किसानों के बकाया को लेकर शुरू से ही कोशिश नहीं की। नियम तो यह है कि किसानों को बकाया का भुगतान मय ब्याज मिलना चाहिए। इसके लिए भी किसानों के हक की आवाज उठाई जाएगी।
-चंद्रमोहन वर्मा, नगर अध्यक्ष, भाकियू।
खासकर बकाया गन्ना मूल्य बकाया को लेकर चीनी मिल प्रबंधन की भूमिका हहर साल ही उदासीनता वाली रहती है। कभी भी समय पर भुगतान नहीं मिल पाता। इसके लिए कोर्ट को अब चीनी प्रबंधन पर शिकंजा कसना चाहिए।
- छोटे लाल, किसान, कादरचौक
गन्ना उत्पादकों को अब मिला है न्याय
गन्ना की खेती ममें किसानों को काफी रकम खर्च करना होती है। जरुरत पड़ने पर ब्याज पर रुपये लेकर भी लागत के रूप में इस्तेमाल करने पड़ते हैं लेकिन समय पर भुगतान नहीं मिले तो दिक्कत बढ़ जाती है। अब न्याय मिलेगा।- लवकुश, किसान।
बकाया भुगतान को लेकर अभी तक कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है। अफसर तो यही चाहते हैं कि किसानों को उसके बकाया का जल्दी से जल्दी भुगतान मिले, लेकिन चीनी मिलों की वजह से देर हो जाती है।
- रामकिशन, जिला गन्ना अधिकारी।
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बदायूं जिले में शेखूपुर की जिला सहकारी चीनी मिल, बिसौली की यदु शुगर मिल के अलावा जिले में ही अपने सेंटर लगाकर रामपुर में शाहबाद के करीमगंज, कासगंज जिले की न्योली शुगर मिल, संभल जिले में रजपुरा और बरेली की फरीदपुर की चीनी मिलों ने भी गन्ना खरीदा था। इनमें रजपुरा और फरीदपुर की चीनी मिलों को गन्ना बेचने वाले किसानों को बकाया भुगतान प्राप्त हो चुका है, लेकिन शेष चीनी मिलों को गन्ना बेचकर किसानों को बकाया भुगतान पाले के भटकना पड़ा। गन्ना उत्पादकों ने पहले तो खुद ही बकाया भुगतान को लेकर अफसरों को जगाने की कोशिश की, लेकिन जब कोई नतीजा सामने नहीं आया तो उनके हक की आवाज बुलंद करने के लिए भारतीय किसान यूनियन ने आंदोलन की राह पकड़ ली। हालांकि नियम किसानों को 14 दिन के अंदर बेचे गए गन्ने का भुगतान देने की है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा था। चीनी मिलें किसानों का करोड़ों रुपये गन्ना मूल्य भुगतान दाबे बैठी हैं।
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यदु शगर मिल पर सर्वाधिक 114.8 करोड़ रुपये बकाया
उझानी। बदायूं जिले के किसानों से जिन पांच चीनी मिलों ने गन्ना खरीदा, उनमें बिसौली की यदु शुगर मिल का रकबा सबसे ज्यादा था। यदु शुगर मिल पर गन्ना उत्पादकों का इस समय 114.8 करोड़ रुपया बकाया है। शेखूपुर की जिला सहकारी चीनी मिल पर 3.87 करोड़ रुपये तो रामपुर जिले में शाहबाद के करीमगंज की चीनी मिल 11.63 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान दाबे बैठी हैं। कासगंज के न्योली शुगर मिल पर 5.42 करोड़ रुपये बकाया है।
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किसानों के बकाया गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर भाकियू के स्तर से कई बार आवाज उठाई गई थी, लेकिन गन्ना विभाग के अफसरों ने अन्नदाता की आवाज का दबाने की कोशिश की। अब, अफसरों को जागना होगा।
-आसिम उमर, जिला महामंत्री भाकियू
चीनी मिलों ने किसानों के बकाया को लेकर शुरू से ही कोशिश नहीं की। नियम तो यह है कि किसानों को बकाया का भुगतान मय ब्याज मिलना चाहिए। इसके लिए भी किसानों के हक की आवाज उठाई जाएगी।
-चंद्रमोहन वर्मा, नगर अध्यक्ष, भाकियू।
खासकर बकाया गन्ना मूल्य बकाया को लेकर चीनी मिल प्रबंधन की भूमिका हहर साल ही उदासीनता वाली रहती है। कभी भी समय पर भुगतान नहीं मिल पाता। इसके लिए कोर्ट को अब चीनी प्रबंधन पर शिकंजा कसना चाहिए।
- छोटे लाल, किसान, कादरचौक
गन्ना उत्पादकों को अब मिला है न्याय
गन्ना की खेती ममें किसानों को काफी रकम खर्च करना होती है। जरुरत पड़ने पर ब्याज पर रुपये लेकर भी लागत के रूप में इस्तेमाल करने पड़ते हैं लेकिन समय पर भुगतान नहीं मिले तो दिक्कत बढ़ जाती है। अब न्याय मिलेगा।- लवकुश, किसान।
बकाया भुगतान को लेकर अभी तक कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है। अफसर तो यही चाहते हैं कि किसानों को उसके बकाया का जल्दी से जल्दी भुगतान मिले, लेकिन चीनी मिलों की वजह से देर हो जाती है।
- रामकिशन, जिला गन्ना अधिकारी।