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शहर से एक-एक कर गायब हो रहे तालाब
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sun, 29 May 2016 11:39 PM IST
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तालाब
- फोटो : अमर उजाला
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तालाबों पर कब्जा करने से शहर का ड्रेनेज सिस्टम हो गया खराब
नाले-नालियां चौक हो जाने से कई बाहरी बस्तियों में फैल रहा पानी
प्रदूषण के साथ ही निचले इलाकों में बीमारियों के फैलने का खतरा
शहर में पांच प्रमुख तालाबों में से तीन पर कब्जा हो गया और इनके स्थानों पर अब इमारतें बनी खड़ी हैं। किसी सरकार ने भी उस समय कब्जे हटवाने या तालाबों को संरक्षण देने का काम नहीं किया। खास बात यह है कि भूमाफिया किसी तरह भी तालाबों से जुड़े कागजातों से छेड़छाड़ करा लेते हैं और उसके बाद उन पर कब्जे कर लेते हैं। प्रशासन उनकी दाबेदारी और प्रभाव के कारण हथियार डाल देते हैं। तालाबों पर कब्जे हो जाने के कारण शहर के ड्रेनेज सिस्टम भी बेकार हो गया है। शहर में जलभराव हर मौसम की समस्या बन गया है। निचले इलाकों में जलभराव प्रदूषण के जीते-जागते उदाहरण बने हुए हैं। दो तालाब बचे हैं, उन पर भी अतिक्रमण बाकी है।
शहर की तीन दशक पहले की तस्वीर बदल गई है। प्राकृतिक सुंदरता गायब हो गई है। कंकरीट के मकानों ने शहर को तपन और उमस से भर दिया है। निचले इलाकों में स्थाई जलभराव प्रदूषण के साथ लोगों का जीवन दुश्वार बनाए हुए है। गांधी ग्राउंड के पूरब और पश्चिम मेें दो बड़े तालाब थे। तीन दशक पूर्व तक इन्हें देखा जाता रहा लेकिन अब गायब हैं। नई नस्ल को हो पता भी नहीं है कि यहां भव्य तालाब गांधी ग्राउंड की सुंदरता और बढ़ाते थे। एक तालाब पर स्कूल भवन है तो दूससे पर दुकानें और कालोनी बस गई है। पथिक चौक पर भी बड़ा तालाब था। जहां कालोनी बस चुकी है।
शहर का ऐतिहासिक चंदोखर तालाब भी काफी पाटा जा चुका है। प्रभावी लोगों को हस्तक्षेप होने के कारण कोई प्रतिक्रया इस पर नहीं हुई है। बताते तो यह भी हैं कि जहां 23 मई को मुख्यमंत्री का आगमन और सभा हुई वहां तक चंदोखर का अस्तित्व रहा था। सागर तालाब जहां जाड़ों में साइबेरियन पक्षी भी आ जाते हैं। वहां आसपास के इलाकों में अतिक्रमण हो गया है। तालाबों के प्रति सहृदयता नहीं रहने से ही इनका अस्तित्व मिटता जा रहा है।
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सूरज कुंड के बाद सागर ताल के सुंदरीकरण से होगी सुरक्षा
यहां बता दें कि जिलाधिकारी सीपी त्रिपाठी ने सूरज कुंड के सुंदरीकरण की योजना शासन से मंजूर करा ली है। उनका प्रयास है कि सागर ताल का भी सुदंरीकरण कराया जाए। इनका सुंदरीकरण हो जाएगा और आसपास का क्षेत्र चिह्नांकित कर वहां लोगों को बैठने और मौज मस्ती को जगह बन जाएगी तो भविष्य में इन तालाबों पर अतिक्रमण नहीं हो सकेगा। अगर, शहर के सभी तालाबों पर पहले से यह व्यवस्था लागू होती तो आज गायब हुए तालाब भी सुरक्षित होते।
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तालाबों पर अतिक्रमण की शिकायतें मिलीं हैं। जब भी ऐसा हुआ है, उन्होंने जांच कराई है। चंदोखर और सागर तालाब पर अतिक्रमण को लेकर आई शिकायतों को निस्तारण कर दिया गया। दरअसल, जहां अतिक्रमण बताया गया है, वहां चकबंदी पूर्व के दस्तावेज दिखवा लिए गए हैं। वहां किसानों के नाम जमीने दर्ज मिलीं हैं।
- प्रदीप यादव, एसडीएम सदर
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नाले-नालियां चौक हो जाने से कई बाहरी बस्तियों में फैल रहा पानी
प्रदूषण के साथ ही निचले इलाकों में बीमारियों के फैलने का खतरा
शहर में पांच प्रमुख तालाबों में से तीन पर कब्जा हो गया और इनके स्थानों पर अब इमारतें बनी खड़ी हैं। किसी सरकार ने भी उस समय कब्जे हटवाने या तालाबों को संरक्षण देने का काम नहीं किया। खास बात यह है कि भूमाफिया किसी तरह भी तालाबों से जुड़े कागजातों से छेड़छाड़ करा लेते हैं और उसके बाद उन पर कब्जे कर लेते हैं। प्रशासन उनकी दाबेदारी और प्रभाव के कारण हथियार डाल देते हैं। तालाबों पर कब्जे हो जाने के कारण शहर के ड्रेनेज सिस्टम भी बेकार हो गया है। शहर में जलभराव हर मौसम की समस्या बन गया है। निचले इलाकों में जलभराव प्रदूषण के जीते-जागते उदाहरण बने हुए हैं। दो तालाब बचे हैं, उन पर भी अतिक्रमण बाकी है।
शहर की तीन दशक पहले की तस्वीर बदल गई है। प्राकृतिक सुंदरता गायब हो गई है। कंकरीट के मकानों ने शहर को तपन और उमस से भर दिया है। निचले इलाकों में स्थाई जलभराव प्रदूषण के साथ लोगों का जीवन दुश्वार बनाए हुए है। गांधी ग्राउंड के पूरब और पश्चिम मेें दो बड़े तालाब थे। तीन दशक पूर्व तक इन्हें देखा जाता रहा लेकिन अब गायब हैं। नई नस्ल को हो पता भी नहीं है कि यहां भव्य तालाब गांधी ग्राउंड की सुंदरता और बढ़ाते थे। एक तालाब पर स्कूल भवन है तो दूससे पर दुकानें और कालोनी बस गई है। पथिक चौक पर भी बड़ा तालाब था। जहां कालोनी बस चुकी है।
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शहर का ऐतिहासिक चंदोखर तालाब भी काफी पाटा जा चुका है। प्रभावी लोगों को हस्तक्षेप होने के कारण कोई प्रतिक्रया इस पर नहीं हुई है। बताते तो यह भी हैं कि जहां 23 मई को मुख्यमंत्री का आगमन और सभा हुई वहां तक चंदोखर का अस्तित्व रहा था। सागर तालाब जहां जाड़ों में साइबेरियन पक्षी भी आ जाते हैं। वहां आसपास के इलाकों में अतिक्रमण हो गया है। तालाबों के प्रति सहृदयता नहीं रहने से ही इनका अस्तित्व मिटता जा रहा है।
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सूरज कुंड के बाद सागर ताल के सुंदरीकरण से होगी सुरक्षा
यहां बता दें कि जिलाधिकारी सीपी त्रिपाठी ने सूरज कुंड के सुंदरीकरण की योजना शासन से मंजूर करा ली है। उनका प्रयास है कि सागर ताल का भी सुदंरीकरण कराया जाए। इनका सुंदरीकरण हो जाएगा और आसपास का क्षेत्र चिह्नांकित कर वहां लोगों को बैठने और मौज मस्ती को जगह बन जाएगी तो भविष्य में इन तालाबों पर अतिक्रमण नहीं हो सकेगा। अगर, शहर के सभी तालाबों पर पहले से यह व्यवस्था लागू होती तो आज गायब हुए तालाब भी सुरक्षित होते।
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तालाबों पर अतिक्रमण की शिकायतें मिलीं हैं। जब भी ऐसा हुआ है, उन्होंने जांच कराई है। चंदोखर और सागर तालाब पर अतिक्रमण को लेकर आई शिकायतों को निस्तारण कर दिया गया। दरअसल, जहां अतिक्रमण बताया गया है, वहां चकबंदी पूर्व के दस्तावेज दिखवा लिए गए हैं। वहां किसानों के नाम जमीने दर्ज मिलीं हैं।
- प्रदीप यादव, एसडीएम सदर