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Budaun News: मौज-मस्ती के नाम रहा स्कूलों में बच्चों का पहला दिन
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(01 बीडीएन-01)बच्चो को स्कूल छोड़ने जाते अभिवाभक
- स्कूल खुलते ही बच्चों के साथ मम्मी-पापा की भी बदली दिनचर्या
- सरकारी स्कूलों के शिक्षक बच्चों को बुलाने के लिए उनके घर पर गए
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। सरकारी के साथ ही प्राइवेट स्कूलों में शैक्षिक सत्र शनिवार से शुरू हो गया। स्कूलों के समय में भी परिवर्तन कर दिया गया है। सुबह बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मम्मी-पापा को भी जल्दी उठना पड़ा। मम्मियों ने बच्चों को तैयार किया, टिफिन लगाया तो पापा उन्हें छोड़ने स्कूल गए। इससे उनकी दिनचर्या भी प्रभावित हुई। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को तो बच्चों को बुलाने के लिए उनके घर-घर जाना पड़ा, फिर भी कम ही बच्चे स्कूल पहुंचे।
सरकारी से लेकर प्राइवेट स्कूलों में शैक्षिक सत्र 2022-23 की वार्षिक गृह परीक्षा फरवरी-मार्च में हो गईं थीं। अधिकांश स्कूलों ने 31 मार्च को रिजल्ट भी घोषित कर दिए। एक अप्रैल से शिक्षा का नया सत्र प्रारंभ हो गया। नया सत्र शुरू होने पर पहले दिन सबसे ज्यादा दिक्कतें गृहणियों को हुईं, क्योंकि स्कूलों की छुट्टी होने की वजह से परिवार के सभी लोगों के सोने, उठने, खाने-पीने का समय बदल गया था, लेकिन अब बच्चों को स्कूल भेजने के लिए उन्हें जल्दी उठना पड़ रहा है। बच्चों को उठाना, तैयार करना, उनके लिए टिफिन पैक करना, नाश्ता तैयार करना पड़ रहा है।
आवास विकास निवासी सोनी मिश्रा ने बताया कि आज पहला दिन था तो ज्यादा दिक्कत हुई। मोबाइल में अलार्म लगाकर सोए। सुबह पांच बजे उठ गए। हालांकि कुछ दिनों में इसकी आदत पड़ जाएगी, फिर कोई दिक्कत नहीं होगी। वहीं साथ ही कई गृहणियों को बच्चों को स्कूल या स्कूल वाहन तक छोड़ने भी जाना पड़ेगा। कुछ जगहों पर स्कूल छोड़ने या स्कूल वाहन तक छोड़ने की जिम्मेदारी बच्चों के पापा को निभानी पड़ेगी। ऐसे में उनकी भी दिनचर्या पूरी तरह से बदल गई है।
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स्कूल में बच्चों ने की मस्ती
नए सत्र में खुले स्कूलों में पहले दिन पढ़ाई तो नाममात्र के लिए हुए, हालांकि बच्चों ने पहले दिन जमकर मस्ती और अधिकांश समय खेलकूद और दोस्तों के साथ बीच में गुजारा। यहां तक की बच्चों ने स्कूल से आते समय अपने वाहनों में भी जमकर मस्ती की।
अब तक स्कूल बंद चल रहे थे, ऐसे में मनमर्जी से सोना-उठना हो रहा था। रात में आने वाले नाटकों और फिल्मों को देखते रहते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। स्कूल खुलने से हर काम का समय फिर से निर्धारित करना होगा। उसी के अनुसार दिनचर्या तय होगी।
- मीनाक्षी, गृहणी
स्कूल बंद होने की वजह से जब मन होता बच्चों का तब मनचाही चीजें बना लिया करते थे, लेकिन अब बच्चों को फिर से एक संतुलित खाना दिया जाएगा। इसके साथ ही मोबाइल में अलार्म लगाकर सोना पड़ रहा है। क्योंकि अभी आंख समय पर नहीं खुल पा रही है।
- कांति, गृहणी
स्कूल खुलने की वजह से दिनचर्या तो पूरी तरह से बदल गई है। क्योंकि बच्चों के स्कूल सुबह आठ बजे से हैं। ऐसे में समय में बच्चों को छोड़ने के लिए पहले जाना पड़ता है। ऐसे में अब रात के सोने की समय में बदलाव करना होगा।
- सुुशील साहू, व्यापारी
बच्चों के स्कूल के लिए टिफिन तैयार किया जाता है। साथ ही उनको तैयार किया जाता है। इस बीच में आवाजें होने की वजह से नींद पूरी तरह से उड़ जाती है। जिसकी वजह से हमें भी उठना पड़ता है। पहले अपने समय के हिसाब से उठना हुआ करता था।
-प्रमोद कुमार, स्वास्थ्य विभाग
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- सरकारी स्कूलों के शिक्षक बच्चों को बुलाने के लिए उनके घर पर गए
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। सरकारी के साथ ही प्राइवेट स्कूलों में शैक्षिक सत्र शनिवार से शुरू हो गया। स्कूलों के समय में भी परिवर्तन कर दिया गया है। सुबह बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मम्मी-पापा को भी जल्दी उठना पड़ा। मम्मियों ने बच्चों को तैयार किया, टिफिन लगाया तो पापा उन्हें छोड़ने स्कूल गए। इससे उनकी दिनचर्या भी प्रभावित हुई। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को तो बच्चों को बुलाने के लिए उनके घर-घर जाना पड़ा, फिर भी कम ही बच्चे स्कूल पहुंचे।
सरकारी से लेकर प्राइवेट स्कूलों में शैक्षिक सत्र 2022-23 की वार्षिक गृह परीक्षा फरवरी-मार्च में हो गईं थीं। अधिकांश स्कूलों ने 31 मार्च को रिजल्ट भी घोषित कर दिए। एक अप्रैल से शिक्षा का नया सत्र प्रारंभ हो गया। नया सत्र शुरू होने पर पहले दिन सबसे ज्यादा दिक्कतें गृहणियों को हुईं, क्योंकि स्कूलों की छुट्टी होने की वजह से परिवार के सभी लोगों के सोने, उठने, खाने-पीने का समय बदल गया था, लेकिन अब बच्चों को स्कूल भेजने के लिए उन्हें जल्दी उठना पड़ रहा है। बच्चों को उठाना, तैयार करना, उनके लिए टिफिन पैक करना, नाश्ता तैयार करना पड़ रहा है।
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आवास विकास निवासी सोनी मिश्रा ने बताया कि आज पहला दिन था तो ज्यादा दिक्कत हुई। मोबाइल में अलार्म लगाकर सोए। सुबह पांच बजे उठ गए। हालांकि कुछ दिनों में इसकी आदत पड़ जाएगी, फिर कोई दिक्कत नहीं होगी। वहीं साथ ही कई गृहणियों को बच्चों को स्कूल या स्कूल वाहन तक छोड़ने भी जाना पड़ेगा। कुछ जगहों पर स्कूल छोड़ने या स्कूल वाहन तक छोड़ने की जिम्मेदारी बच्चों के पापा को निभानी पड़ेगी। ऐसे में उनकी भी दिनचर्या पूरी तरह से बदल गई है।
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स्कूल में बच्चों ने की मस्ती
नए सत्र में खुले स्कूलों में पहले दिन पढ़ाई तो नाममात्र के लिए हुए, हालांकि बच्चों ने पहले दिन जमकर मस्ती और अधिकांश समय खेलकूद और दोस्तों के साथ बीच में गुजारा। यहां तक की बच्चों ने स्कूल से आते समय अपने वाहनों में भी जमकर मस्ती की।
अब तक स्कूल बंद चल रहे थे, ऐसे में मनमर्जी से सोना-उठना हो रहा था। रात में आने वाले नाटकों और फिल्मों को देखते रहते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। स्कूल खुलने से हर काम का समय फिर से निर्धारित करना होगा। उसी के अनुसार दिनचर्या तय होगी।
- मीनाक्षी, गृहणी
स्कूल बंद होने की वजह से जब मन होता बच्चों का तब मनचाही चीजें बना लिया करते थे, लेकिन अब बच्चों को फिर से एक संतुलित खाना दिया जाएगा। इसके साथ ही मोबाइल में अलार्म लगाकर सोना पड़ रहा है। क्योंकि अभी आंख समय पर नहीं खुल पा रही है।
- कांति, गृहणी
स्कूल खुलने की वजह से दिनचर्या तो पूरी तरह से बदल गई है। क्योंकि बच्चों के स्कूल सुबह आठ बजे से हैं। ऐसे में समय में बच्चों को छोड़ने के लिए पहले जाना पड़ता है। ऐसे में अब रात के सोने की समय में बदलाव करना होगा।
- सुुशील साहू, व्यापारी
बच्चों के स्कूल के लिए टिफिन तैयार किया जाता है। साथ ही उनको तैयार किया जाता है। इस बीच में आवाजें होने की वजह से नींद पूरी तरह से उड़ जाती है। जिसकी वजह से हमें भी उठना पड़ता है। पहले अपने समय के हिसाब से उठना हुआ करता था।
-प्रमोद कुमार, स्वास्थ्य विभाग

(01 बीडीएन-01)बच्चो को स्कूल छोड़ने जाते अभिवाभक

(01 बीडीएन-01)बच्चो को स्कूल छोड़ने जाते अभिवाभक

(01 बीडीएन-01)बच्चो को स्कूल छोड़ने जाते अभिवाभक

(01 बीडीएन-01)बच्चो को स्कूल छोड़ने जाते अभिवाभक